कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.8

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक ढक्कन को सूर्य के प्रकाश में और दूसरे को छाया में रखें, प्रत्येक 15 मिनट के पश्चात दोनों का अवलोकन करें तथा प्रत्येक स्थिति में जल के पूरी तरह वाष्पित होने में लगने वाला समय अंकित करें। क्रियाकलाप 8.8 और अन्य समान अनुभवों से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर

स्वच्छ ग्रीष्म दिवस में दो समान ढक्कनों में बराबर जल के लिए प्रतिदर्श पाठ्यांक:

ढक्कन कहाँ रखा हैपूर्ण वाष्पीकरण में लगने वाला समय
सूर्य के प्रकाश मेंलगभग 1 घंटा 15 मिनट
छाया मेंलगभग 4 घंटे

पुस्तक के शब्दों में निष्कर्ष:

  • छाया वाले स्थान में रखे ढक्कन की तुलना में सूर्य के प्रकाश में रखे हुए ढक्कन से जल तीव्रता से वाष्पित हो जाता है।
  • प्राय: तेज धूप वाले दिनों में कपड़े जल्दी सूख जाते हैं
  • हवा की गति बढ़ने से जल तीव्रता से वाष्पित होता है — तेज हवा वाले दिन कपड़े जल्दी सूखते हैं।
  • बरसात के दिन जल धीरे-धीरे वाष्पित होता है, क्योंकि वायु में आर्द्रता पहले से अधिक होती है।
सूर्य का प्रकाश इतना बड़ा अंतर क्यों लाता है: धूप जल और ढक्कन दोनों को गरम करती है। अधिक गरम जल अर्थात् अधिक तेज चलते कण, और प्रति सेकंड कहीं अधिक कण सतह से निकल भागते हैं। ध्यान दीजिए कि दोनों ढक्कन एक जैसे थे, उनमें जल भी बराबर था और दोनों को 15-15 मिनट के समान अंतराल पर देखा गया — अत: केवल ताप ही भिन्न था।
सुझाव: केवल "धूप ने सुखा दिया" मत लिखिए। बताइए कि कौन-सी परिस्थिति बदली — जल का ताप — और शेष सब समान रखा गया। यही अवलोकन को निष्कर्ष बनाता है।
प्र2.
प्राय: तेज धूप वाले दिनों में कपड़े जल्दी सूख जाते हैं। क्या तेज हवा वाले दिन कपड़े जल्दी सूखते हैं या धीमी गति से?
उत्तर

जल्दी सूखते हैं। तेज हवा वाले दिन कपड़े अधिक तेजी से सूखते हैं — प्राय: शांत गरम दिन से भी तेज।

अधिक वायु की गति → कपड़े के ऊपर की आर्द्र परत हट जाती है → तीव्र वाष्पीकरण

हवा इतनी सहायक क्यों है:

  1. जल वाष्पित होते ही गीले कपड़े से सटी हुई अत्यंत आर्द्र वायु की पतली परत बन जाती है।
  2. यदि वह परत वहीं टिकी रहे तो शीघ्र ही वाष्प से भर जाती है और वाष्पीकरण लगभग रुक जाता है।
  3. हवा इस भरी हुई परत को उड़ा ले जाती है और उसके स्थान पर ताजी, शुष्क वायु लाती है।
  4. अत: कपड़े की सतह के सामने सदा शुष्क वायु रहती है और जल पूरी गति से निकलता रहता है।
धूप से महत्वपूर्ण अंतर पर ध्यान दीजिए: हवा ऊष्मा नहीं देती — बहती हवा प्राय: शांत वायु से ठंडी ही होती है। वह वाष्प हटाकर सुखाना तेज करती है, जल को गरम करके नहीं। यह बहुत सामान्य भ्रांति है, और अभ्यास का प्रश्न 5 इसी पर आधारित है।
दैनिक प्रमाण: इसीलिए धुले कपड़े बंद स्नानघर के स्थान पर खुली, हवादार जगह में टाँगे जाते हैं, और उसी दिन वही कपड़े दीवारों से घिरी बालकनी की तुलना में छत पर जल्दी सूखते हैं।
प्र3.
यदि आप बरसात के दिन अपने कपड़े सुखाना चाहते हैं तो आप इन्हें शीघ्रता से कैसे सुखा सकते हैं?
उत्तर

बरसात के दिन वायु पहले से बहुत आर्द्र होती है, अत: हमें शेष तीन परिस्थितियों — क्षेत्र, वायु की गति और ताप — पर काम करना होगा।

क्या करेंयह किस परिस्थिति का उपयोग करता है
पहले कपड़ों को अच्छी तरह निचोड़िए या मशीन में घुमाइएसुखाने से पहले ही अधिकांश जल निकल जाता है
हर कपड़े को चौड़े तार या स्टैंड पर पूरा फैलाइए, कभी सिमटा या मोड़ा हुआ नहींअनावृत्त क्षेत्र बढ़ता है
कपड़ों के बीच अंतर रखकर टाँगिएदोनों ओर वायु पहुँच पाती है
पंखा चलाइए, या दो खुली खिड़कियों के बीच के झोंके में टाँगिएवायु की गति बढ़ती है और आर्द्र परत हट जाती है
गरम कमरे में सुखाइए, या गरम इस्तरी फेरिए, या हेयर ड्रायर अथवा मशीन के ड्रायर का उपयोग कीजिएताप बढ़ता है
छोटे बंद स्नानघर में मत सुखाइएवहाँ बंद वायु वाष्प से भर जाती है और सूखना रुक जाता है
यहाँ आर्द्रता ही खलनायक क्यों है: यदि वायु में जल की मात्रा पहले से ही अधिक है (अधिक आर्द्रता) तो जल मंदगति से वाष्पित होता है। वायु के पास और वाष्प लेने की जगह ही कम बची होती है। मौसम हम नहीं बदल सकते, पर एक पंखा और भली-भाँति फैलाया गया कपड़ा काम कर देते हैं।
क्या आप जानते हैं? बरसात के दिनों में वायु में जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है इसलिए बरसात के दिन अधिक आर्द्र होते हैं। इसीलिए बरसात का दिन चिपचिपा लगता है — पसीना वाष्पित नहीं हो पाता, अत: शरीर सरलता से ठंडा नहीं हो पाता।
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