गणित प्रकाश अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या हम एक इकाई को 4 समान भागों में, 5 समान भागों में, 8 समान भागों में अथवा किन्हीं अन्य समान भागों में विभक्त नहीं कर सकते?
उत्तर

हाँ, कर सकते हैं। गणित में इसे रोकने वाली कोई बात नहीं है।

इकाई को 4 में बाँटिए → प्रत्येक भाग 14 (चतुर्थांश)
प्रत्येक चतुर्थांश को पुन: 4 में बाँटिए → प्रत्येक भाग 116
ऐसे 16 भागों से 1 इकाई बनती है
ऐसा क्यों होता है: एक ही लंबाई किसी भी आकार के भागों से बताई जा सकती है। बढ़ई का इंच वाला फीता आधे, चौथाई, आठवें और सोलहवें भागों में बँटा होता है और वह ठीक-ठाक माप देता है। बदलता केवल माप का नाम है।
क्या आप जानते हैं? पुराना भारतीय रुपया कभी 16 आनों में और एक आना 4 पैसों में बँटा होता था — अर्थात 16 और 4 वाली पद्धति, 10 वाली नहीं।
प्र2.
तो एक इकाई को सदैव 10 भागों में ही क्यों विभक्त करें?
उत्तर

क्योंकि हमारी संख्या-लेखन पद्धति पहले से ही 10 पर आधारित है।

10 इकाई = 1 दहाई
10 दहाई = 1 सैकड़ा
10 सैकड़े = 1 हजार
प्रत्येक स्थान अपने दाईं ओर के स्थान का 10 गुना है
ऐसा क्यों होता है: यदि इकाई को 10 में बाँटा जाए तो नए भाग इकाई के दाईं ओर उसी क्रम को आगे बढ़ाते हैं — 10 दशांश से 1 इकाई, 10 शतांश से 1 दशांश। इससे वही अंक, वही हासिल लेने-देने के नियम और वही तुलना के नियम काम करते रहते हैं। यदि हम 4 या 16 भागों में बाँटें तो संकेतों और नियमों का पूरा नया समूह बनाना पड़ेगा। भारतीय स्थानीय मान पद्धति में, जैसे 284 में, 2 का स्थानीय मान सैकड़ा, 8 का दहाई और 4 का इकाई है — यही क्रम दशांश और शतांश तक बढ़ता है।
संकेत: इसी कारण इस पद्धति को दशमलव पद्धति कहते हैं — लैटिन शब्द डेसेम अर्थात दस से, जो संस्कृत के दश का सजातीय है।
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