गणित प्रकाश अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यहाँ कोई समांतर रेखाएँ नहीं हैं। अथवा हैं भी?
उत्तर

हाँ, हैं। तीनों चित्रों में लंबी रेखाएँ वास्तव में समांतर ही हैं — वे केवल मुड़ी हुई, झुकी हुई या टेढ़ी दिखती हैं।

  • पहले चित्र में सीधी ऊर्ध्वाधर रेखाएँ इसलिए झुकी दिखती हैं क्योंकि किरणों का एक गुच्छा उन्हें काट रहा है।
  • दूसरे चित्र (कैफ़े-वॉल प्रतिरूप) में लंबी क्षैतिज पंक्तियाँ तिरछी लगती हैं, जबकि वे बिलकुल समांतर हैं।
  • तीसरे चित्र में क्षैतिज रेखाएँ बीच के पास बाहर की ओर उभरी हुई दिखती हैं।
स्वयं जाँचिए: किसी भी एक रेखा पर मापक का किनारा रखिए। वह पूरी रेखा से मिल जाता है — प्रमाण कि रेखा सीधी है। फिर दो रेखाओं के बीच की दूरी दोनों सिरों पर मापिए: दोनों माप समान आते हैं, अतः रेखाएँ समांतर हैं।
प्र2.
इन भ्रमों के क्या कारण हैं?
उत्तर

इनका कारण है पृष्ठभूमि का प्रतिरूप, जो आँखों को धोखा देता है।

  • तीखे कोणों पर काटती रेखाएँ। जहाँ कोई तिरछी किरण सीधी रेखा से मिलती है, मस्तिष्क उनके बीच के छोटे कोण को थोड़ा बढ़ा-चढ़ाकर देखता है। हर प्रतिच्छेद रेखा को थोड़ा-थोड़ा खींचता है और रेखा मुड़ी हुई लगने लगती है।
  • बारी-बारी से काले-सफ़ेद खाने। कैफ़े-वॉल चित्र में हर पंक्ति के काले-सफ़ेद खाने थोड़ा-थोड़ा खिसके हुए हैं। आँख पड़ोसी खानों के कोनों को जोड़ लेती है और एक ऐसी ढाल पढ़ लेती है जो है ही नहीं।
  • केंद्र से फैलती किरणें। किरणें गहराई का झूठा आभास देती हैं और मस्तिष्क सीधी रेखाओं को ऐसे "सुधार" देता है मानो वे दूर हों, जिससे वे टेढ़ी दिखने लगती हैं।
ऐसा क्यों होता है: हमारी आँखें मापती नहीं, व्याख्या करती हैं। मस्तिष्क आस-पास के प्रतिरूप से गहराई और दिशा का अनुमान लगाता है, और चतुराई से बनाया गया प्रतिरूप उस अनुमान को गलत कर देता है। इसीलिए ज्यामिति दिखावे के बजाय तर्क और उपकरणों पर ज़ोर देती है।
क्या आप जानते हैं? यही पूरे अध्याय का सार भी है: दो रेखाएँ समांतर दिख सकती हैं पर हों नहीं (चित्र 5.13), या समांतर न दिखें पर हों। निर्णय केवल संगत कोणों की समानता से ही होता है।
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