गणित प्रकाश अध्याय 4 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरण 5 — प्रत्येक पेंसिल की कीमत c है एवं प्रत्येक रबर की कीमत d है। पहले दिन पेंसिल बेचकर अर्जित किए गए रुपये 5c हैं। इसी प्रकार दूसरे दिन पेंसिल बेचकर अर्जित किए गए रुपये _____ हैं एवं तीसरे दिन _______ हैं।
उत्तर

उस दिन बिकी पेंसिलों की संख्या को प्रति पेंसिल कीमत से गुणा कीजिए।

दूसरा दिन: 3 पेंसिल → 3c
तीसरा दिन: 10 पेंसिल → 10c
पहला दिनदूसरा दिनतीसरा दिन
पेंसिल (मूल्य c)5310
पेंसिल से अर्जित रुपये5c3c10c
प्र2.
यदि c = ₹50 हो तो पेंसिल की बिक्री से अर्जित की गई कुल राशि ज्ञात कीजिए।
उत्तर

पेंसिल से कुल राशि 5c + 3c + 10c है, जो सरल होकर 18c बन जाती है।

5c + 3c + 10c = (5 + 3 + 10) × c = 18c
18c = 18 × ₹50
= ₹900
ऐसा क्यों होता है: c के 5 गुने, 3 गुने एवं 10 गुने को जोड़ने पर c के 18 गुने मिलते हैं। यही वितरण गुण है।
प्र3.
रबर की बिक्री से अर्जित किए गए कुल रुपयों के लिए व्यंजक लिखिए फिर व्यंजक को हल कीजिए।
उत्तर

रबर बिके — पहले दिन 4, दूसरे दिन 6 एवं तीसरे दिन 1, प्रत्येक की कीमत d

रबर से कुल राशि = 4d + 6d + 1d
= (4 + 6 + 1) × d
= 11d
संकेत: 1d को केवल d लिखा जाता है। अतः तीन दिनों की कुल कमाई 18c + 11d है।
प्र4.
क्या व्यंजक 18c + 11d को आगे हल किया जा सकता है?
उत्तर

नहीं। यह पहले से ही अपने सरलतम रूप में है।

ऐसा क्यों होता है: 18c एवं 11d में भिन्न अक्षर-संख्याएँ हैं — ये विजातीय पद हैं। c पेंसिल का मूल्य है और d रबर का; ‘प्रति पेंसिल रुपये’ एवं ‘प्रति रबर रुपये’ को एक ही पद में नहीं मिलाया जा सकता।
क्या आप जानते हैं? (5c, 3c, 10c) जैसे समूह सजातीय पद कहलाते हैं और सदैव एक पद में मिलाए जा सकते हैं। {18c, 11d} जैसे समूह विजातीय पद हैं और नहीं मिलाए जा सकते।
प्र5.
जाँचिए कि यदि c को विभिन्न संख्याओं से प्रतिस्थापित किया जाए तो क्या दोनों व्यंजकों (5c + 3c + 10c एवं 18c) के मान समान प्राप्त होंगे?
उत्तर

c के तीन भिन्न मान लेकर देखिए।

c5c + 3c + 10c18c
210 + 6 + 20 = 3636
525 + 15 + 50 = 9090
50250 + 150 + 500 = 900900
ऐसा क्यों होता है: सरलीकरण में केवल वही नियम लगते हैं जो संख्याओं पर लागू होते हैं। अतः दोनों रूपों के मान c के हर मान के लिए समान होंगे — ‘समान व्यंजक’ का यही अर्थ है।
प्र6.
पूर्व की तरह एक बड़े आयत को नीचे दर्शाए अनुसार दो छोटे आयतों में बाँटा गया है। आयत AEFD का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए व्यंजक लिखिए। (ABCD की लंबाई 12 एवं चौड़ाई n; FC = 4)
उत्तर

AEFD वह भाग है जो ABCD में से पट्टी EBCF हटाने पर बचता है।

विधि 1 — अपनी ही भुजाओं से:
AE = 12 – 4 = 8, AD = n
AEFD का क्षेत्रफल = 8 × n = 8n

विधि 2 — घटाकर:
ABCD का क्षेत्रफल = 12n, EBCF का क्षेत्रफल = 4n
AEFD का क्षेत्रफल = 12n – 4n = 8n
A E B D F C n 12 4
12 एवं n भुजाओं वाला आयत ABCD, EF पर विभाजित। छायांकित पट्टी EBCF का क्षेत्रफल 4n है।
ऐसा क्यों होता है: दोनों विधियों का उत्तर एक ही आना चाहिए, और आता भी है — 12n – 4n = (12 – 4)n = 8n। यह वितरण गुण का क्षेत्रफल-रूप है।
प्र7.
उदाहरण 7 — एक दुकान कुर्सी (₹40) एवं मेज (₹75) किराए पर देती है; लौटाने पर कुर्सी के ₹6 एवं मेज के ₹10 वापस करती है। x कुर्सियों एवं y मेजों के लिए इन राशियों को प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर

प्रारंभ में भुगतान की गई राशि: हर दर को उसकी संख्या से गुणा करके जोड़िए।

कुर्सियाँ: x × ₹40 = 40x
मेज: y × ₹75 = 75y
प्रारंभ में भुगतान = 40x + 75y

वापस मिलने वाली राशि: वही विधि, वापसी दरों के साथ।

कुर्सियाँ: x × ₹6 = 6x
मेज: y × ₹10 = 10y
वापस मिली राशि = 6x + 10y
अतः वास्तव में भुगतान की गई कुल राशि = (40x + 75y) – (6x + 10y)
प्र8.
क्या हम इस व्यंजक को हल कर सकते हैं? यदि हाँ, तो कैसे? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? [(40x + 75y) – (6x + 10y)]
उत्तर

हाँ। कोष्ठक खोलिए, फिर सजातीय पदों को एक साथ रखिए।

(40x + 75y) – (6x + 10y)
= 40x + 75y – 6x – 10y
= 40x + (–6x) + 75y + (–10y) (अदला-बदली एवं समूहीकरण)
= (40 – 6)x + (75 – 10)y
= 34x + 65y
ऐसा क्यों होता है: कोष्ठक के बाहर का ऋण चिह्न अंदर के दोनों पदों का चिह्न बदल देता है। उसके बाद 40x एवं –6x सजातीय पद हैं, तथा 75y एवं –10y भी।
स्वयं जाँचिए: x = 2 कुर्सियाँ एवं y = 1 मेज पर — ₹155 दिए, ₹22 वापस मिले, अतः ₹133 लगे। और 34 × 2 + 65 × 1 = 68 + 65 = ₹133 ✔
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