गणित प्रकाश अध्याय 5 पता लगाइए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 5.10 में बिंदुकित कागज पर दी गई रेखाओं के लम्बवत कुछ रेखाएँ खींचिए।
उत्तर

हर दी गई रेखा को एक पग की तरह पढ़िए — "इतने बिंदु दाएँ, इतने बिंदु नीचे"। उसे घुमाने के लिए दोनों संख्याएँ आपस में बदल दीजिए और एक का चिह्न पलट दीजिए।

दी गई रेखाउसका पगएक लम्ब रेखाखंड
ऊपरी पंक्ति की क्षैतिज रेखा2 दाएँ, 0 नीचे0 दाएँ, 1 नीचे — एक ऊर्ध्वाधर रेखाखंड
नीचे बाईं ओर की तिरछी रेखा2 दाएँ, 2 ऊपर2 दाएँ, 2 नीचे — दूसरी ओर झुका 45° का रेखाखंड
बीच की ऊर्ध्वाधर रेखा0 दाएँ, 2 नीचे2 दाएँ, 0 नीचे — एक क्षैतिज रेखाखंड
दाईं ओर की खड़ी ढलान वाली रेखा2 दाएँ, 3 नीचे3 दाएँ, 2 ऊपर
धूसर = चारों दी गई रेखाएँ; नीली = बिंदुओं पर खींची गई लम्ब रेखाएँ। हर नीला रेखाखंड अपनी धूसर जोड़ी को 90° पर काटता है और उसके दोनों सिरे बिंदुओं पर हैं।
ऐसा क्यों होता है: यदि कोई रेखाखंड p दाएँ और q नीचे जाता है, तो q दाएँ और p ऊपर जाने वाला रेखाखंड दिशा को ठीक एक चौथाई चक्कर घुमा देता है। बिंदुओं का जाल दोनों सिरों को बिंदुओं पर ही रखता है, इसलिए चाँदे की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
स्वयं जाँचिए: हर प्रतिच्छेद पर पन्ने का कोना रखिए। वह बिना किसी खाली जगह के ठीक बैठना चाहिए।
प्र2.
चित्र 5.11 में ऊपर दिए गए संकेतनों (एकल तीर का चिह्न, दो तीर के चिह्न आदि) का उपयोग करके समांतर रेखाओं को चिह्नित कीजिए। लम्ब रेखाओं के बीच कोण को वर्ग के प्रतीक से चिह्नित कीजिए। (a) आपने लम्बवत रेखाओं को कैसे पहचाना? (b) आपने समांतर रेखाओं को कैसे पहचाना?
उत्तर

जाल पर एक-एक आकृति लेकर काम कीजिए।

  • हर ऊर्ध्वाधर भुजा पर एक तीर का चिह्न (>) और हर क्षैतिज भुजा पर दो तीर के चिह्न (>>) लगाइए।
  • जाल के विकर्णों पर चलने वाली तिरछी भुजाएँ दो परिवारों में बँटती हैं — दाईं ओर नीचे जाने वाली और दाईं ओर ऊपर जाने वाली। एक परिवार पर तीन तीर और दूसरे पर चार तीर लगाइए।
  • जहाँ कोई ऊर्ध्वाधर भुजा किसी क्षैतिज भुजा से मिलती है, वहाँ 90° का छोटा वर्ग चिह्न बनाइए।

(a) आपने लम्बवत रेखाओं को कैसे पहचाना? जाल की ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज रेखाएँ एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती हैं। अतः जहाँ एक भुजा जाल के स्तंभ पर और दूसरी पंक्ति पर चलती है, वहाँ वे लम्ब हैं। पन्ने का कोना या समकोणक रखकर इसकी पुष्टि कर सकते हैं।

(b) आपने समांतर रेखाओं को कैसे पहचाना? ऐसी रेखाएँ ढूँढ़कर जो सदैव समान दूरी पर रहती हैं। जाल पर यह आसान है — दो भुजाएँ तभी समांतर हैं जब उनका पग समान हो, जैसे दोनों 1 खाना दाएँ और 1 खाना नीचे जाती हों।

ऐसा क्यों होता है: जाल स्वयं समांतर रेखाओं के दो परिवारों से बना है जो एक-दूसरे को 90° पर काटते हैं। जाल के सहारे खींची गई हर भुजा इन्हीं संबंधों को अपना लेती है, इसलिए मापने के बजाय खाने गिनकर ही निर्णय हो जाता है।
प्र3.
नीचे दिए बिंदुकित कागज पर समांतर रेखाओं के विभिन्न समूह बनाइए। रेखाखंड विभिन्न लंबाइयों के हो सकते हैं किंतु उनके अंत-बिंदु बिंदुकित होने चाहिए।
उत्तर

एक पग चुनिए और उसी पग को अलग-अलग बिंदुओं से दोहराइए। कुछ सरल समूह नीचे दिए हैं।

समूहप्रयुक्त पगउदाहरण (बिंदुओं को मिलाकर)
13 दाएँ, 0 नीचेभिन्न पंक्तियों में 2, 3 और 4 इकाई लंबे तीन क्षैतिज रेखाखंड
20 दाएँ, 2 नीचेभिन्न स्तंभों में ऊर्ध्वाधर रेखाखंड
31 दाएँ, 1 नीचेभिन्न बिंदुओं से आरंभ होते 45° के रेखाखंड
42 दाएँ, 1 ऊपरधीरे-धीरे ऊपर उठते रेखाखंड — कठिन पर सुंदर समूह
ऐसा क्यों होता है: दो रेखाखंड ठीक तभी समांतर होते हैं जब उनकी दिशा समान हो। बिंदुकित कागज पर दिशा पूरी तरह पग से तय होती है, अतः समान पग = समांतर, चाहे लंबाई कुछ भी हो और आरंभ कहीं से भी हो।
संकेत: रेखाखंडों की लंबाई जान-बूझकर अलग-अलग रखिए। इससे याद रहेगा कि समांतर होना दिशा की बात है, आकार की नहीं।
प्र4.
अपनी समझ का उपयोग करके बताइए कि समांतर रेखाएँ कैसी दिखती हैं तथा इस बिंदुकित कागज पर दिए गए रेखाखंडों के समांतर रेखाएँ खींचने का प्रयत्न कीजिए। (a) क्या आपको इनमें से कुछ रेखाएँ खींचना चुनौतीपूर्ण लगा? (b) कौन-सी रेखाएँ खींचना चुनौतीपूर्ण लगा? (c) आपने इसे कैसे किया?
उत्तर

चित्र 5.12 के हर रेखाखंड का पग गिनिए और उसी पग को किसी दूसरे बिंदु से दोहराइए।

(a) क्या चुनौतीपूर्ण लगा? हाँ — कुछ रेखाएँ बहुत कठिन थीं।

(b) कौन-सी? रेखाखंड e, f, g और h। ये न किसी पंक्ति पर हैं, न किसी स्तंभ पर और न ही 45° के विकर्ण पर, इसलिए आँख से इनका अनुमान लगाना कठिन है। क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर और 45° वाले (a, b, c, d) आसान थे।

(c) आपने कैसे किया? दो भरोसेमंद तरीके:

  1. पग गिनिए। यदि रेखाखंड 3 बिंदु दाएँ और 1 बिंदु नीचे जाता है, तो किसी दूसरे बिंदु से 3 दाएँ और 1 नीचे जाकर दोनों बिंदुओं को मिला दीजिए।
  2. दूरी समान रखिए। दी गई रेखा से समान लम्बवत दूरी पर दो बिंदु अंकित कीजिए, एक-एक सिरे के पास, और उन्हें मिला दीजिए।
ऐसा क्यों होता है: "3 दाएँ, 1 नीचे" जैसी तिरछी दिशा की नकल करने के लिए पन्ने पर कोई सहारा नहीं होता, इसलिए अंदाज़ा गलत हो जाता है। बिंदु गिनने से दिशा दो पूर्ण संख्याओं में बदल जाती है, जिन्हें ठीक-ठीक दोहराना आसान है।
स्वयं जाँचिए: दोनों रेखाखंडों को काटती हुई कोई रेखा खींचिए। यदि आपका चित्र सही है तो दोनों प्रतिच्छेदों पर एक ही स्थिति के कोण समान होंगे।
प्र5.
चित्र 5.13 में कौन-सी रेखा, रेखा a के समांतर है — रेखा b या रेखा c? आपने यह कैसे सुनिश्चित किया?
उत्तर

रेखा c, रेखा a के समांतर है।

रेखाएँ b और c एक ही बिंदु से निकलती हैं, और चित्र में उस बिंदु को रेखा a के सिरे से जोड़ता हुआ एक रेखाखंड पहले से खिंचा है। उसे तिर्यक रेखा मानकर कोणों की तुलना कीजिए।

जोड़ने वाली रेखा और रेखा a के बीच कोण ≈ 29°
जोड़ने वाली रेखा और रेखा c के बीच कोण ≈ 29° → समान
जोड़ने वाली रेखा और रेखा b के बीच कोण ≈ 32° → समान नहीं ✘

संगत कोण केवल c और a के लिए समान हैं, अतः c ∥ a। रेखा b थोड़ी अधिक झुकी है, इसलिए दाईं ओर पर्याप्त दूर बढ़ाने पर b और a मिल जाएँगी।

ऐसा क्यों होता है: झुकाव के छोटे अंतर आँख नहीं पकड़ पाती — 29° और 32° एक जैसे दिखते हैं। तिर्यक रेखा इस प्रश्न को दो कोणों की तुलना में बदल देती है, जिसे चाँदा (या अनुरेखण कागज) ठीक-ठीक तय कर देता है।
संकेत: एक और जल्दी जाँच — a और c के बीच लम्बवत दूरी दोनों सिरों के पास मापिए। समांतर युग्म में दोनों माप समान आते हैं।
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