कुतूहल अध्याय 9 क्रियाकलाप 9.3: आइए, जाँच करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप क्या देखते हैं? चीनी मिट्टी की डिश में क्या शेष है? क्या आपको नमक पुन: प्राप्त हुआ?
उत्तर

गरम करने पर विलयन पहले उबलने लगता है। डिश से भाप उठती है और द्रव का स्तर घटता जाता है। जब सारा जल उबलकर उड़ जाता है, तो चीनी मिट्टी की डिश में सूखे सफेद नमक की परत चिपकी रह जाती है।

हाँ, नमक पुन: प्राप्त हो जाता है — डिश ठंडी होने पर आप उसे उँगलियों से छूकर महसूस कर सकते हैं।

नमक का विलयन गरम किया
→ जल वाष्प बनकर उड़ गया
चीनी मिट्टी की डिश में सफेद ठोस नमक शेष
यहाँ निस्यंदन क्यों काम नहीं करता: विलयन में नमक इतने सूक्ष्म रूप में बँट जाता है कि वह जल के साथ छोटे-से-छोटे छिद्र से भी निकल जाता है — न वह दिखता है, न छाना जा सकता है। किसी घुले हुए ठोस को पृथक करने का एक ही उपाय है — द्रव को वाष्प बनाकर उड़ा देना, अर्थात् वाष्पीकरण
सावधान: गरम चीनी मिट्टी की डिश पर कभी झुकें नहीं और गरम करने के तुरंत बाद उसे छुएँ नहीं। यह क्रियाकलाप शिक्षक द्वारा प्रदर्शित कराएँ और डिश ठंडी होने पर ही नमक छुएँ।
प्र2.
क्या कोई ऐसी विधि है जिससे मैं नमक और जल दोनों प्राप्त कर सकता हूँ? चित्र का अवलोकन करें। क्या यह प्रश्न का उत्तर देता है? क्या आप इसमें निहित प्रक्रिया का नाम बता सकते हैं?
उत्तर

हाँ। क्रियाकलाप 9.3 में नमक तो बच गया, पर जल वायु में उड़ गया। दोनों पाने के लिए वाष्प को पकड़कर ठंडा करना होगा, जिससे वह पुन: द्रव बन जाए।

चित्र यही दिखाता है — केतली से उठती भाप ऊपर रखी ठंडी प्लेट से टकराती है और प्लेट से स्वच्छ जल की बूँदें गिलास में टपकती हैं।

नमक के विलयन को गरम करें → जल वाष्प बनता है ……… वाष्पीकरण
वाष्प को ठंडी सतह पर ठंडा करें → वाष्प द्रव बनती है ……… संघनन
परिणाम: गिलास में शुद्ध जल + पात्र में शेष नमक

प्रक्रिया का नाम: दोनों चरण मिलकर वाष्पीकरण के बाद संघनन कहलाते हैं। प्रयोगशाला में उपकरणों सहित करने पर इसे आसवन (डिस्टिलेशन) कहते हैं।

बूँदें शुद्ध जल क्यों होती हैं: केवल जल वाष्प बनता है। नमक गरम पात्र में ही रह जाता है। इसलिए ठंडी प्लेट पर जो संघनित होता है, वह बिना नमक का जल है — आसुत जल इसी प्रकार बनाया जाता है।
स्वयं जाँचें: उबलते पानी की भाप के थोड़ा ऊपर कुछ क्षणों के लिए ठंडी स्टील की प्लेट पकड़िए। उसकी निचली सतह पर जल की बूँदें बन जाएँगी। यही संघनन है — वाष्पीकरण का उल्टा — और वर्षा भी इसी प्रकार बनती है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ