कुतूहल अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप भी अपने प्रियजनों के संपर्क में रहते हैं?
उत्तर

हाँ। मल्ली और वल्ली का परिवार भारत भर में फैले अपने मित्रों और रिश्तेदारों के संपर्क में रहता है, और हममें से अधिकांश लोग भी ऐसा ही करते हैं।

  • फोन और वीडियो कॉल से — रविवार को गाँव में नानी जी को फोन, वीडियो कॉल ताकि दादा-दादी देख सकें कि आप कितने बड़े हो गए।
  • मिलने जाकर — गरमी की छुट्टियों में नाना-नानी के घर, दीवाली, पोंगल, बिहू या ईद पर घर जाना।
  • पत्र और संदेश से — पोस्टकार्ड, नववर्ष का शुभकामना-पत्र, फोन पर संदेश।
  • मौसम की छोटी सौगातों से — आम, गुड़, घर का अचार या लड्डू, जो किसी के जाने पर भेज दिए जाते हैं।
पुस्तक यहाँ से क्यों शुरू करती है: पूरा अध्याय एक यात्रा है। संपर्क बना रहने के कारण ही बच्चे हरियाणा, गुजरात, पुडुचेरी, मध्यप्रदेश और मेघालय जा पाते हैं — और हर स्थान पर उन्हें पृथक्करण की एक नई विधि दैनिक जीवन में प्रयोग होती दिखती है। विज्ञान केवल प्रयोगशाला में नहीं, नानी जी के आँगन में भी है।
यह करके देखें: अपनी कॉपी में भारत का मानचित्र बनाएँ और मल्ली-वल्ली के पाँचों पड़ाव अंकित करें — हरियाणा, अहमदाबाद (गुजरात), पुडुचेरी, भोपाल (मध्यप्रदेश) और शिलांग (मेघालय)। प्रत्येक के आगे वहाँ सीखी गई पृथक्करण विधि लिखें।
प्र2.
अपने क्षेत्र के लोकगीत खोजें और अपने मित्रों के साथ गाकर आनंद लें।
उत्तर

खेत में किसान पूलों को पीटते हुए गाते हैं — यह समय की बर्बादी नहीं है। कार्य-गीत सबको एक ही लय में रखता है, और लय में किया गया काम तेज़ भी होता है और कम थकाता भी है।

यह क्रियाकलाप कैसे करें:

  1. घर के किसी बड़े से — दादी जी, खेत में काम करने वाले, राजमिस्त्री से — कोई कार्य-गीत पूछें।
  2. उसके बोल कॉपी में लिखें और उनका अर्थ पता करें।
  3. धुन सीखें, फिर कक्षा में समूह बनाकर ताली की थाप पर गाएँ।

फसल से जुड़े कुछ लोकगीत:

क्षेत्रलोक-विधाकब गाया जाता है
पंजाब और हरियाणाबोलियाँ, भंगड़ा और गिद्धा के गीतगेहूँ की कटाई, बैसाखी पर
असमबिहू गीतधान की बुवाई और कटाई पर
महाराष्ट्रओवी — चक्की पर गाए जाने वाले गीतभोर में अनाज पीसते समय
बिहार और पूर्वी उ.प्र.रोपनी और कटनी के गीत, सोहरधान की रोपाई और कटाई पर
तमिलनाडुनाट्टुपुर पाडलगलअनाज कूटते और थ्रेशिंग करते समय
क्या आप जानते हैं? इस अध्याय के आरंभ में दिया कबीर का दोहा स्वयं ओसाई पर लिखी लोक-वाणी है — सूप सार को रख लेता है और थोथा उड़ा देता है, वैसे ही सज्जन गुण रखते और दोष त्यागते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ