प्र1.
क्या आपने कभी गड्ढों में से जल को विलुप्त होते देखा है? यह कहाँ जाता होगा? अपने मित्रों से चर्चा कीजिए।
उत्तर
हाँ। सुबह जो गड्ढे जल से भरे रहते हैं, वे शाम तक छोटे हो जाते हैं या पूरी तरह सूख जाते हैं।
जल गड्ढे से दो रास्तों से जाता है:
- यह भूमि में रिस जाता है। मिट्टी, बालू और गारे के कणों के बीच सूक्ष्म रिक्त स्थान होते हैं जिनमें जल नीचे उतर जाता है।
- यह वायु में वाष्पित हो जाता है। गड्ढे की सतह का जल धीरे-धीरे जलवाष्प में बदलकर वायु में मिल जाता है और अदृश्य हो जाता है।
दोनों हो रहे हैं, यह कैसे जानें: ढीली मिट्टी पर बना गड्ढा बहुत जल्दी गायब होता है — वहाँ रिसाव अधिक है। पर सीमेंट के फर्श या पत्थर की शिला पर बना गड्ढा भी सूख जाता है, और वहाँ जल कहीं रिस नहीं सकता, अत: वह अवश्य वाष्पित हुआ होगा। खेल के मैदान में, जहाँ मिट्टी है, दोनों रास्ते साथ-साथ काम करते हैं।
चर्चा के लिए सुझाव: मित्रों से पूछिए कि धूप वाला गड्ढा पहले सूखता है या पेड़ की छाया वाला। यदि केवल रिसाव ही कारण होता तो छाया से कोई अंतर नहीं पड़ना चाहिए था। अंतर पड़ता है — यही वाष्पीकरण का प्रमाण है।