कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.7

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हमने कौन-सी परिस्थितियाँ समान रखीं? हमने इस अन्वेषण में क्या परिवर्तन किए? हमने क्या मापा?
उत्तर

ये तीनों प्रश्न हर निष्पक्ष जाँच की रीढ़ हैं।

प्रश्नक्रियाकलाप 8.7 के लिए उत्तर
हमने क्या समान रखा?जल की मात्रा (ढक्कन और प्लेट दोनों में समान), प्रयुक्त द्रव (दोनों में जल, या दोनों में सैनिटाइजर), स्थान — दोनों एक-दूसरे के निकट, अत: समान ताप, समान वायु-गति और समान आर्द्रता, तथा आरंभ का समय
हमने क्या परिवर्तित किया?केवल एक बात — जल का अनावृत्त (खुला) क्षेत्र। बोतल के ढक्कन में यह कम है और प्लेट में अधिक।
हमने क्या मापा?प्रत्येक स्थिति में जल के पूरी तरह वाष्पित होने में लगने वाला समय
दोनों को साथ-साथ क्यों रखना आवश्यक है: यदि एक को धूप वाली खिड़की पर और दूसरे को अलमारी में रखा जाता तो एक साथ दो बातें बदल जातीं — क्षेत्र और ताप — और हम कभी न बता पाते कि अंतर किसके कारण हुआ। ठीक एक परिस्थिति बदलना ही जाँच को निष्पक्ष बनाता है।
सुझाव: दोनों के लिए जल उसी चम्मच या उसी मापक ढक्कन से नापिए। जब आप समय का अंतर माप रहे हों तो "लगभग बराबर" पर्याप्त नहीं होता।
प्र2.
प्रत्येक स्थिति में जल के पूरी तरह से वाष्पित होने में लगने वाले समय को तालिका 8.4 में अंकित करें। इस अन्वेषण से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर

गरम दिन में एक चम्मच जल के लिए प्रतिदर्श पाठ्यांक के साथ तालिका 8.4 (आपके मान भिन्न होंगे):

जल का अनावृत्त (खुला) क्षेत्रपूर्ण वाष्पीकरण में लगने वाला समय
कम (बोतल का ढक्कन)लगभग 3 घंटे
अधिक (प्लेट)लगभग 35 मिनट

निष्कर्ष: प्लेट का जल बोतल के ढक्कन के उतने ही जल से कहीं तेजी से वाष्पित होता है। पुस्तक के शब्दों में — यदि आप प्लेट में जल फैलाते हैं तो वह वायु के संपर्क में अधिक आता है। इसलिए इसका वाष्पीकरण तीव्र होता है।

अधिक अनावृत्त क्षेत्र → सतह पर अधिक जल-कण → तीव्र वाष्पीकरण
क्षेत्र इतना महत्वपूर्ण क्यों है: कण केवल जल की सतह से निकल सकते हैं, भीतर से नहीं। ढक्कन में जल का छोटा-सा गोला वायु के सामने होता है; प्लेट में वही जल चौड़ी पतली परत बन जाता है जिसका क्षेत्रफल कई गुना है। अधिक सतह अर्थात् अधिक निकास-मार्ग, अत: उतना ही जल बहुत कम समय में चला जाता है।
हम इसे रोज कहाँ काम में लाते हैं: कपड़े मोड़कर नहीं, फैलाकर सुखाते हैं; अनाज, पापड़ और मिर्च छत पर पतली परत में फैलाते हैं; चाय ठंडी करने के लिए तश्तरी में उँडेलते हैं; और नमक बनाने वाले समुद्र-जल को गहरे टैंकों के स्थान पर चौड़ी उथली क्यारियों में फैलाते हैं।
प्र3.
यदि उपर्युक्त क्रियाकलाप में जल के स्थान पर दूध लिया जाए तो क्या होगा?
उत्तर

वही प्रवृत्ति दिखाई देगी — प्लेट का दूध बोतल के ढक्कन के दूध से बहुत पहले सूख जाएगा — पर कुछ रोचक अंतर भी होंगे।

  • दूध मुख्यत: जल ही है, अत: उसमें का जल ठीक उसी प्रकार वाष्पित होता है और अनावृत्त क्षेत्र ही गति तय करता है।
  • दूध को शुद्ध जल से कुछ अधिक समय लगेगा, क्योंकि उसमें उपस्थित वसा, प्रोटीन और शर्करा सतह पर एक परत बना देते हैं जो जल-कणों के निकलने को धीमा कर देती है।
  • दूध पूरी तरह गायब नहीं होगा। सारा जल चले जाने पर पीछे सूखी सफेद-पीली ठोस परत बच जाएगी — वसा, प्रोटीन, दुग्ध-शर्करा और खनिज।
  • बहुत देर छोड़ने पर वह परत खट्टी गंध देने लगेगी, क्योंकि दूध खराब हो जाता है।
इससे क्या सीखने को मिलता है: दूध में से केवल जल वाष्पित होता है। उसमें घुले और मिले ठोस पीछे रह जाते हैं। यही सिद्धांत घंटों दूध औटाने पर खोया (मावा) देता है और नमक-क्यारियों में समुद्र-जल सूखने पर नमक देता है।
सुझाव: यदि आप वास्तव में यह करें तो बहुत थोड़ी मात्रा लीजिए और बची हुई परत फेंक दीजिए — उसे चखिए नहीं।
प्र4.
क्रियाकलाप 8.7 से मिलता-जुलता एक अन्य क्रियाकलाप बनाइए जिससे यह जाना जा सके कि जल के वाष्पन की तीव्रता को प्रभावित करने वाली अन्य परिस्थितियाँ कौन-सी हैं। आप क्या परिवर्तन करेंगे और क्या समान रखेंगे? तालिका 8.5 में आँकड़े अंकित करें।
उत्तर

एक परिस्थिति चुनिए, केवल उसे बदलिए और शेष सब समान रखिए। तीन अच्छे प्रारूप:

प्रारूपपरिवर्तित परिस्थितिसमान रखी गई परिस्थितियाँक्या मिलता है
क. वायु की गतिएक तश्तरी चलते पंखे के नीचे, दूसरी उसी कमरे की शांत वायु मेंवही तश्तरियाँ, उतना ही जल, वही कमरे का ताप, वही आर्द्रता, साथ-साथ आरंभपंखे के नीचे वाली तश्तरी बहुत पहले सूखती है
ख. तापएक तश्तरी धूप वाली खिड़की पर, दूसरी उसी कमरे की छाया मेंवही तश्तरियाँ, उतना ही जल, वही शांत वायुगरम स्थान वाली तश्तरी बहुत पहले सूखती है
ग. आर्द्रताएक तश्तरी खुले कमरे में, वैसी ही दूसरी उलटे काँच के मर्तबान से ढकी हुईवही तश्तरियाँ, उतना ही जल, वही स्थान, वही तापढकी तश्तरी लगभग सूखती ही नहीं — मर्तबान की वायु शीघ्र वाष्प से भर जाती है

प्रारूप "क" के लिए भरी गई तालिका 8.5:

स्थिति जो समान रखी गई — जल की मात्रा, तश्तरी का आकार, कमरे का ताप, आर्द्रता
स्थिति जो परिवर्तित हुईपूर्ण वाष्पीकरण में लगने वाला समय
शांत वायु (पंखा बंद)लगभग 2 घंटे 30 मिनट
गतिशील वायु (पंखा पूरी गति पर)लगभग 45 मिनट
बहती वायु वाष्पीकरण को तेज क्यों करती है: जल के ठीक ऊपर की वायु की परत शीघ्र ही वाष्प से भर जाती है और फिर आगे निकलने को रोक देती है। पंखा या हवा उस भरी हुई परत को निरंतर हटाकर ताजी, शुष्क वायु लाती रहती है, अत: वाष्पीकरण पूरी गति से चलता रहता है।
स्वयं जाँचें: प्रारूप "ग" सबसे चौंकाने वाला है और उसके लिए केवल एक काँच का मर्तबान चाहिए। यह सबसे स्पष्ट रूप से दिखाता है कि अंतत: वाष्पीकरण को आर्द्रता ही रोकती है।
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