गणित प्रकाश अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या किसी व्यंजक के पदों को किसी भी क्रम में जोड़ने पर समान मान प्राप्त होता है? कुछ और व्यंजक लीजिए और जाँचिए। 3 पदों से अधिक पदों वाले व्यंजकों पर भी विचार कीजिए।
उत्तर

हाँ। किसी भी क्रम और किसी भी समूहीकरण से समान मान प्राप्त होता है।

तीन पद: 9 + 4 + 6

(9 + 4) + 6 = 13 + 6 = 19
9 + (4 + 6) = 9 + 10 = 19
6 + 9 + 4 = 15 + 4 = 19

चार पद (एक ऋणात्मक): 15 + (–8) + 5 + 12

(15 + (–8)) + 5 + 12 = 7 + 5 + 12 = 24
15 + 5 + 12 + (–8) = 32 + (–8) = 24
(15 + 5) + (12 + (–8)) = 20 + 4 = 24

पाँच पद: 20 + (–7) + (–3) + 11 + (–1) = हर क्रम में 20

ऐसा क्यों होता है: क्रमविनिमेयता से कोई भी दो पद बदले जा सकते हैं और साहचर्यता से कोई भी दो पद एक साथ रखे जा सकते हैं। इन्हीं दो चालों को दोहराकर किसी भी क्रम को किसी भी दूसरे क्रम में बदला जा सकता है, अत: सभी क्रमों का योग समान होता है।
सुझाव: इससे जोड़ तेज़ हो जाता है। 20 + (–7) + (–3) + 11 + (–1) में पहले सभी ऋणात्मक पद जोड़िए: –7 – 3 – 1 = –11, फिर 20 + 11 – 11 = 20.
प्र2.
क्या आप कक्षा 6 की गणित की पाठ्यपुस्तक में पढ़े गए पूर्णांकों के टोकन मॉडल का उपयोग करके व्याख्या कर सकते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है?
उत्तर

प्रत्येक पद को टोकनों के ढेर के रूप में लिखिए और सारे ढेर एक ही मेज़ पर रख दीजिए।

15 + (–8) + 5 + 12 के लिए मेज़ पर 15 + 5 + 12 = 32 धनात्मक टोकन और 8 ऋणात्मक टोकन हैं।

8 शून्य-युग्म कट जाते हैं
32 – 8 = 24 धनात्मक टोकन शेष रहते हैं
मान = 24
ऐसा क्यों होता है: ढेरों को मेज़ पर रखने के क्रम से यह नहीं बदलता कि मेज़ पर कितने धनात्मक और कितने ऋणात्मक टोकन हैं। मान केवल कटने के बाद बचे टोकनों से तय होता है, इसलिए हर क्रम से एक ही मान मिलेगा।
ध्यान दीजिए: हिंदी संस्करण में यह टोकन मॉडल वाला प्रश्न पृष्ठ 30 पर छपा है; अंग्रेज़ी संस्करण इसे यहाँ पृष्ठ 31 पर दोहराता है।
प्र3.
मनसा संख्याओं की एक लंबी सूची का योग ज्ञात कर रही है। उसे उन सभी को जोड़ने में पाँच मिनट लगते हैं और वह उत्तर 11749 प्राप्त करती है। फिर उसे पता चलता है कि वह चौथी संख्या 9055 को तो मिलाना भूल गई थी। क्या उसे फिर से आरंभिक संख्या से योग प्रारंभ करना होगा?
उत्तर

नहीं। उसे केवल छूटी हुई संख्या को पहले प्राप्त योगफल में जोड़ना है।

सही योगफल = 11749 + 9055
= 11749 + 9000 + 55
= 20749 + 55
= 20804
ऐसा क्यों होता है: किसी योग के पदों को किसी भी क्रम में और किसी भी समूह में जोड़ा जा सकता है (क्रमविनिमेयता और साहचर्यता गुण)। अत: 9055 को अंत में जोड़ने पर वही योगफल मिलेगा जो उसे चौथे स्थान पर रखने से मिलता।
सुझाव: दुकान में भी यही काम आता है। यदि बिल जोड़ने के बाद कोई वस्तु छूट जाए तो दुकानदार पूरा बिल दोबारा नहीं जोड़ता, केवल उस वस्तु का मूल्य कुल में जोड़ देता है।
प्र4.
मनसा बाहर खेलने जा रही है। उसकी माँ कहती हैं, “अपनी टोपी और जूते पहनो!” उसे पहले क्या पहनना चाहिए?
उत्तर

इससे कोई अंतर नहीं पड़ता — वह पहले टोपी और फिर जूते पहन सकती है, या पहले जूते और फिर टोपी। दोनों ही स्थितियों में मनसा एकदम समान दिखेगी।

टोपी, फिर जूते = जूते, फिर टोपी

किंतु यदि माँ कहें “अपने मोजे और जूते पहनो!” तो क्रम महत्वपूर्ण है। मोजे पहले पहनने होंगे, जूते बाद में।

ऐसा क्यों होता है: कुछ क्रियाओं में क्रम से अंतर नहीं पड़ता और कुछ में पड़ता है। पदों का जोड़ क्रमविनिमेय है: 6 + (–4) = (–4) + 6। घटाव नहीं: 10 – 4, 4 – 10 के समान नहीं है — यही “मोजे और जूते” वाली स्थिति है।
प्रयास करें: दैनिक जीवन की ऐसी तीन जोड़ी क्रियाएँ लिखिए जिनमें क्रम से अंतर नहीं पड़ता (बाल सँवारना / पानी पीना) और तीन ऐसी जिनमें पड़ता है (बोतल खोलना / पानी उँड़ेलना)।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ