प्र1.
क्या आपको कागज पर कुछ धब्बे दिखाई देते हैं? आपको क्या लगता है कि कागज पर क्या बचा है? कागज छूकर आप नमक की उपस्थिति महसूस कर सकते हैं। पानी कहाँ लुप्त हो गया?
उत्तर
हाँ — बूँदें सूखने के बाद काले कागज़ पर ठीक उन्हीं स्थानों पर हल्के सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। वहाँ जो बचा है वह नमक है। उँगली फेरने पर वह थोड़ा खुरदरा-सा लगता है।
पानी कहाँ गया: वह लुप्त नहीं हुआ। वह वाष्पित हो गया — धीरे-धीरे जलवाष्प में बदलकर कमरे की वायु में मिल गया।
कागज़ पर नमक का विलयन
→ जल जलवाष्प बनकर वायु में चला जाता है (वाष्पीकरण)
→ नमक सफेद धब्बे के रूप में पीछे रह जाता है
→ जल जलवाष्प बनकर वायु में चला जाता है (वाष्पीकरण)
→ नमक सफेद धब्बे के रूप में पीछे रह जाता है
केवल जल ही क्यों जाता है: जल साधारण ताप पर भी आसानी से वाष्प बन जाता है। नमक नहीं बनता — वह ठोस ही रहता है। इसलिए मिश्रण के सूखने पर द्रव चला जाता है और घुला ठोस रह जाता है। समुद्र के नमक-खेतों में ठीक यही होता है, बस वहाँ “कागज़” एक विशाल उथला गड्ढा है और “सुखाने” का काम सूर्य करता है।
यह करके देखें: अपनी नमक-कलाकृति बनाइए। मोटे काले कागज़ पर नमक के विलयन से कोई आकृति बनाकर धूप में सुखाइए। सूखने पर रेखाएँ सफेद उभर आएँगी — नमक ने आपका चित्र बना दिया।