गणित प्रकाश अध्याय 5 उदाहरण

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरण 1 — चित्र 5.26 में समांतर रेखाएँ l व m तिर्यक रेखा t द्वारा प्रतिच्छेद की जाती हैं। यदि ∠6 का माप 135° हो तो अन्य कोणों का माप क्या होगा?
उत्तर

∠6 = 135° से आरंभ करके पूरे चित्र में चलिए।

∠2 = ∠6 = 135° (संगत कोण, l ∥ m)
∠8 = ∠6 = 135° (शीर्षाभिमुख)
∠4 = ∠8 = 135° (संगत)
∠2 = ∠4 = 135° (शीर्षाभिमुख) ✔

∠5 + ∠6 = 180° (रैखिक युग्म)
∠5 = 180° – 135° = 45°
इसी प्रकार ∠1 = ∠3 = ∠7 = 45°
कोणमाप
∠2, ∠4, ∠6, ∠8135°
∠1, ∠3, ∠5, ∠745°
ऐसा क्यों होता है: जब तिर्यक रेखा समांतर रेखाओं को काटती है तो केवल दो माप बन सकते हैं और उनका योग 180° होना चाहिए। यहाँ वे 135° और 45° हैं, तथा 135 + 45 = 180 ✔
प्र2.
उदाहरण 2 — चित्र 5.27 में रेखाएँ l व m तिर्यक रेखा t द्वारा प्रतिच्छेद की जाती हैं। यदि ∠a का माप 120° हो एवं ∠f का माप 70° हो तो क्या रेखाएँ l व m एक-दूसरे के समांतर हैं?
उत्तर

नहीं, l और m समांतर नहीं हैं।

∠a + ∠b = 180° (रैखिक युग्म)
120° + ∠b = 180°
∠b = 60°

∠b और ∠f संगत कोण हैं
l ∥ m के लिए ∠b = ∠f होना चाहिए
परंतु 60° ≠ 70° ✘

संगत कोण समान नहीं हैं, अतः रेखाएँ समांतर नहीं हैं।

ऐसा क्यों होता है: ∠f, ∠b से 10° बड़ा है, अर्थात रेखा m, रेखा l से 10° अधिक झुकी है। भिन्न झुकाव वाली रेखाएँ कहीं न कहीं मिलती ही हैं — यहाँ वे उस ओर मिलेंगी जिधर उनके बीच की दूरी घटती है।
संकेत: 120° की तुलना सीधे 70° से कभी मत कीजिए। पहले दोनों कोणों को दोनों प्रतिच्छेदों पर एक ही स्थिति में लाइए, तभी तुलना कीजिए।
प्र3.
उदाहरण 3 — चित्र 5.28 में तिर्यक रेखा t समांतर रेखाओं l व m को प्रतिच्छेद करती है। यदि ∠3 का माप 50° है तो ∠6 का माप क्या होगा?
उत्तर

∠6 = 130°।

∠2 + ∠3 = 180° (रैखिक युग्म)
∠2 = 180° – 50° = 130°
∠2 = ∠6 (संगत कोण, l ∥ m)
अतः ∠6 = 130°

साथ ही यह भी मिलता है: ∠3 + ∠6 = 50° + 130° = 180°। कोण ∠3 और ∠6 तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंत: कोण कहलाते हैं।

ऐसा क्यों होता है: ∠3 और ∠2 मिलकर एक सरल रेखा भरते हैं, और ∠2 दूसरी समांतर रेखा पर ∠6 की ही प्रतिलिपि है। इसलिए ∠3 और ∠6 मिलकर वही 180° का ऋजु कोण भरते हैं।
प्र4.
क्या कोण ∠3 और ∠6 के बीच कोई संबंध है? आप ∠3 के विभिन्न माप लेकर एवं ∠6 के माप देखकर इस संबंध को ज्ञात करने का प्रयत्न कर सकते हैं। जब आपको यह संबंध ज्ञात हो जाए तो इसकी जाँच करने का प्रयत्न करें एवं सिद्ध करने का प्रयत्न करें कि क्या यह संबंध सदैव सत्य ही है।
उत्तर

हाँ: ∠3 + ∠6 = 180° सदैव। तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंत: कोण संपूरक होते हैं।

∠3∠2 = 180° – ∠3∠6 = ∠2∠3 + ∠6
50°130°130°180°
70°110°110°180°
90°90°90°180°
115°65°65°180°

उपपत्ति (बिना किसी मापन के):

∠2 + ∠3 = 180° (रेखा l पर रैखिक युग्म)
∠2 = ∠6 (संगत कोण, l ∥ m)
पहली पंक्ति में ∠2 के स्थान पर ∠6 रखिए:
∠6 + ∠3 = 180°
ऐसा क्यों होता है: पूरा तर्क केवल एक प्रतिस्थापन है। ∠6 वास्तव में ∠2 ही है, बस दूसरे नाम से; और ∠2 पहले से ही ∠3 का ऋजु-कोण साथी था। इसलिए योग 180° के अलावा कुछ हो ही नहीं सकता
क्या आप जानते हैं? इन्हें सह-अंत: कोण भी कहते हैं। संगत कोण और एकांतर कोण के साथ मिलकर ये तीन तथ्य इस अध्याय के लगभग हर प्रश्न को हल कर देते हैं।
प्र5.
उदाहरण 4 — चित्र 5.29 में रेखाखंड AB रेखाखंड CD के समांतर है एवं रेखाखंड AD रेखाखंड BC के समांतर है। ∠ADC का माप 60° है। ∠CAB, ∠ABC एवं ∠BCD के माप क्या हैं?
उत्तर

चित्र 5.29 में ∠DAC = 65° भी दिया गया है। अब अंत: कोणों का नियम दो बार लगाइए।

चरण 1 — AB ∥ CD, तिर्यक रेखा AD
∠ADC + ∠DAB = 180° (एक ही ओर के अंत: कोण)
60° + ∠DAB = 180°
∠DAB = 120°

चरण 2 — ∠DAB को बाँटिए
∠DAB = ∠DAC + ∠CAB
120° = 65° + ∠CAB
∠CAB = 55°

चरण 3 — AD ∥ BC, तिर्यक रेखा CD
∠ADC + ∠BCD = 180°
60° + ∠BCD = 180°
∠BCD = 120°

चरण 4 — AB ∥ CD, तिर्यक रेखा BC
∠BCD + ∠ABC = 180°
120° + ∠ABC = 180°
∠ABC = 60°

अतः ∠CAB = 55°, ∠ABC = 60°, ∠BCD = 120°।

ऐसा क्यों होता है: ABCD की सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं, अतः यह एक समांतर चतुर्भुज है। इसीलिए सम्मुख कोण समान आते हैं (∠ADC = ∠ABC = 60° तथा ∠DAB = ∠BCD = 120°) और आसन्न कोणों का योग 180° होता है।
स्वयं जाँचिए: 60 + 120 + 60 + 120 = 360°, जो किसी भी चतुर्भुज के कोणों का सही योग है ✔
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