गणित प्रकाश अध्याय 2 पता लगाइए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आगे दी गई स्थितियों को पढ़िए। उनमें से प्रत्येक के लिए उचित व्यंजक लिखिए और उनके मान ज्ञात कीजिए। (a) बेगुर में जिला बाजार सप्ताह के सातों दिन खुलता है। रहीम अपने बगीचे से प्रत्येक दिन 9 किलोग्राम आम और श्याम अपने बगीचे से प्रत्येक दिन 11 किलोग्राम आम इस बाजार में भेजता है। स्थानीय जिला बाजार में उनके द्वारा एक सप्ताह में भेजे गए आमों की मात्रा ज्ञात कीजिए। (b) बीनू प्रत्येक माह ₹20,000 अर्जित करती है। वह प्रत्येक माह ₹5000 किराए पर, ₹5000 भोजन पर और ₹2000 अन्य वस्तुओं पर खर्च करती है। एक वर्ष के अंत में बीनू कितने रुपयों की बचत करेगी? (c) एक घोंघा दिन के समय एक खंभे पर 3 से.मी. चढ़ता है और रात के समय सोते हुए गलती से 2 से.मी. फिसल जाता है। यह खंभा 10 से.मी. ऊँचा है और इसके ऊपरी भाग पर एक स्वादिष्ट भोजन है। घोंघे को कितने दिनों में भोजन मिलेगा?
उत्तर

(a) बेगुर के बाजार में आम

दोनों मिलकर प्रतिदिन (9 + 11) कि.ग्रा. भेजते हैं, 7 दिनों तक:
व्यंजक = 7 × (9 + 11)
= 7 × 20 = 140 कि.ग्रा.

दूसरे तरीके से: 7 × 9 + 7 × 11 = 63 + 77 = 140 कि.ग्रा.

(b) बीनू की वार्षिक बचत

व्यंजक = 12 × 20000 – 12 × (5000 + 5000 + 2000)
= 240000 – 12 × 12000
= 240000 – 144000
= ₹96,000

छोटा रास्ता: मासिक बचत = 20000 – 12000 = ₹8000
वार्षिक बचत = 12 × 8000 = ₹96,000

(c) 10 से.मी. के खंभे पर घोंघा

एक पूरे दिन-रात में घोंघा 3 – 2 = 1 से.मी. चढ़ता है।
ऐसे 7 चक्रों के बाद: 7 × (3 – 2) = 7 से.मी.
8वें दिन वह 3 से.मी. और चढ़ता है: 7 + 3 = 10 से.मी. — शिखर पर!

व्यंजक = 7 × (3 – 2) + 3 = 7 + 3 = 10
उत्तर: 8 दिन
ऐसा क्यों होता है: घोंघे को 10 दिन नहीं लगते। जैसे ही वह दिन में शिखर पर पहुँचता है, वह भोजन पा लेता है और फिर फिसलता ही नहीं। इसलिए हम केवल तब तक पूरे चक्र गिनते हैं जब तक वह शिखर से 3 से.मी. नीचे न आ जाए — 7 दिनों में 7 से.मी. — और अंतिम चढ़ाई 8वें दिन काम पूरा कर देती है।
स्वयं जाँचिए: दिनों के अंत में ऊँचाई 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 से.मी. रहती है। 8वें दिन रात होने से पहले ही वह 7 + 3 = 10 से.मी. पर है।
प्र2.
मेल्विन मंगलवार और शनिवार के अतिरिक्त प्रत्येक दिन दो पृष्ठों की एक कहानी पढ़ता है। वह 8 सप्ताहों में कितनी कहानियाँ पूरी पढ़ लेगा? निम्नलिखित में से कौन-सा व्यंजक इस स्थिति को दर्शाता है? (a) 5 × 2 × 8 (b) (7 – 2) × 8 (c) 8 × 7 (d) 7 × 2 × 8 (e) 7 × 5 – 2 (f) (7 + 2) × 8 (g) 7 × 8 – 2 × 8 (h) (7 – 5) × 8
उत्तर

मेल्विन सप्ताह में 7 – 2 = 5 दिन पढ़ता है, और हर उस दिन एक कहानी।

8 सप्ताहों में कहानियाँ = (7 – 2) × 8 = 5 × 8 = 40 कहानियाँ

इस स्थिति को दर्शाने वाले व्यंजक हैं (b) और (g)।

व्यंजकमानसही?
(a) 5 × 2 × 880नहीं — यह पृष्ठों की संख्या है, कहानियों की नहीं
(b) (7 – 2) × 840हाँ — 5 पढ़ने के दिन × 8 सप्ताह
(c) 8 × 756नहीं — 8 सप्ताहों के सभी 56 दिन
(d) 7 × 2 × 8112नहीं
(e) 7 × 5 – 233नहीं
(f) (7 + 2) × 872नहीं
(g) 7 × 8 – 2 × 840हाँ — सभी 56 दिन में से छोड़े गए 16 दिन घटाइए
(h) (7 – 5) × 816नहीं — यह छोड़े गए दिनों की संख्या है
ऐसा क्यों होता है: (b) और (g) वितरण गुण के दो पक्ष हैं: (7 – 2) × 8 = 7 × 8 – 2 × 8। एक पहले पढ़ने के दिन गिनता है, दूसरा सब दिन गिनकर मंगलवार और शनिवार घटा देता है। दोनों से 40 ही मिलता है।
प्र3.
नीचे दिए गए व्यंजकों के मान ज्ञात करने की विभिन्न विधियाँ ज्ञात कीजिए — (a) 1 – 2 + 3 – 4 + 5 – 6 + 7 – 8 + 9 – 10 (b) 1 – 1 + 1 – 1 + 1 – 1 + 1 – 1 + 1 – 1
उत्तर

(a) 1 – 2 + 3 – 4 + 5 – 6 + 7 – 8 + 9 – 10

विधि 1 — युग्म बनाइए:
(1 – 2) + (3 – 4) + (5 – 6) + (7 – 8) + (9 – 10)
= (–1) + (–1) + (–1) + (–1) + (–1) = –5

विधि 2 — धनात्मक और ऋणात्मक अलग कीजिए:
(1 + 3 + 5 + 7 + 9) + (–2 – 4 – 6 – 8 – 10)
= 25 + (–30) = –5

विधि 3 — बाएँ से दाएँ:
1 – 2 = –1; –1 + 3 = 2; 2 – 4 = –2; –2 + 5 = 3; 3 – 6 = –3;
–3 + 7 = 4; 4 – 8 = –4; –4 + 9 = 5; 5 – 10 = –5

(b) 1 – 1 + 1 – 1 + 1 – 1 + 1 – 1 + 1 – 1

विधि 1 — युग्म बनाइए:
(1 – 1) + (1 – 1) + (1 – 1) + (1 – 1) + (1 – 1) = 0 + 0 + 0 + 0 + 0 = 0

विधि 2 — चिह्न के अनुसार:
(1 + 1 + 1 + 1 + 1) + (–1 –1 –1 –1 –1) = 5 + (–5) = 0

विधि 3 — पद गिनिए: +1 के पाँच पद और –1 के पाँच पद पूरी तरह कट जाते हैं → 0
ऐसा क्यों होता है: हर घटाव को ऋणात्मक पद जोड़ने के रूप में लिख देने पर पदों को किसी भी क्रम और समूह में जोड़ा जा सकता है। यहाँ युग्म बनाना सबसे तेज़ है क्योंकि हर युग्म का मान सरल है।
सुझाव: सावधान रहिए — 1 – 1 + 1 – 1 + … वही नहीं है जो 1 – (1 + 1 – 1 + …) है। आप जो कोष्ठक लगाएँ, वे चिह्न न बदलें।
प्र4.
नीचे दिए गए व्यंजकों के युग्मों की तुलना ‘<’, ‘>’ या ‘=’ से या फिर तर्क के उपयोग द्वारा कीजिए। (a) 49 – 7 + 8 ☐ 49 – 7 + 8 (b) 83 × 42 – 18 ☐ 83 × 40 – 18 (c) 145 – 17 × 8 ☐ 145 – 17 × 6 (d) 23 × 48 – 35 ☐ 23 × (48 – 35) (e) (16 – 11) × 12 ☐ –11 × 12 + 16 × 12 (f) (76 – 53) × 88 ☐ 88 × (53 – 76) (g) 25 × (42 + 16) ☐ 25 × (43 + 15) (h) 36 × (28 – 16) ☐ 35 × (27 – 15)
उत्तर
(a) 49 – 7 + 8 = 49 – 7 + 8  — दोनों व्यंजक एक ही हैं।

(b) 83 × 42 – 18 > 83 × 40 – 18  — 83 × 42, 83 × 40 से 83 × 2 = 166 अधिक है और दोनों में 18 घटता है।

(c) 145 – 17 × 8 < 145 – 17 × 6  — बाईं ओर अधिक घटाया जाता है (136 बनाम 102)।

(d) 23 × 48 – 35 > 23 × (48 – 35)  — दाईं ओर = 23 × 48 – 23 × 35, जो 35 से कहीं अधिक घटाता है।

(e) (16 – 11) × 12 = –11 × 12 + 16 × 12  — वितरण गुण, केवल पदों का क्रम बदला है।

(f) (76 – 53) × 88 > 88 × (53 – 76)  — पहला कोष्ठक +23 है, दूसरा –23।

(g) 25 × (42 + 16) = 25 × (43 + 15)  — दोनों कोष्ठकों का मान 58 है।

(h) 36 × (28 – 16) > 35 × (27 – 15)  — दोनों कोष्ठकों का मान 12 है, और 36 > 35।
बाईं ओरचिह्नदाईं ओर
(a)50=50
(b)3468>3302
(c)9<43
(d)1069>299
(e)60=60
(f)2024>–2024
(g)1450=1450
(h)432>420
ऐसा क्यों होता है: हर भाग में केवल यह देखना पर्याप्त है कि दोनों ओर में क्या अंतर है। (g) में दोनों कोष्ठकों का योग समान है (42 + 16 = 43 + 15 = 58), अत: गुणनफल भी समान होंगे — एक संख्या ने ठीक उतना ही पाया जितना दूसरी ने खोया।
प्र5.
गणना किए बिना पहचानिए कि दिए गए व्यंजक के बराबर कौन-सा व्यंजक है। आप पदों का उपयोग करके और कोष्ठकों को हटाकर व्यंजकों को पुन: लिख सकते हैं। दिए गए व्यंजक के बराबर एक से अधिक व्यंजक हो सकते हैं। (a) 83 – 37 – 12 : (i) 84 – 38 – 12 (ii) 84 – (37 + 12) (iii) 83 – 38 – 13 (iv) –37 + 83 – 12. (b) 93 + 37 × 44 + 76 : (i) 37 + 93 × 44 + 76 (ii) 93 + 37 × 76 + 44 (iii) (93 + 37) × (44 + 76) (iv) 37 × 44 + 93 + 76
उत्तर

(a) 83 – 37 – 12 के पद हैं 83, –37, –12।

विकल्पपदबराबर?
(i) 84 – 38 – 1284, –38, –12 — दोनों पहली संख्याएँ 1-1 बढ़ीं, अत: 84 – 38 = 83 – 37हाँ
(ii) 84 – (37 + 12)84, –37, –12 — दिए गए से 1 अधिकनहीं
(iii) 83 – 38 – 1383, –38, –13 — 2 अधिक घटता हैनहीं
(iv) –37 + 83 – 12–37, 83, –12 — वही पद, क्रम बदलाहाँ

अत: (i) और (iv), 83 – 37 – 12 के बराबर हैं (तीनों का मान 34; (ii) का 35 और (iii) का 32)।

(b) 93 + 37 × 44 + 76 के पद हैं 93, 37 × 44, 76।

विकल्पपदबराबर?
(i) 37 + 93 × 44 + 7637, 93 × 44, 76 — गुणनफल भिन्न हैनहीं
(ii) 93 + 37 × 76 + 4493, 37 × 76, 44 — गुणनफल भिन्न हैनहीं
(iii) (93 + 37) × (44 + 76)एक ही गुणनफल 130 × 120नहीं
(iv) 37 × 44 + 93 + 7637 × 44, 93, 76 — वही पद, क्रम बदलाहाँ

अत: केवल (iv), 93 + 37 × 44 + 76 के बराबर है (दोनों का मान 1797)।

ऐसा क्यों होता है: दो व्यंजक तब बराबर होते हैं जब उनके पद एक जैसे हों, क्रम चाहे कोई भी हो। (b) में 93 और 37 की अदला-बदली से गुणनफल के अंदर की संख्याएँ ही बदल जाती हैं, अर्थात पद बदल जाता है — इसीलिए (i) गलत है।
प्र6.
एक संख्या चुनिए और उस मान वाले दस भिन्न व्यंजक बनाइए।
उत्तर

मान लीजिए हमने 36 चुनी।

क्र.व्यंजकमान
130 + 636
240 – 436
36 × 636
472 ÷ 236
54 × 936
650 – 1436
7108 ÷ 336
812 × 336
92 × (15 + 3)36
105 × 8 – 436
ऐसा क्यों होता है: किसी मान को अनगिनत तरीकों से बनाया जा सकता है — योग, अंतर, गुणनफल, भागफल या कोष्ठकों के साथ मिश्रण के रूप में। ये दसों व्यंजक ‘=’ से इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि इनका मान समान है, रूप नहीं।
प्रयास करें: यही अपनी आयु के लिए कीजिए, और ध्यान रखिए कि दस में से कम से कम तीन व्यंजकों में कोष्ठक हों।
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