गणित प्रकाश अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चौतीस अर्थात 34 है। आपके विचार से उन लोगों ने इसे ‘चौतीसा यंत्र’ क्यों कहा?
उत्तर

क्योंकि उस 4 × 4 वर्ग की प्रत्येक पंक्ति, प्रत्येक स्तंभ और प्रत्येक विकर्ण की संख्याओं का योग 34 है — अत: 34 ही उस यंत्र की पहचान है।

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पंक्तियाँ: 7 + 12 + 1 + 14 = 34,  2 + 13 + 8 + 11 = 34,  16 + 3 + 10 + 5 = 34,  9 + 6 + 15 + 4 = 34
स्तंभ: 7 + 2 + 16 + 9 = 34,  12 + 13 + 3 + 6 = 34,  1 + 8 + 10 + 15 = 34,  14 + 11 + 5 + 4 = 34
विकर्ण: 7 + 13 + 10 + 4 = 34,  14 + 8 + 3 + 9 = 34
ऐसा क्यों होता है: इस वर्ग में 1 से 16 तक की संख्याएँ हैं, जिनका कुल योग 1 + 2 + … + 16 = 136 है। चार पंक्तियों में बराबर बाँटने पर प्रत्येक पंक्ति को 136 ÷ 4 = 34 मिलता है। अत: 34 निश्चित है।
क्या आप जानते हैं? यह शिलालेख खजुराहो के पार्श्वनाथ जैन मंदिर का दसवीं शताब्दी का है — विश्व का सर्वप्रथम अभिलेखित 4 × 4 जादुई वर्ग।
प्र2.
इस जादुई वर्ग की प्रत्येक पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण की संख्याओं का योग 34 है। क्या आप इस वर्ग में 4 संख्याओं के अन्य प्रतिरूप (पैटर्न) ज्ञात कर सकते हैं जिनका योग 34 हो?
उत्तर

हाँ — यह वर्ग असाधारण रूप से समृद्ध है। नीचे दिए गए सभी प्रतिरूपों का योग 34 है —

प्रतिरूपसंख्याएँयोग
चारों कोने7 + 14 + 9 + 434
बीच का 2 × 2 खंड13 + 8 + 3 + 1034
ऊपर बाईं ओर का 2 × 2 खंड7 + 12 + 2 + 1334
ऊपर दाईं ओर का 2 × 2 खंड1 + 14 + 8 + 1134
नीचे बाईं ओर का 2 × 2 खंड16 + 3 + 9 + 634
नीचे दाईं ओर का 2 × 2 खंड10 + 5 + 15 + 434
पहली और अंतिम पंक्ति के बीच वाले दो-दो खाने12 + 1 + 6 + 1534
पहले और अंतिम स्तंभ के बीच वाले दो-दो खाने2 + 16 + 11 + 534
एक टूटा विकर्ण12 + 8 + 5 + 934
दूसरा टूटा विकर्ण1 + 11 + 16 + 634
एक पतंगाकार प्रतिरूप7 + 8 + 15 + 434
उसका दर्पण प्रतिरूप14 + 13 + 3 + 434
ऐसा क्यों होता है: चौतीसा यंत्र वह है जिसे गणितज्ञ अति-पूर्ण जादुई वर्ग कहते हैं। इसमें प्रत्येक 2 × 2 खंड तथा किनारों से लपेटकर बनने वाले टूटे विकर्ण भी 34 ही देते हैं — यह साधारण जादुई वर्ग से कहीं अधिक है।
प्रयास कीजिए: ग्रिड में कहीं से भी कोई 2 × 2 खंड लीजिए (किनारों से लपेटते हुए भी) और चारों संख्याएँ जोड़िए। हर बार 34 ही प्राप्त होगा।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ