कुतूहल अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चने की दाल में मुरमुरों की थोड़ी मात्रा मिल गई है। क्या आप हस्त चयन के अलावा किसी अन्य विधि से इस मिश्रण को पृथक करने के विषय में सोच सकते हैं?
उत्तर

हाँ — यहाँ ओसाई (फूँक मारकर पृथक करना) सर्वोत्तम विधि है।

दोनों अवयवों की तुलना कीजिए:

अवयवकैसा है
मुरमुरेभीतर से हवा भरे, आकार के अनुपात में बहुत हल्के, ज़रा-सी हवा में उड़ जाते हैं
चने की दालकठोर, ठोस और तुलना में भारी
मिश्रण को सूप या चपटी थाली में लें।
पंखे के सामने या हवा में धीरे-धीरे उछालें।
मुरमुरे उड़कर एक ओर गिर जाते हैं; चने की दाल सूप में वापस आ जाती है।
यहाँ हस्त चयन उपयुक्त क्यों नहीं: हस्त चयन तभी सुविधाजनक है जब अनुपयोगी अवयव कम मात्रा में हो और उसके टुकड़े उठाने योग्य बड़े हों। मुरमुरे बहुत सारे, हल्के होते हैं और दबाने पर टूट जाते हैं — पूरी शाम लग जाएगी।
एक और संभव विधि: छानना — ऐसी चालनी लें जिसके छिद्रों से चने की दाल निकल जाए पर बड़े मुरमुरे रुक जाएँ। फिर भी ओसाई अधिक तेज़ है।
प्र2.
आपके विचार में किसान इतनी सारी भूसी से अनाज कैसे अलग करते हैं?
उत्तर

वे यह काम पवन से कराते हैं — इस विधि को ओसाई (विनोइंग) कहते हैं।

  1. थ्रेश किए गए ढेर (अनाज और भूसी एक साथ) को सूप में भरा जाता है, जो बाँस से बना उथला पात्र होता है।
  2. किसान ऊँचे चबूतरे पर खड़ा होता है ताकि गिरती सामग्री को बहती वायु में अधिक दूरी तय करनी पड़े।
  3. वह सामग्री को वायु की दिशा में बार-बार ऊपर उछालता है।
  4. भारी दाने लगभग सीधे नीचे गिरकर एक ढेरी बना लेते हैं। हल्की भूसी बगल में उड़ जाती है और दूर जाकर बैठती है।
ऊँचा चबूतरा क्यों आवश्यक है: सामग्री जितनी देर हवा में रहेगी, पवन को भूसी को बगल में धकेलने का उतना ही अधिक समय मिलेगा। कम ऊँचाई से गिराने पर दोनों लगभग एक साथ गिरेंगे और पृथक्करण अच्छा नहीं होगा।
क्या आप जानते हैं? आधुनिक थ्रेशर मशीन थ्रेशिंग और ओसाई दोनों एक साथ करती है — वह पूलों को पीटती है और गिरते दानों के बीच से तेज़ हवा का झोंका निकालती है।
प्र3.
चित्र 9.4 से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? क्या गेहूँ के दाने और भूसी, दोनों अवयव एक ही स्थान पर गिरते हैं? गेहूँ के दाने और भूसी में से कौन-सा अवयव उड़कर दूर चला जाता है? क्या पवन दो अवयवों को पृथक कर सकती है?
उत्तर

नहीं, दोनों एक ही स्थान पर नहीं गिरते। भूसी उड़कर दूर चली जाती है; दाने किसान के पैरों के पास ही गिरते हैं। हाँ, पवन दोनों अवयवों को पृथक कर सकती है — चित्र यही दर्शाता है।

वायु की दिशा सूप (बाँस का पात्र) ऊँचा चबूतरा अनाज (भारी) पास ही गिरता है भूसी (हल्की) दूर उड़ जाती है
ओसाई — एक ही पवन दोनों अवयवों पर लगती है, पर वह केवल हल्की भूसी को हटा पाती है। भारी दाने लगभग सीधे गिरकर अलग ढेरी बना लेते हैं।
दोनों अलग-अलग स्थान पर क्यों गिरते हैं: पवन सूप से गिरने वाली हर चीज़ को एक ही बगल का धक्का देती है। भूसी का हल्का टुकड़ा उस धक्के से आसानी से खिसक जाता है और दूर जाकर गिरता है। भारी दाना उसे लगभग अनुभव ही नहीं करता और सीधा नीचे आ जाता है। इसलिए दो ढेरियाँ बनती हैं — चबूतरे के पास अनाज, दूर भूसी।
सुझाव: इसीलिए बंद कमरे में ओसाई नहीं होती। जहाँ वायु बह ही नहीं रही, वहाँ बगल का धक्का लगता ही नहीं और दोनों अवयव एक ही स्थान पर गिरते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ