चाय बनाने के बाद आप चाय की पत्तियों को कैसे पृथक करते हैं?
उत्तर
दो तरीके हैं, और अध्याय दोनों दिखाता है।
चालनी से — निस्यंदन। चाय को चाय की चालनी से छान लीजिए। सारी पत्तियाँ जाली में रुक जाती हैं और स्वच्छ चाय कप में आ जाती है।
बिना चालनी के — अवसादन के बाद निस्तारण। बर्तन को कुछ देर स्थिर छोड़ दीजिए ताकि पत्तियाँ तली में बैठ जाएँ, फिर बर्तन को धीरे से तिरछा कर चाय कप में उड़ेल दीजिए, अवसाद के किनारे तक पहुँचने से पहले रुक जाइए।
अवसादन और निस्तारण एक ही काम के दो चरण हैं — पहले भारी पत्तियों को तली में बैठने दीजिए, फिर स्वच्छ चाय को उनसे अलग उड़ेल लीजिए।
कौन-सी विधि बेहतर: निस्यंदन, क्योंकि यह हर पत्ती हटा देता है। निस्तारण तेज़ है और उसमें कोई उपकरण नहीं चाहिए, पर कुछ बारीक पत्तियाँ द्रव के साथ आ ही जाती हैं — इसीलिए दादा जी के मुँह में फिर भी कुछ पत्तियाँ आ जाती हैं।
सुझाव: निस्तारण तभी काम करता है जब ठोस द्रव से भारी और उसमें अघुलनशील हो, ताकि वह तली में बैठ सके। चाय में घुली चीनी का निस्तारण कभी नहीं किया जा सकता।
प्र2.
‘हमारे आस-पास की सामग्री’ अध्याय में आपने पढ़ा कि तेल जल में मिश्रित नहीं होता है और कुछ समय तक बिना हिलाए रखने पर एक अलग परत बना लेता है। तेल और जल को पृथक करने के लिए आप किस विधि का उपयोग करेंगे?
उत्तर
निस्तारण (डीकेंटेशन)।
मिश्रण को तब तक स्थिर छोड़ दीजिए जब तक दो स्पष्ट परतें न बन जाएँ — ऊपर तेल, नीचे जल।
पात्र को धीरे-धीरे तिरछा करके ऊपर की तेल की परत दूसरे पात्र में उड़ेल दीजिए; अथवा नीचे टोंटी वाले पात्र (पृथक्कारी कीप) से पहले नीचे का जल निकाल लीजिए।
यह क्यों काम करता है: तेल और जल अमिश्रणीय हैं — वे आपस में घुलते नहीं। और तेल जल से हल्का (कम घनत्व वाला) है, इसलिए वह सदैव ऊपर तैरता है। दोनों परतों के बीच स्पष्ट सीमा होने के कारण ऊपर की परत को नीचे वाली से अलग उड़ेला जा सकता है।
निस्यंदन क्यों नहीं? निस्यंदक किसी ठोस को द्रव से अलग करता है। तेल द्रव है — वह जल के साथ ही फिल्टर-पत्र से निकल जाएगा। इसी कारण दूध की मलाई भी ऊपर से उतार ली जाती है, क्योंकि वह हल्की होती है।
प्र3.
बालन मल्ली से पूछता है कि क्या वह मटमैले जल के निस्यंदन के लिए चाय की चालनी का उपयोग कर सकता है। आओ, क्यों न हम स्वयं करके इसका पता लगाएँ।
उत्तर
ठीक से नहीं। चाय की चालनी केवल बड़े टुकड़े — पत्ते, तिनके, कंकड़ — रोक पाती है। नीचे आया जल फिर भी भूरा और मटमैला ही रहता है।
प्रयुक्त निस्यंदक
छिद्रों का आकार
मटमैले जल पर परिणाम
चाय की चालनी
काफी बड़े छिद्र
बड़े टुकड़े हट जाते हैं; जल फिर भी मटमैला
मलमल का कपड़ा (कुछ परतें)
धागों के बीच छोटे रंध्र
काफी स्वच्छ, पर हल्की धुँधलाहट बची रहती है
फिल्टर-पत्र
अत्यंत सूक्ष्म छिद्र
मिट्टी अवशेष के रूप में रुक जाती है; स्वच्छ निस्यंद मिलता है
क्यों: कोई निस्यंदक केवल उन्हीं कणों को रोकता है जो उसके छिद्रों से बड़े हों। मिट्टी के कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं, इसलिए वे चाय की चालनी के बड़े छिद्रों से सीधे निकल जाते हैं। उन्हें रोकने के लिए छिद्र कणों से भी बारीक होने चाहिए।
महत्वपूर्ण: फिल्टर-पत्र से छना तालाब का जल भी पीने योग्य नहीं होता। वह केवल दिखने वाली अशुद्धियाँ हटाता है, रोगाणु नहीं। जल को बाद में उबालना भी आवश्यक है — अभ्यास के प्रश्न 10 में लीला यही करती है।
प्र4.
हमें कपड़े का टुकड़ा क्यों उपयोग करना चाहिए?
उत्तर
क्योंकि बुना हुआ कपड़ा स्वयं एक बना-बनाया निस्यंदक है। कपड़े के टुकड़े की बुनाई में धागों के बीच बहुत छोटे छिद्र या रंध्र होते हैं, और यही रंध्र छानने का काम करते हैं।
ये रंध्र चाय की चालनी के छिद्रों से कहीं अधिक बारीक होते हैं, इसलिए कहीं अधिक मिट्टी रुक जाती है।
कपड़ा सस्ता है, हर घर में मिलता है और धोकर बार-बार उपयोग किया जा सकता है।
मोड़ने पर कई परतें बन जाती हैं, जिससे रास्ता और सँकरा हो जाता है और अधिक कण फँसते हैं।
एक प्राचीन भारतीय पद्धति: लोग सदियों से पीने का जल कपड़े से छानते आए हैं — अध्याय स्वयं यह कहता है। आज भी अनेक गाँवों में मटके के मुँह पर बँधा सूती या मलमल का कपड़ा जल छानता है।
क्या आप जानते हैं? यही विचार मलमल के टी-बैग, दही के लिए प्रयुक्त छन्नी और कोविड-19 में पहने गए कपड़े के मास्क में भी काम करता है — ये सब धागों के बीच के रंध्रों के कारण ही काम करते हैं।
प्र5.
स्वच्छ जल पाने के लिए मुझे कपड़े की कितनी परतों का उपयोग करना होगा?
उत्तर
कोई एक निश्चित संख्या नहीं है — यह इस पर निर्भर करता है कि जल कितना मटमैला है और कपड़ा कितना बारीक। व्यवहार में साफ़ सूती या मलमल के कपड़े की तीन-चार परतें एक परत से कहीं बेहतर जल देती हैं।
1 परत → कुछ मिट्टी निकल जाती है, जल अब भी भूरा-सा
2–3 परतें → स्पष्ट रूप से अधिक स्वच्छ 4 परतें → और भी स्वच्छ, पर जल अब बहुत धीरे टपकता है
अधिक परतें क्यों सहायक हैं: हर परत के अपने रंध्र होते हैं, और एक परत के रंध्र दूसरी परत के रंध्रों के ठीक ऊपर नहीं आते। इसलिए जो कण पहली परत से निकल जाता है, वह दूसरी या तीसरी परत में रुक जाता है। अर्थात् अधिक परतें = अधिक बारीक छनाई।
एक सीमा भी है: एक सीमा के बाद अतिरिक्त परतें जल को केवल धीमा कर देती हैं, अधिक स्वच्छ नहीं करतीं। यदि जल फिर भी साफ़ न हो तो और कपड़ा मत जोड़िए — पहले मिट्टी को बैठने दीजिए (अवसादन) और फिर छानिए, या फिल्टर-पत्र जैसा बारीक निस्यंदक लीजिए।
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