प्र1.
क्या आप भी अपने प्रियजनों के संपर्क में रहते हैं?
उत्तर
हाँ। मल्ली और वल्ली का परिवार भारत भर में फैले अपने मित्रों और रिश्तेदारों के संपर्क में रहता है, और हममें से अधिकांश लोग भी ऐसा ही करते हैं।
- फोन और वीडियो कॉल से — रविवार को गाँव में नानी जी को फोन, वीडियो कॉल ताकि दादा-दादी देख सकें कि आप कितने बड़े हो गए।
- मिलने जाकर — गरमी की छुट्टियों में नाना-नानी के घर, दीवाली, पोंगल, बिहू या ईद पर घर जाना।
- पत्र और संदेश से — पोस्टकार्ड, नववर्ष का शुभकामना-पत्र, फोन पर संदेश।
- मौसम की छोटी सौगातों से — आम, गुड़, घर का अचार या लड्डू, जो किसी के जाने पर भेज दिए जाते हैं।
पुस्तक यहाँ से क्यों शुरू करती है: पूरा अध्याय एक यात्रा है। संपर्क बना रहने के कारण ही बच्चे हरियाणा, गुजरात, पुडुचेरी, मध्यप्रदेश और मेघालय जा पाते हैं — और हर स्थान पर उन्हें पृथक्करण की एक नई विधि दैनिक जीवन में प्रयोग होती दिखती है। विज्ञान केवल प्रयोगशाला में नहीं, नानी जी के आँगन में भी है।
यह करके देखें: अपनी कॉपी में भारत का मानचित्र बनाएँ और मल्ली-वल्ली के पाँचों पड़ाव अंकित करें — हरियाणा, अहमदाबाद (गुजरात), पुडुचेरी, भोपाल (मध्यप्रदेश) और शिलांग (मेघालय)। प्रत्येक के आगे वहाँ सीखी गई पृथक्करण विधि लिखें।