प्र1.
विषम और सम संख्याओं के चित्रीय निरूपणों की अपनी समझ का उपयोग करते हुए निम्नलिखित में से प्रत्येक योग की समानता ज्ञात कीजिए — (a) 2 सम संख्याओं और 2 विषम संख्याओं का योग (सम + सम + विषम + विषम) (b) 2 विषम संख्याओं और 3 सम संख्याओं का योग (c) 5 सम संख्याओं का योग (d) 8 विषम संख्याओं का योग
उत्तर
सम संख्याएँ केवल पूर्ण युग्म लाती हैं। शेष बिंदु केवल विषम संख्याएँ लाती हैं, अत: केवल यह गिनिए कि विषम संख्याएँ कितनी हैं।
| योग | विषम संख्याओं की गिनती | शेष बिंदु | समानता | |
|---|---|---|---|---|
| (a) | 2 सम + 2 विषम | 2 (सम गिनती) | पूरे युग्म बन जाते हैं | सम |
| (b) | 2 विषम + 3 सम | 2 (सम गिनती) | पूरे युग्म बन जाते हैं | सम |
| (c) | 5 सम | 0 | कोई नहीं | सम |
| (d) | 8 विषम | 8 (सम गिनती) | पूरे युग्म बन जाते हैं | सम |
चारों योग सम हैं।
(a) 4 + 6 + 3 + 5 = 18 सम
(b) 3 + 5 + 2 + 4 + 6 = 20 सम
(c) 2 + 4 + 6 + 8 + 10 = 30 सम
(d) 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 = 64 सम
(b) 3 + 5 + 2 + 4 + 6 = 20 सम
(c) 2 + 4 + 6 + 8 + 10 = 30 सम
(d) 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 = 64 सम
ऐसा क्यों होता है: सम संख्याएँ युग्मन को बिगाड़ती नहीं हैं। पूरे योग की समानता केवल इस पर निर्भर करती है कि विषम संख्याएँ कितनी हैं — सम गिनती → सम योग, विषम गिनती → विषम योग।