गणित प्रकाश अध्याय 6 पता लगाइए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
1 से 9 तक की संख्याओं के उपयोग से कितने भिन्न-भिन्न जादुई वर्ग बनाए जा सकते हैं?
उत्तर

वस्तुत: केवल एक जादुई वर्ग है। यदि घुमाव और दर्पण प्रतिबिंब अलग गिने जाएँ तो 8 होते हैं।

816
357
492
घुमाव: 4 (0°, 90°, 180°, 270°)
प्रत्येक घुमाव का एक दर्पण प्रतिबिंब भी: 4 × 2 = 8 ग्रिड
परंतु आठों एक ही वर्ग के भिन्न दृश्य हैं।
ऐसा क्यों होता है: हम सिद्ध कर चुके हैं कि केंद्र पर 5 आना ही चाहिए तथा 1 और 9 आमने-सामने के मध्य-खानों में आने चाहिए। इन दो तथ्यों के बाद कागज़ घुमाने या दर्पण में देखने के अतिरिक्त कोई स्वतंत्रता शेष नहीं रहती।
प्र2.
2 से 10 तक की संख्याओं के उपयोग से एक जादुई वर्ग की रचना कीजिए। ऐसा करने के लिए आप कौन-सी युक्ति अपनाएँगे? इसकी तुलना 1 से 9 तक की संख्याओं से बनाए गए जादुई वर्गों से कीजिए।
उत्तर

युक्ति: 2 से 10 तक की संख्याएँ 1 से 9 तक की संख्याओं में 1 जोड़ने से ही बनती हैं। अत: 1 – 9 वाले जादुई वर्ग के प्रत्येक खाने में 1 जोड़ दीजिए

1 – 9 वाला जादुई वर्गप्रत्येक में 1 जोड़िए2 – 10 वाला जादुई वर्ग
8   1   69   2   7
3   5   74   6   8
4   9   25   10   3
पंक्तियाँ: 9 + 2 + 7 = 18,   4 + 6 + 8 = 18,   5 + 10 + 3 = 18
स्तंभ: 9 + 4 + 5 = 18,   2 + 6 + 10 = 18,   7 + 8 + 3 = 18
विकर्ण: 9 + 6 + 3 = 18,   7 + 6 + 5 = 18
जादुई योग = 15 + 3 × 1 = 18
तुलना: रचना ठीक वैसी ही है। अब केंद्र 6 है (2 – 10 की मध्य संख्या) तथा जादुई योग 3 बढ़ गया, क्योंकि प्रत्येक रेखा की तीनों संख्याओं में 1-1 जुड़ा
प्र3.
एक जादुई वर्ग लीजिए तथा (a) प्रत्येक संख्या में 1 की वृद्धि कीजिए। (b) प्रत्येक संख्या को दुगुना कीजिए। क्या प्रत्येक स्थिति में परिणामी ग्रिड भी एक जादुई वर्ग है? प्रत्येक स्थिति में जादुई योग में किस प्रकार का परिवर्तन होता है?
उत्तर

हाँ — दोनों स्थितियों में परिणामी ग्रिड भी जादुई वर्ग है। 8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 से आरंभ कीजिए, जिसका जादुई योग 15 है।

(a) प्रत्येक संख्या में 1 की वृद्धि

927
468
5103
प्रत्येक रेखा में 1 + 1 + 1 = 3 की वृद्धि होती है।
नया जादुई योग = 15 + 3 = 18

(b) प्रत्येक संख्या को दुगुना

16212
61014
8184
प्रत्येक रेखा दुगुनी हो जाती है।
नया जादुई योग = 15 × 2 = 30
जाँच: 16 + 2 + 12 = 30,   6 + 10 + 14 = 30,   8 + 18 + 4 = 30  ✓
ऐसा क्यों होता है: नौ खानों में एक ही संख्या k जोड़ने पर प्रत्येक रेखा 3k से बढ़ती है; नौ खानों को k से गुणा करने पर प्रत्येक रेखा k गुना हो जाती है। सभी रेखाएँ एक ही प्रकार बदलती हैं, अत: वे बराबर बनी रहती हैं और ग्रिड जादुई बना रहता है।
प्र4.
एक जादुई वर्ग पर अन्य कौन-कौन सी संक्रियाएँ की जा सकती हैं ताकि एक अन्य जादुई वर्ग प्राप्त हो जाए?
उत्तर
संक्रियाक्या जादुई रहेगा?नया जादुई योग (पुराना योग S)
प्रत्येक खाने में k जोड़नाहाँS + 3k
प्रत्येक खाने में से k घटानाहाँS – 3k
प्रत्येक खाने को k से गुणा करनाहाँk × S
प्रत्येक खाने को k से भाग देना (k ≠ 0)हाँS ÷ k
ग्रिड को 90°, 180° या 270° घुमानाहाँS (अपरिवर्तित)
ग्रिड का दर्पण प्रतिबिंब लेनाहाँS (अपरिवर्तित)
केवल दो संख्याओं की अदला-बदलीप्राय: नहींरेखाएँ बराबर नहीं रहतीं
ऐसा क्यों होता है: कोई संक्रिया वर्ग को तभी जादुई बनाए रखती है जब वह प्रत्येक खाने के साथ एक जैसा व्यवहार करे। जोड़ना, घटाना, गुणा, भाग तथा घुमाना — सभी ऐसा ही करते हैं; केवल एक-दो खाने बदलना नहीं।
प्रयास कीजिए: 8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 को 3 से गुणा कीजिए — 24 3 18 / 9 15 21 / 12 27 6 प्राप्त होता है, जिसका जादुई योग 45 है।
प्र5.
किन्हीं भी 9 क्रमागत संख्याओं के संग्रह के उपयोग से (जैसे 2 – 10, 3 – 11, 9 – 17, इत्यादि) एक जादुई वर्ग की रचना करने की विधियों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर

1 – 9 वाला जादुई वर्ग लीजिए और प्रत्येक खाने में एक ही संख्या जोड़ दीजिए। जोड़ी जाने वाली संख्या = (नए संग्रह की सबसे छोटी संख्या) – 1।

9 क्रमागत संख्याओं का संग्रह1 – 9 वर्ग के प्रत्येक खाने में जोड़िएकेंद्रजादुई योग
1 – 90515
2 – 101618
3 – 112721
9 – 1781339

9 – 17 के लिए प्रत्येक खाने में 8 जोड़ने पर —

16914
111315
121710
पंक्तियाँ: 16 + 9 + 14 = 39,  11 + 13 + 15 = 39,  12 + 17 + 10 = 39 ✓
स्तंभ: 16 + 11 + 12 = 39,  9 + 13 + 17 = 39,  14 + 15 + 10 = 39 ✓
विकर्ण: 16 + 13 + 10 = 39,  14 + 13 + 12 = 39 ✓
ऐसा क्यों होता है: नौ क्रमागत संख्याओं के बीच का अंतर-प्रतिरूप 1 – 9 जैसा ही होता है — प्रत्येक संख्या एक निश्चित मात्रा से बड़ी है। मध्य संख्या सदैव केंद्र में आती है और जादुई योग = 3 × केंद्र होता है।
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