प्र1.
कागज का एक वर्गाकार टुकड़ा लीजिए और इसे विभिन्न प्रकार से मोड़िए तथा इसे पुन: खोल लीजिए। अब मोड़ने से कागज पर बने मोड़ों पर मापक व पेंसिल का उपयोग करके रेखाएँ खींचिए। आपको कागज पर विभिन्न रेखाएँ दिखेंगी। रेखाओं के किसी भी युग्म को लीजिए और एक-दूसरे के साथ उनका संबंध देखिए। क्या वे परस्पर मिल रही हैं? क्या आपको लगता है कि जो रेखाएँ कागज के अंदर नहीं मिल रही हैं, यदि उन्हें कागज के बाहर तक बढ़ाया जाए तो वे मिलेंगी?
उत्तर
कुछ मोड़ों के युग्म कागज के भीतर ही एक-दूसरे को काटते हैं — वे रेखाएँ मिलती हैं। जो युग्म कागज के भीतर नहीं मिलते, उनके लिए दो अलग-अलग स्थितियाँ बनती हैं।
- यदि दोनों मोड़ों का झुकाव भिन्न है तो एक ओर उनके बीच की दूरी लगातार घटती जाती है। उन्हें कागज के बाहर तक बढ़ाने पर वे अवश्य मिलेंगी।
- यदि दोनों मोड़ों के बीच की दूरी हर जगह बिलकुल समान रहती है (जैसे कागज को दो बार आधा-आधा मोड़ने से बने मोड़), तो वे कितना भी बढ़ाने पर कभी नहीं मिलेंगी। ऐसी रेखाएँ समांतर कहलाती हैं।
ऐसा क्यों होता है: एक तल की दो सरल रेखाएँ अधिक से अधिक एक ही बार कट सकती हैं। अतः या तो वे पहले ही कट चुकी हैं, या कागज के बाहर कहीं कटेंगी, या कभी नहीं कटेंगी। कभी न कटने की एक ही शर्त है — दोनों का झुकाव बिलकुल एक जैसा हो, तब उनके बीच की दूरी सदैव समान बनी रहती है।
स्वयं जाँचिए: एक मोड़ पर मापक रखिए और उसे बिना घुमाए दूसरे मोड़ की ओर खिसकाइए। यदि दोनों मोड़ों के बीच की दूरी पूरे मापक पर समान रहती है तो वे कभी नहीं मिलेंगी।