गणित प्रकाश अध्याय 2 पता लगाइए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
रिक्त स्थानों को संख्याओं से और रिक्त बक्सों को संक्रियाओं तथा चिह्नों से इस प्रकार भरिए कि बराबर चिह्न के दोनों ओर समान व्यंजक हों। (a) 24 + (6 – 4) = 24 + 6 ☐ _____ (b) 38 + (_____ ☐ _____) = 38 + 9 – 4 (c) 24 – (6 + 4) = 24 ☐ 6 – 4 (d) 24 – 6 – 4 = 24 – 6 ☐ _____ (e) 27 – (8 + 3) = 27 ☐ 8 ☐ 3 (f) 27 – (_____ ☐ _____) = 27 – 8 + 3
उत्तर

जिस कोष्ठक के आगे धन चिह्न है, उसके अंदर के चिह्न वैसे ही रहते हैं; जिसके आगे ऋण चिह्न है, उसके अंदर के सभी चिह्न बदल जाते हैं।

(a) 24 + (6 – 4) = 24 + 6 4

(b) 38 + (9 4) = 38 + 9 – 4

(c) 24 – (6 + 4) = 24 6 – 4

(d) 24 – 6 – 4 = 24 – 6 4

(e) 27 – (8 + 3) = 27 8 3

(f) 27 – (8 3) = 27 – 8 + 3
बाईं ओरदाईं ओरदोनों बराबर
(a)24 + 224 + 6 – 426
(b)38 + 538 + 9 – 443
(c)24 – 1024 – 6 – 414
(d)24 – 6 – 424 – 6 – 414
(e)27 – 1127 – 8 – 316
(f)27 – 527 – 8 + 322
ऐसा क्यों होता है: (c) और (e) में पूरा कोष्ठक घटाया जा रहा है, अत: उसके अंदर की दोनों संख्याएँ घटानी होंगी। (f) में कोष्ठक फिर से लगाना है: 27 – 8 + 3 में 8 घटता है और 3 वापस मिलता है, इसलिए कोष्ठक में 8 – 3 आएगा।
प्र2.
कोष्ठक को हटाइए और समान मान वाला व्यंजक लिखिए। (a) 14 + (12 + 10) (b) 14 – (12 + 10) (c) 14 + (12 – 10) (d) 14 – (12 – 10) (e) –14 + (12 – 10) (f) 14 – (–12 – 10)
उत्तर
दिया गयाकोष्ठक हटाने परमान
(a)14 + (12 + 10)14 + 12 + 1036
(b)14 – (12 + 10)14 – 12 – 10–8
(c)14 + (12 – 10)14 + 12 – 1016
(d)14 – (12 – 10)14 – 12 + 1012
(e)–14 + (12 – 10)–14 + 12 – 10–12
(f)14 – (–12 – 10)14 + 12 + 1036
(b) 14 – 12 – 10 = 2 – 10 = –8
(d) 14 – 12 + 10 = 2 + 10 = 12
(f) ऋण चिह्न –12 और –10 को +12 और +10 बना देता है → 14 + 12 + 10 = 36
ऐसा क्यों होता है: ‘+’ के बाद वाला कोष्ठक कुछ नहीं बदलता। ‘–’ के बाद वाला कोष्ठक अंदर के प्रत्येक पद का चिह्न बदल देता है। इसलिए (f) में (–12 – 10) अर्थात –22 को घटाना, 22 जोड़ने के समान है।
क्या आप जानते हैं? (a) और (f) दोनों का मान 36 है, यद्यपि (f) में इतने ऋण चिह्न दिखाई देते हैं।
प्र3.
नीचे दिए गए व्यंजकों के मान ज्ञात कीजिए। प्रत्येक युग्म के लिए, पहले यह अनुमान लगाने का प्रयत्न कीजिए कि क्या उनके मान समान हैं। दोनों व्यंजक कब समान हैं? (a) (6 + 10) – 2 और 6 + (10 – 2) (b) 16 – (8 – 3) और (16 – 8) – 3 (c) 27 – (18 + 4) और 27 + (–18 – 4)
उत्तर
(a) (6 + 10) – 2 = 16 – 2 = 14
     6 + (10 – 2) = 6 + 8 = 14   → समान
     दोनों 6 + 10 + (–2) हैं।

(b) 16 – (8 – 3) = 16 – 5 = 11
     (16 – 8) – 3 = 8 – 3 = 5   → समान नहीं
     पहला 16 – 8 + 3 है, दूसरा 16 – 8 – 3।

(c) 27 – (18 + 4) = 27 – 22 = 5
     27 + (–18 – 4) = 27 – 22 = 5   → समान
     दोनों 27 + (–18) + (–4) हैं।

दोनों व्यंजक कब समान हैं? तब, जब कोष्ठक हटाने के बाद दोनों व्यंजकों में वही पद उन्हीं चिह्नों के साथ बचें।

ऐसा क्यों होता है: (b) में कोष्ठक के आगे ऋण चिह्न है, अत: 16 – (8 – 3) बनता है 16 – 8 + 3, जबकि (16 – 8) – 3 रहता है 16 – 8 3। 3 का चिह्न भिन्न है, इसीलिए मानों में 6 का अंतर है।
प्र4.
दिए गए व्यंजकों के प्रत्येक समूह में उन व्यंजकों को पहचानिए जिनके मान समान हैं। आपको इनके मान ज्ञात नहीं करने हैं, किंतु इसके स्थान पर अपने पदों की समझ का उपयोग कीजिए। (a) 319 + 537, 319 – 537, –537 + 319, 537 – 319 (b) 87 + 46 – 109, 87 + 46 – 109, 87 + 46 – 109, 87 – 46 + 109, 87 – (46 + 109), (87 – 46) + 109
उत्तर

(a) प्रत्येक को पदों के योग के रूप में लिखिए —

व्यंजकपद
319 + 537319, 537
319 – 537319, –537
–537 + 319–537, 319
537 – 319537, –319

319 – 537 और –537 + 319 के मान समान हैं — वही दो पद, केवल क्रम बदला है।

(b) यहाँ भी पदों की तुलना कीजिए —

व्यंजकपदसमूह
87 + 46 – 109 (तीन बार)87, 46, –109समूह 1
87 – 46 + 10987, –46, 109समूह 2
87 – (46 + 109)87, –46, –109अलग
(87 – 46) + 10987, –46, 109समूह 2

अत: 87 + 46 – 109 की तीनों प्रतियाँ आपस में समान हैं और 87 – 46 + 109 = (87 – 46) + 109। शेष 87 – (46 + 109) अकेला है।

ऐसा क्यों होता है: केवल योग से बने दो व्यंजक तब समान होते हैं जब उनमें वही पद वही चिह्नों के साथ हों, क्रम चाहे कुछ भी हो। 87 – (46 + 109) में कोष्ठक हटाने पर 109 का चिह्न बदलकर –109 हो जाता है, इसीलिए वह अलग पड़ जाता है।
स्वयं जाँचिए: समूह 1 = 24, समूह 2 = 150, तथा 87 – (46 + 109) = –68.
प्र5.
व्यंजकों में उचित स्थानों पर कोष्ठकों का उपयोग कीजिए जिससे दर्शाए गए मान प्राप्त हों। (a) 34 – 9 + 12 = 13 (b) 56 – 14 – 8 = 34 (c) –22 – 12 + 10 + 22 = –22
उत्तर
(a) 34 – (9 + 12) = 34 – 21 = 13
     (कोष्ठक के बिना 34 – 9 + 12 का मान 37 होता)

(b) (56 – 14) – 8 = 42 – 8 = 34

(c) –22 – (12 + 10) + 22 = –22 – 22 + 22 = –22
ऐसा क्यों होता है: (a) में कोष्ठक लगाने से 12 जुड़ने के स्थान पर घट जाता है, अर्थात 24 का अंतर (37 → 13)। (c) में ऋण चिह्न के बाद का कोष्ठक +10 को –10 बना देता है, जिससे बीच का भाग –22 हो जाता है और अंतिम +22 उसे काट देता है।
सुझाव: (b) में बिना कोष्ठक के भी मान 34 ही है। कोष्ठक केवल क्रम को स्पष्ट करता है — यह भी मान्य है।
प्र6.
पद के मान बदलने के तर्कों का उपयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए जिससे बराबर (=) चिह्न के दोनों ओर के व्यंजक समान हों। (a) 423 + ______ = 419 + ______ (b) 207 – 68 = 210 – ______
उत्तर
(a) 423 + 419 = 419 + 423
     (क्रमविनिमेयता गुण — वही दो पद, केवल क्रम बदला)

     एक अन्य उत्तर: 423 + 6 = 419 + 10
     (419, 423 से 4 कम है, अत: दूसरा पद 4 अधिक होना चाहिए)

(b) 207 – 68 = 210 – 71
     210, 207 से 3 अधिक है, अत: 3 अधिक घटाना होगा: 68 + 3 = 71
     जाँच: 207 – 68 = 139 तथा 210 – 71 = 139
ऐसा क्यों होता है: यदि पहला पद 3 बढ़ता है तो घटाई जाने वाली राशि भी 3 बढ़नी चाहिए, तभी मान वही रहेगा। एक ओर किया गया कोई भी परिवर्तन दूसरी ओर संतुलित करना पड़ता है।
प्र7.
आवश्यकता के अनुसार संख्याओं 2, 3 और 5 का उपयोग करते हुए और संक्रियाओं ‘+’ और ‘–’ व कोष्ठकों का उपयोग करते हुए जितने विभिन्न मान संभव हों उतने मानों वाले व्यंजक बनाइए। उदाहरण के लिए, 2 – 3 + 5 = 4 और 3 – (5 – 2) = 0
उत्तर

2, 3 और 5 को एक-एक बार लीजिए। जितने भी भिन्न मान बन सकते हैं, वे ये हैं —

मानव्यंजक
102 + 3 + 5;  5 + 3 + 2
63 – 2 + 5;  5 – 2 + 3;  5 + 3 – 2
42 – 3 + 5;  5 + 2 – 3;  5 – (3 – 2)
02 + 3 – 5;  3 – (5 – 2);  5 – 3 – 2;  5 – (3 + 2)
–43 – 2 – 5;  3 – (2 + 5)
–62 – 3 – 5;  2 – (3 + 5)

इस प्रकार छह भिन्न मान: –6, –4, 0, 4, 6 और 10 प्राप्त होते हैं।

ऐसा क्यों होता है: केवल + और – से मान वही बनता है जो 2, 3 और 5 को धन या ऋण चिह्न के साथ लेने से मिलता है। सबसे पहले लिखी संख्या सदैव जुड़ती है, इसलिए छह ही चिह्न-प्रतिरूप बनते हैं और छह ही मान मिलते हैं। कोष्ठक नए मान नहीं देते — वे केवल इन्हीं छह मानों को लिखने के नए तरीके देते हैं।
प्रयास करें: यही काम 1, 4 और 6 के साथ कीजिए और देखिए कितने भिन्न मान मिलते हैं।
प्र8.
यशोदा को जब कभी भी किसी संख्या में से 9 घटाना होता है तो वह 10 घटाती है और इसमें 1 जोड़ देती है। उदाहरण के लिए, 36 – 9 = 26 + 1 (a) क्या आप सोचते हैं कि उसे हमेशा सही उत्तर प्राप्त होता है? क्यों? (b) क्या आप ऐसी ही अन्य युक्तियों के विषय में सोच सकते हैं? कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर

(a) हाँ, उसे सदैव सही उत्तर मिलता है।

9 = 10 – 1
अत: कोई संख्या – 9 = संख्या – (10 – 1)
= संख्या – 10 + 1   (ऋण चिह्न वाला कोष्ठक चिह्न बदल देता है)

36 – 9 = 36 – 10 + 1 = 26 + 1 = 27
84 – 9 = 84 – 10 + 1 = 74 + 1 = 75
123 – 9 = 123 – 10 + 1 = 113 + 1 = 114

(b) इसी प्रकार की अन्य युक्तियाँ —

करना हैइसके स्थान पर कीजिएउदाहरण
8 घटाना10 घटाइए, 2 जोड़िए55 – 8 = 55 – 10 + 2 = 47
99 घटाना100 घटाइए, 1 जोड़िए432 – 99 = 432 – 100 + 1 = 333
19 घटाना20 घटाइए, 1 जोड़िए76 – 19 = 76 – 20 + 1 = 57
9 जोड़ना10 जोड़िए, 1 घटाइए48 + 9 = 48 + 10 – 1 = 57
9 से गुणा10 से गुणा कीजिए, फिर वही संख्या घटाइए23 × 9 = 230 – 23 = 207
ऐसा क्यों होता है: 10 और 100 जैसी गोल संख्याएँ घटाना बहुत आसान है। कठिन संख्या को गोल संख्या ऋण थोड़ा-सा सुधार के रूप में लिखने से एक कठिन कदम दो आसान कदमों में बदल जाता है।
प्र9.
इन दो व्यंजकों पर विचार कीजिए — (a) 73 – 14 + 1, (b) 73 – 14 – 1। प्रत्येक व्यंजक के लिए नीचे दिए गए समूह में से व्यंजकों को पहचानिए जो इनके समान हों। (a) 73 – (14 + 1) (b) 73 – (14 – 1) (c) 73 + (–14 + 1) (d) 73 + (–14 – 1)
उत्तर

पहले सभी कोष्ठक हटाइए, फिर पदों की तुलना कीजिए।

व्यंजककोष्ठक हटाने परपदमान
(a) 73 – (14 + 1)73 – 14 – 173, –14, –158
(b) 73 – (14 – 1)73 – 14 + 173, –14, 160
(c) 73 + (–14 + 1)73 – 14 + 173, –14, 160
(d) 73 + (–14 – 1)73 – 14 – 173, –14, –158
73 – 14 + 1 = 60 के समान हैं (b) और (c)
73 – 14 – 1 = 58 के समान हैं (a) और (d)
ऐसा क्यों होता है: सारा अंतर 1 के चिह्न का है। ऋण चिह्न के बाद का कोष्ठक उसे बदल देता है — इसीलिए 73 – (14 – 1) में अंदर +1 है। धन चिह्न के बाद का कोष्ठक उसे वैसा ही रहने देता है।
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