कुतूहल अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
साबरमती आश्रम किसलिए प्रसिद्ध है? दांडी यात्रा का एक पोस्टर बनाएँ और चर्चा करें कि इस यात्रा का आयोजन क्यों किया गया था।
उत्तर

अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे स्थित साबरमती आश्रम महात्मा गांधी का 1917 से 1930 तक का निवास था। यह उस स्थान के रूप में प्रसिद्ध है जहाँ से उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का बड़ा भाग संचालित किया और जहाँ से दांडी यात्रा आरंभ हुई।

तथ्यविवरण
आरंभ12 मार्च 1930, साबरमती आश्रम से
समापन6 अप्रैल 1930, गुजरात के समुद्र तट पर स्थित दांडी में
पैदल दूरीलगभग 385 किमी, 24 दिनों में
आरंभ मेंगांधी जी और 78 सहयोगी; मार्ग में हज़ारों लोग जुड़ते गए
दांडी में क्या कियातट से प्राकृतिक नमक की एक डली उठाकर नमक कानून तोड़ा

यह यात्रा क्यों आयोजित की गई: ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों के लिए स्वयं नमक बनाना या इकट्ठा करना अवैध कर दिया था और खरीदे जाने वाले नमक पर कर लगा दिया था। नमक हर घर की — अमीर और गरीब दोनों की — आवश्यकता है, इसलिए यह कर सबसे अधिक गरीबों पर भारी पड़ता था। गांधी जी ने जान-बूझकर नमक चुना — इससे एक साधारण, रोज़मर्रा की आवश्यकता अन्यायपूर्ण शासन के विरुद्ध प्रतीक बन गई। नमक कानून तोड़ना अहिंसक सविनय अवज्ञा था, और इसी ने स्वतंत्रता आंदोलन को सच्चा जन-आंदोलन बनाया।

नमूना उत्तर — पोस्टर में क्या बनाएँ: आगे लाठी लिए चलते गांधी जी और उनके पीछे यात्रियों की लंबी कतार; गुजरात का मानचित्र जिस पर साबरमती → दांडी का मार्ग दिखे; नीचे समुद्र और नमक के खेत; और शब्द — “नमक सत्याग्रह, 12 मार्च – 6 अप्रैल 1930”। एक कोने में नमक की ढेरी बनाकर लिखें “नमक भारत की जनता का है।”
इस अध्याय से संबंध: दांडी में गांधी जी ने जो नमक उठाया, वह प्रकृति ने इसी अध्याय की एक विधि से बनाया था — समुद्री जल का वाष्पीकरण
प्र2.
नमक कहाँ से प्राप्त होता है?
उत्तर

समुद्र-जल से — और खारी झीलों तथा सेंधा नमक की खानों से भी।

समुद्री जल एक मिश्रण है: उसमें कई लवण और अन्य पदार्थ जल में घुले रहते हैं। नमक इस प्रकार पृथक किया जाता है:

समुद्री जल को तट के पास चौड़े, उथले गड्ढों में भरा जाता है।
धूप और वायु से जल वाष्पित होता है।
कुछ दिनों में जल समाप्त हो जाता है और गड्ढे में लवणों का ठोस मिश्रण बचता है।
इसका आगे शोधन कर साधारण नमक प्राप्त किया जाता है।
गड्ढे उथले और चौड़े क्यों होते हैं: वाष्पीकरण सतह से होता है। चौड़ा और उथला गड्ढा बड़ी सतह और जल की पतली परत देता है, इसलिए सूर्य उसे शीघ्र गरम कर देता है और वह महीनों के बजाय दिनों में सूख जाता है।
क्या आप जानते हैं? भारत विश्व के सबसे बड़े नमक उत्पादकों में है। गुजरात के खारागोड़ा और कच्छ के छोटे रण, तमिलनाडु के तूतीकोरिन और मुंबई के तट से बहुत बड़ी मात्रा में नमक मिलता है। इसे बनाने वाले मज़दूर अगरिया कहलाते हैं।
प्र3.
भारत में उन जलाशयों के विषय में पता लगाएँ जिनमें साधारण नमक पाया जाता है। इसका एक स्रोत राजस्थान में सांभर झील है।
उत्तर

समुद्र के अतिरिक्त भारत की कई भीतरी झीलें खारी हैं। इनमें जल आता तो है, पर बाहर निकलने के लिए कोई नदी नहीं होती — इसलिए जल केवल वाष्प बनकर जा सकता है और साथ लाया लवण वहीं जमा होता रहता है।

जलाशयराज्यविशेष
सांभर झीलराजस्थानभारत की सबसे बड़ी भीतरी खारी झील; सदियों से यहाँ नमक बनता है
पचपदरा और डीडवाना झीलराजस्थानथार क्षेत्र की पुरानी नमक उत्पादक झीलें
लोनार झीलमहाराष्ट्रउल्कापिंड के गिरने से बनी खारी क्रेटर झील
पैंगोंग त्सो और त्सो मोरीरीलद्दाखअधिक ऊँचाई पर स्थित खारे जल की झीलें
चिल्का झीलओडिशाबंगाल की खाड़ी से जुड़ी खारे-मीठे जल की झील
कच्छ का रणगुजरातविशाल नमकीन दलदल, जो सूखकर सफेद नमक का मरुस्थल बन जाता है
झील खारी क्यों हो जाती है: चट्टानों और मिट्टी पर बहता वर्षा-जल थोड़े-थोड़े लवण घोलकर झील में ले आता है। झील से जल वाष्प बनकर उड़ जाता है, पर लवण वाष्प नहीं बन सकता — इसलिए हर सूखे मौसम के बाद झील थोड़ी और खारी हो जाती है।
यह करके देखें: भारत के रेखा-मानचित्र पर ये स्थान अंकित कीजिए। आप देखेंगे कि इनमें से अधिकतर शुष्क क्षेत्रों में हैं, जहाँ वाष्पीकरण तेज़ और वर्षा कम होती है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ