गणित प्रकाश अध्याय 4 पता लगाइए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक प्लेट ज्वार की रोटी का मूल्य ₹30 है एवं एक प्लेट पुलाव का मूल्य ₹20 है। यदि एक दिन में ज्वार की रोटी x प्लेट एवं पुलाव की y प्लेट का ऑर्डर दिया गया तो उस दिन अर्जित कुल राशि को रुपयों में वर्णित करने के लिए कौन-सा व्यंजक होगा? (a) 30x + 20y (b) (30 + 20) × (x + y) (c) 20x + 30y (d) (30 + 20) × x + y (e) 30x – 20y
उत्तर

सही व्यंजक (a) 30x + 20y है।

ज्वार की रोटी से राशि = 30 × x = 30x
पुलाव से राशि = 20 × y = 20y
कुल = 30x + 20y
ऐसा क्यों होता है: (b) तभी सही होता जब हर ग्राहक दोनों में से एक-एक प्लेट लेता। (c) में दोनों दरें आपस में बदल गई हैं। (d) में केवल x को 50 से गुणा किया गया है। (e) पुलाव की राशि जोड़ने के स्थान पर घटा रहा है।
स्वयं जाँचिए: x = 3 एवं y = 2 पर वास्तविक कमाई ₹90 + ₹40 = ₹130 है, और 30 × 3 + 20 × 2 = 130 ✔
प्र2.
पुष्पिता स्वतंत्रता दिवस पर चंपा एवं गेंदे के दो तरह के फूल बेचती है। ‘p’ ग्राहक केवल चंपा खरीदते हैं, ‘q’ ग्राहक केवल गेंदा खरीदते हैं एवं ‘r’ ग्राहक दोनों खरीदते हैं। उसी दिन वह प्रत्येक ग्राहक को एक छोटा राष्ट्रीय झंडा देती है। उस दिन वह कितने झंडे देती है? (a) p + q + r (b) p + q + 2r (c) 2 × (p + q + r) (d) p + q + r + 2 (e) p + q + r + 1 (f) 2 × (p + q)
उत्तर

सही व्यंजक (a) p + q + r है।

कुल ग्राहक = p + q + r
प्रत्येक ग्राहक को एक झंडा
दिए गए झंडे = p + q + r
ऐसा क्यों होता है: झंडा ग्राहक को दिया जाता है, फूल को नहीं। जिसने दोनों प्रकार के फूल खरीदे वह भी एक ही व्यक्ति है और उसे एक ही झंडा मिलेगा — इसीलिए (b) एवं (c) गलत हैं।
प्र3.
एक घोंघा एक गहरे कुएँ की दीवार पर चढ़ने का प्रयत्न कर रहा है। दिन के समय यह ‘u’ से.मी. चढ़ता है एवं रात के समय वह धीरे से ‘d’ से.मी. नीचे फिसल जाता है। 10 दिनों एवं 10 रातों तक ऐसा होता है। (a) घोंघा अपनी प्रारंभिक स्थिति से कितना दूर है, यह बताने के लिए एक व्यंजक लिखिए। (b) यदि d > u तो हम घोंघे की गति के बारे में क्या कह सकते हैं?
उत्तर

(a) एक पूरे दिन-रात में घोंघा (u – d) से.मी. आगे बढ़ता है। यह 10 बार दोहराया जाता है।

प्रारंभिक स्थिति से दूरी = 10 × (u – d)
= 10(u – d) से.मी. = 10u – 10d से.मी.

(b) यदि d > u हो तो u – d ऋणात्मक होगा।

10(u – d) ऋणात्मक → घोंघा अपनी प्रारंभिक स्थिति से नीचे पहुँच जाएगा

वह दिन में जितना चढ़ता है, रात में उससे अधिक फिसल जाता है, अतः वह लगातार पीछे जाता रहेगा और कभी ऊपर नहीं पहुँच पाएगा।

स्वयं जाँचिए: u = 8 से.मी. एवं d = 3 से.मी. पर घोंघा 10 × 5 = 50 से.मी. ऊपर है। u = 3 से.मी. एवं d = 8 से.मी. पर वह 10 × (–5) = –50 से.मी., अर्थात प्रारंभ से 50 से.मी. नीचे है।
प्र4.
राधा साइकिल दौड़ की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयारी कर रही है एवं प्रतिदिन अभ्यास करती है। पहले सप्ताह में वह प्रतिदिन 5 कि.मी. साइकिल चलाती है। प्रत्येक सप्ताह वह प्रतिदिन साइकिल चलाने की दूरी को ‘z’ कि.मी. बढ़ाती है। 3 सप्ताह के बाद राधा कितने कि.मी. साइकिल चला चुकी होगी?
उत्तर

प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग ज्ञात कीजिए — एक सप्ताह में 7 दिन होते हैं।

सप्ताहप्रतिदिन दूरीउस सप्ताह की दूरी
15 कि.मी.7 × 5 = 35
2(5 + z) कि.मी.7(5 + z) = 35 + 7z
3(5 + 2z) कि.मी.7(5 + 2z) = 35 + 14z
कुल = 35 + (35 + 7z) + (35 + 14z)
= (35 + 35 + 35) + (7z + 14z)
= 105 + 21z कि.मी.
स्वयं जाँचिए: z = 1 कि.मी. पर कुल 35 + 42 + 49 = 126 कि.मी., और 105 + 21 × 1 = 126 ✔
प्र5.
नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए कि कैसे व्यंजक w + 2 एक रास्ते के माध्यम से व्यंजक 4w + 20 हो जाता है। अन्य रास्तों पर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए। अंडाकार स्थानों में व्यंजक लिखे जाएँगे एवं बक्सों में गणितीय संक्रियाएँ लिखी जाएँगी।
उत्तर

मध्य के अंडाकार w + 2 से आरंभ करके प्रत्येक तीर की दिशा में एक-एक बक्सा लगाते चलिए।

रास्ताचरणपरिणाम
ऊपर-दाएँ (दिया हुआ)w + 2 → +3 → w + 5 → ×44w + 20
ऊपर-बाएँw + 2 → –5 → w – 3 → ×33w – 9
नीचे-दाएँw + 2 → –4 → w – 2 → ×33w – 6
नीचे-बाएँw + 2 → –8 → w – 6 → –4w – 10
ऊपर-बाएँ: (w – 3) × 3 = 3w – 9
नीचे-दाएँ: (w + 2) – 4 = w – 2, और (w – 2) × 3 = 3w – 6 ✔
नीचे-बाएँ: (w + 2) – 8 = w – 6, और (w – 6) – 4 = w – 10
ऐसा क्यों होता है: ×3 हर पद को गुणा करता है, अतः (w – 3) × 3 = 3w – 9 होता है, 3w – 3 नहीं। नीचे-दाएँ रास्ते को 3w – 6 से उलटा चलकर जाँचने पर पता चलता है कि रिक्त अंडाकार में w – 2 ही होगा।
प्र6.
यहाँपुर से वहाँपुर जाने वाली एक लोकल ट्रेन मार्ग में समान दूरी पर तीन स्टेशनों पर रुकती है। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक दूरी तय करने में मिनटों में लगने वाला समय समान है एवं इसे t से प्रदर्शित किया गया है। ट्रेन तीनों स्टेशनों पर 2 मिनट के लिए रुकती है। (a) यदि t = 4 हो तो यहाँपुर से वहाँपुर की यात्रा में लगने वाला समय क्या होगा? (b) यहाँपुर से वहाँपुर की यात्रा में लगने वाले समय के लिए बीजगणितीय व्यंजक क्या होगा? (संकेत — स्थिति के दृश्यीकरण के लिए एक रफ आरेख खींचिए।)
उत्तर

तीन स्टेशन दोनों नगरों के बीच हैं, अतः यात्रा 4 चरणों में बँटती है और 3 ठहराव होते हैं।

यहाँपुर वहाँपुर t t t t 2 2 2
t मिनट के चार यात्रा-चरण, और बीच के तीनों स्टेशनों पर 2-2 मिनट का ठहराव।
(b) कुल समय = 4 × t + 3 × 2
= 4t + 6 मिनट

(a) t = 4 पर: 4 × 4 + 6 = 16 + 6 = 22 मिनट
ऐसा क्यों होता है: बीच के तीन ठहराव चार अंतराल बनाते हैं, तीन नहीं — ठीक वैसे ही जैसे रस्सी पर 3 कट लगाने से 4 टुकड़े मिलते हैं।
प्र7.
दिए गए व्यंजकों को सरल कीजिए — (a) 3a + 9b – 6 + 8a – 4b – 7a + 16 (b) 3 (3a – 3b) – 8a – 4b – 16 (c) 2 (2x – 3) + 8x + 12 (d) 8x – (2x – 3) + 12 (e) 8h – (5 + 7h) + 9 (f) 23 + 4 (6m – 3n) – 8n – 3m – 18
उत्तर
(a) 3a + 8a – 7a = 4a; 9b – 4b = 5b; –6 + 16 = 10
= 4a + 5b + 10

(b) 3(3a – 3b) = 9a – 9b
9a – 8a = a; –9b – 4b = –13b
= a – 13b – 16

(c) 2(2x – 3) = 4x – 6
4x + 8x = 12x; –6 + 12 = 6
= 12x + 6

(d) 8x – (2x – 3) + 12 = 8x – 2x + 3 + 12
= 6x + 15

(e) 8h – (5 + 7h) + 9 = 8h – 5 – 7h + 9
= h + 4

(f) 4(6m – 3n) = 24m – 12n
24m – 3m = 21m; –12n – 8n = –20n; 23 – 18 = 5
= 21m – 20n + 5
स्वयं जाँचिए: (d) में x = 2 रखिए — 16 – (4 – 3) + 12 = 16 – 1 + 12 = 27, और 6 × 2 + 15 = 27 ✔
प्र8.
नीचे दिए गए व्यंजकों का योग ज्ञात कीजिए — (a) 4d – 7c + 9 और 8c – 11 + 9d (b) – 6f + 19 – 8s और – 23 + 13f + 12s (c) 8d – 14c + 9 और 16c – (11 + 9d) (d) 6f – 20 + 8s और 23 – 13f – 12s (e) 13m – 12n और 12n – 13m (f) – 26m + 24n और 26m – 24n
उत्तर
(a) (4d + 9d) + (–7c + 8c) + (9 – 11) = 13d + c – 2

(b) (–6f + 13f) + (–8s + 12s) + (19 – 23) = 7f + 4s – 4

(c) 16c – (11 + 9d) = 16c – 11 – 9d
(8d – 9d) + (–14c + 16c) + (9 – 11) = –d + 2c – 2

(d) (6f – 13f) + (8s – 12s) + (–20 + 23) = –7f – 4s + 3

(e) (13m – 13m) + (–12n + 12n) = 0

(f) (–26m + 26m) + (24n – 24n) = 0
ऐसा क्यों होता है: (e) एवं (f) में दूसरा व्यंजक पहले का ठीक विपरीत है, अतः हर पद निरस्त हो जाता है। ऐसे जोड़े का योगफल सदैव शून्य होता है।
प्र9.
नीचे दिए गए व्यंजकों का घटाव कीजिए — (a) 9a – 6b + 14 से 6a + 9b – 18 (b) – 15x + 13 – 9y से 7y – 10 + 3x (c) 17g + 9 – 7h से 11 – 10g + 3h (d) 9a – 6b + 14 से 6a – (9b + 18) (e) 10x + 2 + 10y से –3y + 8 – 3x (f) 8g + 4h – 10 से 7h – 8g + 20
उत्तर

‘A से B घटाना’ का अर्थ है B – A ज्ञात करना। A के हर पद का चिह्न बदलकर जोड़ दीजिए।

(a) (6a + 9b – 18) – (9a – 6b + 14)
= 6a + 9b – 18 – 9a + 6b – 14 = –3a + 15b – 32

(b) (7y – 10 + 3x) – (–15x + 13 – 9y)
= 7y – 10 + 3x + 15x – 13 + 9y = 18x + 16y – 23

(c) (11 – 10g + 3h) – (17g + 9 – 7h)
= 11 – 10g + 3h – 17g – 9 + 7h = –27g + 10h + 2

(d) 6a – (9b + 18) = 6a – 9b – 18
(6a – 9b – 18) – (9a – 6b + 14) = –3a – 3b – 32

(e) (–3y + 8 – 3x) – (10x + 2 + 10y)
= –3y + 8 – 3x – 10x – 2 – 10y = –13x – 13y + 6

(f) (7h – 8g + 20) – (8g + 4h – 10)
= 7h – 8g + 20 – 8g – 4h + 10 = 3h – 16g + 30
संकेत: क्रम का ध्यान रखिए। ‘A से B घटाना’ B – A है, A – B कभी नहीं। क्रम उलटने पर पूरे उत्तर का चिह्न बदल जाता है।
प्र10.
दिए गए बीजगणितीय व्यंजकों के लिए संगत स्थितियों का वर्णन कीजिए — (a) 8x + 3y (b) 15x – 2x
उत्तर

(a) 8x + 3y

एक फल विक्रेता आम ₹x प्रति नग एवं केले ₹y प्रति नग बेचता है। एक ग्राहक 8 आम एवं 3 केले खरीदता है, अतः उसका बिल 8x + 3y रुपये होगा।

(b) 15x – 2x

एक दुकानदार के पास 15 पेंसिलों का पैकेट है, प्रत्येक पेंसिल का मूल्य ₹x है। उनमें से 2 पेंसिल खराब हैं और बिक नहीं सकतीं। पैकेट से प्राप्त राशि 15x – 2x = 13x रुपये होगी।

ऐसा क्यों होता है: (b) में दोनों पदों में एक ही अक्षर-संख्या x है, अतः वे सजातीय पद हैं और मिलकर एक ही पद 13x बन जाते हैं। (a) में अक्षर भिन्न हैं, अतः दोनों पद अलग ही रहेंगे।
प्र11.
कल्पना कीजिए कि एक सीधी रस्सी है। यदि इसे चित्र में दर्शाए अनुसार एक बार काटा जाए तो हमें 2 टुकड़े प्राप्त होंगे। यदि रस्सी को चित्र में दर्शाए अनुसार एक बार मोड़कर काटा जाए तो हमें 3 टुकड़े प्राप्त होंगे। पैटर्न को ध्यान से देखिए एवं बताइए कि यदि रस्सी को 10 बार मोड़कर काटा जाए तो हमें रस्सी के कितने टुकड़े प्राप्त होंगे। यदि रस्सी को r बार मोड़कर काटा जाए तो टुकड़ों की संख्या के लिए व्यंजक क्या होगा?
उत्तर

हर अतिरिक्त मोड़ से एक अतिरिक्त टुकड़ा मिलता है।

मोड़ों की संख्या012310
एक कट के बाद टुकड़े234512
10 बार मोड़कर काटने पर → 10 + 2 = 12 टुकड़े
r बार मोड़कर काटने पर → r + 2 टुकड़े
ऐसा क्यों होता है: r मोड़ों में कट r + 1 लड़ियों से होकर जाता है, जिससे 2(r + 1) छोटे भाग बनते हैं। किंतु r मुड़े हुए सिरे इनमें से दो-दो भागों को फिर से जोड़े रखते हैं, अतः अलग-अलग टुकड़े 2(r + 1) – r = r + 2 होते हैं।
प्र12.
नीचे दी गई माचिस की तीलियों के पैटर्न को ध्यान से देखिए और पहचानिए। ऐसे 10 वर्ग बनाने के लिए माचिस की कितनी तीलियों की आवश्यकता होगी? w वर्ग बनाने के लिए माचिस की कितनी तीलियों की आवश्यकता होगी?
उत्तर

पहले वर्ग के लिए 4 तीलियाँ चाहिए; उसके बाद हर वर्ग एक भुजा साझा करता है, अतः केवल 3 और तीलियाँ लगती हैं।

वर्ग123410
तीलियाँ47101331
10 वर्ग = 4 + 3 × 9 = 4 + 27 = 31 तीलियाँ
w वर्ग = 4 + 3 × (w – 1)
= 4 + 3w – 3
= 3w + 1 तीलियाँ
स्वयं जाँचिए: w = 3 पर 3 × 3 + 1 = 10 ✔, एवं w = 10 पर 31 ✔
प्र13.
क्या आपने ध्यान दिया कि ट्रैफिक सिग्नल में रंग कैसे बदलते हैं? रंग-परिवर्तन का क्रम नीचे दर्शाया गया है। स्थिति 90, 190 एवं 343 पर रंग ज्ञात कीजिए। प्रत्येक रंग की स्थिति का वर्णन करने के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर

चित्र में क्रम है — लाल, पीला, हरा, पीला, लाल … अर्थात लाल – पीला – हरा – पीला का समूह हर 4 स्थानों पर दोहराता है।

स्थान12345678
रंगलालपीलाहरापीलालालपीलाहरापीला
90 = 4 × 22 + 2 → शेषफल 2 → पीला
190 = 4 × 47 + 2 → शेषफल 2 → पीला
343 = 4 × 85 + 3 → शेषफल 3 → हरा

स्थितियों के लिए व्यंजक:

रंगस्थानव्यंजक
लाल1, 5, 9, 13, …4n – 3
हरा3, 7, 11, 15, …4n – 1
पीला2, 4, 6, 8, … (हर सम स्थान)2n
ऐसा क्यों होता है: चार के हर समूह में पीला दो बार आता है — एक बार लाल एवं हरे के बीच और एक बार हरे एवं लाल के बीच। इसीलिए पीला सभी सम स्थानों पर आता है, जबकि लाल एवं हरा एकांतर विषम स्थानों पर।
प्र14.
दिए गए पैटर्न को ध्यान से देखिए। चरण 4, चरण 10 एवं चरण 50 में कितने वर्ग होंगे? एक सामान्य सूत्र लिखिए। यदि हम सभी वर्गों के कोनों की संख्या को गिनना चाहते हैं तो सूत्र कैसे बदलेगा?
उत्तर

प्रत्येक चरण एक X है जिसमें एक मध्य वर्ग एवं चार भुजाएँ हैं। चरण 1 में हर भुजा 1 वर्ग की है, चरण 2 में 2 वर्ग की, और इसी प्रकार आगे।

चरणमध्यचार भुजाएँवर्ग
114 × 15
214 × 29
314 × 313
414 × 417
1014 × 1041
5014 × 50201
चरण n में वर्गों की संख्या = 4n + 1
चरण 4 → 17, चरण 10 → 41, चरण 50 → 201

कोनों की गिनती: प्रत्येक वर्ग के 4 कोने होते हैं, अतः

कोनों की संख्या = 4 × (4n + 1)
= 16n + 4
ऐसा क्यों होता है: हर चरण में चारों भुजाओं में एक-एक वर्ग बढ़ता है; मध्य वाला वर्ग कभी नहीं बदलता। यही 4n + 1 का ‘+ 1’ है। हर वर्ग के 4 कोने गिनने पर पूरा सूत्र 4 से गुणा हो जाता है।
प्र15.
इस अनंत 4 स्तंभीय ग्रिड में संख्याएँ एक विशेष क्रम में लिखी गई हैं। (a) दिए गए एक स्तंभ (1, 2, 3, 4) में सभी संख्याएँ निर्मित करने के लिए व्यंजक दीजिए। (b) बताइए कि नीचे दी गई संख्याएँ किस पंक्ति एवं किस स्तंभ में विद्यमान होंगी — (i) 124 (ii) 147 (iii) 201 (c) कौन-सी संख्या पंक्ति ‘r’ एवं स्तंभ ‘c’ में विद्यमान होगी? (d) 3 के गुणजों की स्थितियों को ध्यान से देखिए। क्या आपको इसमें कोई पैटर्न दिख रहा है? आप जो अन्य पैटर्न देखते हैं, उनकी सूची बनाइए।
उत्तर

पंक्ति 1 में 1–4, पंक्ति 2 में 5–8, पंक्ति 3 में 9–12 … हर पंक्ति 4 संख्याएँ लेती है, अतः पंक्ति r 4(r – 1) + 1 से आरंभ होती है।

(a) स्तंभों के व्यंजक (जहाँ r पंक्ति संख्या है) —

स्तंभसंख्याएँव्यंजक
11, 5, 9, 13, …4(r – 1) + 1 = 4r – 3
22, 6, 10, 14, …4(r – 1) + 2 = 4r – 2
33, 7, 11, 15, …4(r – 1) + 3 = 4r – 1
44, 8, 12, 16, …4(r – 1) + 4 = 4r

(b) संख्या का स्थान — 4 से भाग दीजिए और शेषफल को स्तंभ मानिए (शेषफल 0 का अर्थ स्तंभ 4)।

(i) 124 = 4 × 31 + 0 → स्तंभ 4, एवं 4(r – 1) + 4 = 124 से r – 1 = 30 → पंक्ति 31
(ii) 147 = 4 × 36 + 3 → स्तंभ 3, r – 1 = 36 → पंक्ति 37
(iii) 201 = 4 × 50 + 1 → स्तंभ 1, r – 1 = 50 → पंक्ति 51

(c) पंक्ति r एवं स्तंभ c में विद्यमान संख्या होगी —

4(r – 1) + c

(d) 3 के गुणज। उनके स्तंभ 3, 2, 1, 4, 3, 2, 1, 4, … के क्रम में दोहराते हैं।

3 का गुणज3691215182124
स्तंभ32143214

अन्य पैटर्न:

  • स्तंभ 4 की हर संख्या 4 का गुणज है।
  • सम संख्याएँ केवल स्तंभ 2 एवं 4 में आती हैं; विषम संख्याएँ केवल स्तंभ 1 एवं 3 में।
  • किसी भी स्तंभ में नीचे जाने पर संख्याएँ हर बार 4 बढ़ती हैं।
  • पंक्ति में दाईं ओर बढ़ने पर संख्या 1 बढ़ती है; नीचे की ओर विकर्ण में 5 बढ़ती है।
ऐसा क्यों होता है: ग्रिड की चौड़ाई 4 है और हर बार 3 जोड़ा जाता है, अतः हर कदम पर स्तंभ एक पीछे खिसक जाता है (क्योंकि 3 = 4 – 1) — यही 3, 2, 1, 4 का दोहराव है।
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