गणित प्रकाश अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इन ग्रिड में छोटे वर्गों की संख्या की समानता ज्ञात कीजिए — (a) 27 × 13 (b) 42 × 78 (c) 135 × 654
उत्तर
ग्रिडदोनों भुजाओं की समानतासंख्या की समानतावास्तविक गुणनफल
(a)27 × 13विषम, विषमविषम351
(b)42 × 78सम, समसम3276
(c)135 × 654विषम, समसम88290
ऐसा क्यों होता है: गुणनफल विषम केवल तभी होता है जब प्रत्येक गुणनखंड विषम हो। एक भी सम गुणनखंड 2 का गुणनखंड दे देता है और पूरा गुणनफल सम हो जाता है।
स्वयं जाँचिए: समानता बिना गुणा किए ज्ञात की गई है — गुणनफल केवल पुष्टि के लिए दिए गए हैं।
प्र2.
एक ऐसा व्यंजक लिखिए जिसकी समानता सदैव सम है। इसके कुछ उदाहरण हैं, जैसे — 100p और 48w – 2, इसी प्रकार के और अधिक व्यंजक ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

ऐसा कोई भी व्यंजक जिसका प्रत्येक पद 2 का गुणज हो, सदैव सम मान देता है।

2n  •  6k  •  10m  •  4a + 8  •  12t – 6  •  100p  •  48w – 2

एक की जाँच कीजिए —

4a + 8  →  a = 1: 12,   a = 2: 16,   a = 3: 20  — सभी सम
ऐसा क्यों होता है: व्यंजक को 2 × (कुछ) के रूप में लिखिए। जैसे 4a + 8 = 2(2a + 4)। जिस संख्या में 2 गुणनखंड हो उसे सदैव युग्मों में व्यवस्थित किया जा सकता है, अत: वह सम है।
प्र3.
ऐसे व्यंजक लिखिए जिनकी समानता सदैव विषम है।
उत्तर

सदैव सम रहने वाले व्यंजक में 1 (या कोई विषम संख्या) जोड़ या घटा दीजिए

2n + 1  •  2m – 1  •  4n + 3  •  6k + 5  •  8a + 3  •  10p – 7

एक की जाँच कीजिए —

6k + 5  →  k = 1: 11,   k = 2: 17,   k = 3: 23  — सभी विषम
ऐसा क्यों होता है: 6k पूर्ण युग्मों का संग्रह है; उसमें 5 जोड़ने पर (5 स्वयं विषम है) एक बिंदु बिना साथी के रह जाता है। अत: मान कभी सम नहीं हो सकता।
प्र4.
3n + 4 जैसे कुछ अन्य व्यंजक लिखिए जिनकी समानता या तो विषम हो सकती है या फिर सम हो सकती है।
उत्तर

ऐसा पद लीजिए जिसका गुणांक विषम हो, जिससे n बदलने पर समानता भी बदलती रहे।

3n + 4  •  5n + 2  •  7n + 1  •  9n – 4  •  n + 3
n5n + 2समानता
17विषम
212सम
317विषम
422सम
ऐसा क्यों होता है: 5n + 2 में 5n तब विषम होता है जब n विषम हो तथा तब सम होता है जब n सम हो। निश्चित सम संख्या 2 जोड़ने से यह नहीं बदलता, अत: उत्तर एकांतर रूप से विषम और सम होता रहता है।
प्र5.
व्यंजक 6k + 2 का मान 8, 14, 20, ... प्राप्त होता है (k = 1, 2, 3, ... के लिए)। इसमें अनेक सम संख्याएँ छूट गई हैं। क्या ऐसे व्यंजक हैं जिनके उपयोग से हम सभी सम संख्याओं की सूची बना सकते हैं? (संकेत — सभी सम संख्याओं का एक गुणनखंड 2 है।)
उत्तर

हाँ — वह व्यंजक 2n है।

n = 1, 2, 3, 4, 5, …
2n = 2, 4, 6, 8, 10, …  — प्रत्येक सम संख्या आ जाती है, कोई नहीं छूटती।

6k + 2 से तुलना कीजिए —

व्यंजकमानक्या छूट जाता है
6k + 28, 14, 20, 26, …2, 4, 6, 10, 12, 16, …
2n2, 4, 6, 8, 10, …कुछ नहीं
ऐसा क्यों होता है: 6k + 2 = 2(3k + 1) है, अत: इससे केवल वही सम संख्याएँ मिलती हैं जिनका आधा 3k + 1 के रूप का हो — यह 6 के पगों में बढ़ता है। 2n दो के पगों में बढ़ता है, अत: वह प्रत्येक सम संख्या को पकड़ लेता है
प्र6.
क्या ऐसे व्यंजक हैं जिनके उपयोग से हम सभी विषम संख्याओं की सूची बना सकते हैं?
उत्तर

हाँ — 2n – 1 (जहाँ n = 1, 2, 3, …)।

n = 1 → 2(1) – 1 = 1
n = 2 → 2(2) – 1 = 3
n = 3 → 2(3) – 1 = 5
n = 4 → 2(4) – 1 = 7  … इत्यादि

व्यंजक 2n + 1 भी केवल विषम संख्याएँ देता है, परंतु n = 1 से आरंभ करने पर वह 3, 5, 7, … देता है और 1 छूट जाता है।

ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक विषम संख्या किसी सम संख्या से एक कम होती है। 2n सभी सम संख्याएँ देता है, अत: 2n – 1 सभी विषम संख्याएँ देता है।
प्र7.
2 के गुणजों का nवाँ पद क्या होगा? अथवा nवीं सम संख्या क्या है?
उत्तर

nवीं सम संख्या 2n है।

पहली सम संख्या = 2 × 1 = 2
दूसरी सम संख्या = 2 × 2 = 4
पाँचवीं सम संख्या = 2 × 5 = 10
तेइसवीं सम संख्या = 2 × 23 = 46
ऐसा क्यों होता है: सम संख्याएँ ठीक 2 के गुणज हैं, और 2 का nवाँ गुणज 2 × n होता है।
प्र8.
100वीं विषम संख्या क्या है?
उत्तर

100वीं विषम संख्या 199 है।

100वीं सम संख्या = 2 × 100 = 200
प्रत्येक स्थान पर विषम संख्या, सम संख्या से एक कम होती है —
सम: 2, 4, 6, 8, 10, …
विषम: 1, 3, 5, 7,  9, …
100वीं विषम संख्या = 200 – 1 = 199
ऐसा क्यों होता है: दोनों अनुक्रम स्थान-दर-स्थान साथ चलते हैं और विषम अनुक्रम सदैव ठीक 1 पीछे रहता है — इसीलिए 2n तथा 2n – 1 nवीं सम और विषम संख्या देते हैं।
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