आप क्या अनुभव करते हैं: फूँक मारते समय गीला हाथ स्पष्ट रूप से ठंडा लगता है; सूखे हाथ पर लगभग कुछ नहीं लगता, अधिक से अधिक हल्की हवा। फूँक बंद करते ही अंतर घट जाता है। जल के स्थान पर स्पिरिट से हाथ गीला कीजिए तो ठंडक और भी तीखी लगती है।
कारण:
- आप जो वायु छोड़ते हैं वह लगभग 37 °C पर होती है — यह आपके शरीर का ताप है। वह कमरे से अधिक गरम है, ठंडी नहीं। अत: ठंडक वायु से नहीं आ सकती।
- गीले हाथ पर बहती वायु त्वचा के ठीक ऊपर की आर्द्र परत को हटा देती है और वाष्पीकरण तेज कर देती है।
- वाष्पित होते जल को ऊष्मा चाहिए, और वह ऊष्मा वह आपकी त्वचा से लेता है।
- आपकी त्वचा ऊष्मा खोती है और आपको ठंडक लगती है।
- सूखे हाथ पर जल है ही नहीं, अत: वाष्पित होने को कुछ नहीं और कोई ऊष्मा नहीं हटती।
सूखे हाथ पर फूँक → वाष्पीकरण नहीं → लगभग कोई ठंडक नहीं