(a) 1000वाँ अंक 3 है, जो संख्या 370 का पहला अंक है।
1–9: 9 संख्याएँ × 1 अंक = 9 अंक (कुल 9)
10–99: 90 संख्याएँ × 2 अंक = 180 अंक (कुल 189)
शेष आवश्यक अंक = 1000 − 189 = 811
811 ÷ 3 = 270, शेषफल 1
270 तीन अंकों की संख्याएँ: 100 से 369 → 810 अंक (कुल 999)
अगला अंक, अर्थात 1000वाँ, 370 का पहला अंक 3 है
(b) 10 लाखवाँ अंक संख्या 1,85,185 में आएगा।
1–9: 9 अंक (कुल 9)
10–99: 180 अंक (कुल 189)
100–999: 2,700 अंक (कुल 2,889)
1000–9999: 36,000 अंक (कुल 38,889)
10,000–99,999: 4,50,000 अंक (कुल 4,88,889)
शेष आवश्यक अंक = 10,00,000 − 4,88,889 = 5,11,111
5,11,111 ÷ 6 = 85,185, शेषफल 1
85,185 छह अंकों की संख्याएँ: 1,00,000 से 1,85,184 → 5,11,110 अंक (कुल 9,99,999)
अगला अंक, अर्थात 10 लाखवाँ, 1,85,185 का पहला अंक है
(c) अंक ‘5’ आप 13,495 संख्या पर 5000वीं बार लिखेंगे — यह 13,495 का इकाई अंक है।
1 से 13,494 तक लिखे गए 5 की गिनती = 4,999
13,495 में एक 5 है (इकाई के स्थान पर)
4,999 + 1 = 5,000 ✓
ऐसा क्यों होता है: तीनों भागों की युक्ति एक ही है — अंकों को एक-एक करके नहीं, बल्कि खंडों में गिनिए (1 अंक की संख्याएँ, 2 अंकों की, 3 अंकों की …), फिर भाग देकर देखिए कि आप अगले खंड में कितनी दूर पहुँचे। शेषफल बताता है कि आप किस संख्या के किस अंक पर हैं।
पुस्तक की उत्तर-कुंजी पर टिप्पणी: कुंजी में भाग (c) का उत्तर 13,995 दिया है। ध्यान से गिनने पर 5,000वाँ ‘5’ वास्तव में 13,495 पर आता है; 13,995 तक पहुँचते-पहुँचते आप अंक 5 को 5,000 बार से अधिक लिख चुके होते हैं।