प्र1.
चौतीस अर्थात 34 है। आपके विचार से उन लोगों ने इसे ‘चौतीसा यंत्र’ क्यों कहा?
उत्तर
क्योंकि उस 4 × 4 वर्ग की प्रत्येक पंक्ति, प्रत्येक स्तंभ और प्रत्येक विकर्ण की संख्याओं का योग 34 है — अत: 34 ही उस यंत्र की पहचान है।
| 7 | 12 | 1 | 14 |
| 2 | 13 | 8 | 11 |
| 16 | 3 | 10 | 5 |
| 9 | 6 | 15 | 4 |
पंक्तियाँ: 7 + 12 + 1 + 14 = 34, 2 + 13 + 8 + 11 = 34, 16 + 3 + 10 + 5 = 34, 9 + 6 + 15 + 4 = 34
स्तंभ: 7 + 2 + 16 + 9 = 34, 12 + 13 + 3 + 6 = 34, 1 + 8 + 10 + 15 = 34, 14 + 11 + 5 + 4 = 34
विकर्ण: 7 + 13 + 10 + 4 = 34, 14 + 8 + 3 + 9 = 34
स्तंभ: 7 + 2 + 16 + 9 = 34, 12 + 13 + 3 + 6 = 34, 1 + 8 + 10 + 15 = 34, 14 + 11 + 5 + 4 = 34
विकर्ण: 7 + 13 + 10 + 4 = 34, 14 + 8 + 3 + 9 = 34
ऐसा क्यों होता है: इस वर्ग में 1 से 16 तक की संख्याएँ हैं, जिनका कुल योग 1 + 2 + … + 16 = 136 है। चार पंक्तियों में बराबर बाँटने पर प्रत्येक पंक्ति को 136 ÷ 4 = 34 मिलता है। अत: 34 निश्चित है।
क्या आप जानते हैं? यह शिलालेख खजुराहो के पार्श्वनाथ जैन मंदिर का दसवीं शताब्दी का है — विश्व का सर्वप्रथम अभिलेखित 4 × 4 जादुई वर्ग।