प्र1.
क्या किसी व्यंजक के पदों को किसी भी क्रम में जोड़ने पर समान मान प्राप्त होता है? कुछ और व्यंजक लीजिए और जाँचिए। 3 पदों से अधिक पदों वाले व्यंजकों पर भी विचार कीजिए।
उत्तर
हाँ। किसी भी क्रम और किसी भी समूहीकरण से समान मान प्राप्त होता है।
तीन पद: 9 + 4 + 6
(9 + 4) + 6 = 13 + 6 = 19
9 + (4 + 6) = 9 + 10 = 19
6 + 9 + 4 = 15 + 4 = 19
9 + (4 + 6) = 9 + 10 = 19
6 + 9 + 4 = 15 + 4 = 19
चार पद (एक ऋणात्मक): 15 + (–8) + 5 + 12
(15 + (–8)) + 5 + 12 = 7 + 5 + 12 = 24
15 + 5 + 12 + (–8) = 32 + (–8) = 24
(15 + 5) + (12 + (–8)) = 20 + 4 = 24
15 + 5 + 12 + (–8) = 32 + (–8) = 24
(15 + 5) + (12 + (–8)) = 20 + 4 = 24
पाँच पद: 20 + (–7) + (–3) + 11 + (–1) = हर क्रम में 20।
ऐसा क्यों होता है: क्रमविनिमेयता से कोई भी दो पद बदले जा सकते हैं और साहचर्यता से कोई भी दो पद एक साथ रखे जा सकते हैं। इन्हीं दो चालों को दोहराकर किसी भी क्रम को किसी भी दूसरे क्रम में बदला जा सकता है, अत: सभी क्रमों का योग समान होता है।
सुझाव: इससे जोड़ तेज़ हो जाता है। 20 + (–7) + (–3) + 11 + (–1) में पहले सभी ऋणात्मक पद जोड़िए: –7 – 3 – 1 = –11, फिर 20 + 11 – 11 = 20.