गणित प्रकाश अध्याय 6 पता लगाइए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक विद्युत बल्ब जला हुआ (On) है। दिनेश इसके बटन को 77 बार दबाता है। क्या यह बल्ब अब जला हुआ (On) होगा या बंद (Off) होगा? ऐसा क्यों?
उत्तर

बल्ब बंद (Off) होगा।

प्रत्येक बार बटन दबाने पर अवस्था बदलती है: On → Off → On → Off …
सम बार दबाने के बाद बल्ब पुन: On रहता है।
विषम बार दबाने के बाद बल्ब Off रहता है।
77 विषम है → बल्ब Off होगा।
कितनी बार दबाया0123477
अवस्थाOnOffOnOffOnOff
ऐसा क्यों होता है: “On → Off” और “Off → On” दो दबाव एक-दूसरे को ठीक बिंदुओं के युग्म की तरह काट देते हैं। 77 दबावों से 38 ऐसे युग्म बनते हैं और एक दबाव शेष रह जाता है, जो बल्ब को बंद कर देता है।
प्र2.
ललिता के पास एक बड़ा प्राचीन विश्वकोश है। जब वह इसे खोलती है तब इसके अनेक खुले पृष्ठ गिर जाते हैं। वह कुल 50 पृष्ठ गिनती है जो दोनों ओर छपे हुए हैं। क्या इन खुले पृष्ठों की संख्याओं का योग 6000 हो सकता है? यदि हाँ, तो क्यों अथवा नहीं, तो क्यों नहीं?
उत्तर

समानता की जाँच से हाँ लगता है, परंतु गहराई से देखने पर उत्तर नहीं है — योग ठीक 6000 कभी नहीं हो सकता।

चरण 1 — समानता की जाँच। प्रत्येक पृष्ठ पर दो संख्याएँ होती हैं, एक विषम और एक सम।

एक पृष्ठ: विषम + सम = विषम
50 पृष्ठ: 50 विषम संख्याओं का योग
50 एक सम गिनती है → कुल योग सम होगा
6000 सम है, अत: समानता इसे असंभव नहीं बताती।

चरण 2 — गहराई से देखिए। यदि कोई पृष्ठ kवाँ पन्ना है तो उसकी दोनों संख्याएँ 2k – 1 तथा 2k होंगी।

एक पृष्ठ का योग = (2k – 1) + 2k = 4k – 1
50 पृष्ठों का योग = 4 × (k1 + k2 + … + k50) – 50
यदि यह 6000 हो:   4 × (k का योग) = 6050
k का योग = 6050 ÷ 4 = 1512.5 — यह पूर्ण संख्या नहीं है!

अत: 50 पृष्ठों का योग 6000 नहीं हो सकता। यह योग 4 से भाग देने पर सदैव शेषफल 2 देता है, जबकि 6000 शेषफल 0 देता है।

ऐसा क्यों होता है: समानता की जाँच एक अच्छी पहली छलनी है, परंतु वह केवल 2 से विभाज्यता देखती है। 4 से विभाज्यता की जाँच अधिक तीक्ष्ण है और इस प्रश्न का निर्णय कर देती है।
स्वयं जाँचिए: 6000 के निकट संभव योग 5998 और 6002 हैं — दोनों 4 से भाग देने पर शेषफल 2 देते हैं।
प्र3.
यहाँ चित्र में एक 2 × 3 का ग्रिड दिया गया है। प्रत्येक पंक्ति और स्तंभ के लिए योग की समानता घेरे में लिखी हुई है। ‘e’ सम संख्या के लिए है तथा ‘o’ विषम संख्या के लिए है। इन बक्सों को 3 विषम संख्याओं (o) तथा 3 सम संख्याओं (e) से इस प्रकार भरिए कि पंक्ति और स्तंभों के योग की समानता संतुष्ट हो जाए।
उत्तर

घेरे इस प्रकार हैं — पंक्ति 1 → o, पंक्ति 2 → e, स्तंभ 1 → e, स्तंभ 2 → e, स्तंभ 3 → o

एक संभावित व्यवस्था —

स्तंभ 1स्तंभ 2स्तंभ 3पंक्ति योगअपेक्षित
पंक्ति 11247o  ✓
पंक्ति 236514e  ✓
स्तंभ योग489
अपेक्षितe  ✓e  ✓o  ✓

प्रयुक्त विषम संख्याएँ — 1, 3, 5 (तीन)। प्रयुक्त सम संख्याएँ — 2, 4, 6 (तीन)। ✓

समानता के रूप में यह प्रतिरूप है —

पंक्ति 1:  वि   स   स  → वि + स + स = विषम
पंक्ति 2:  वि   स   वि  → वि + स + वि = सम
स्तंभ 1: वि + वि = सम ✓   स्तंभ 2: स + स = सम ✓   स्तंभ 3: स + वि = विषम ✓
प्रयास कीजिए: एक और प्रतिरूप भी चलता है — पंक्ति 1 में स, वि, स तथा पंक्ति 2 में स, वि, वि; जैसे 2, 1, 4 और 6, 3, 5।
प्र4.
जादुई योग 0 वाला एक 3 × 3 जादुई वर्ग बनाइए। सभी संख्याएँ शून्य नहीं हो सकती हैं। आवश्यकतानुसार ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग कीजिए।
उत्तर

जादुई योग = 3m है, अत: व्यापकीकृत रूप में m = 0 रखिए।

3– 41
– 202
– 14– 3
पंक्तियाँ: 3 – 4 + 1 = 0,  –2 + 0 + 2 = 0,  –1 + 4 – 3 = 0 ✓
स्तंभ: 3 – 2 – 1 = 0,  –4 + 0 + 4 = 0,  1 + 2 – 3 = 0 ✓
विकर्ण: 3 + 0 – 3 = 0,  1 + 0 – 1 = 0 ✓
ऐसा क्यों होता है: नौ संख्याएँ – 4, – 3, – 2, – 1, 0, 1, 2, 3, 4 हैं — 0 को मध्य में रखकर नौ क्रमागत संख्याएँ। प्रत्येक संख्या के साथ उसकी विपरीत संख्या भी है, अत: सभी रेखाएँ शून्य हो जाती हैं।
संकेत: इसे शीघ्र प्राप्त करने का तरीका — 8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 के प्रत्येक खाने में से 5 घटा दीजिए।
प्र5.
निम्नलिखित रिक्त स्थानों को ‘विषम’ या ‘सम’ से भरिए — (a) विषम संख्या में सम संख्याओं का योग _____ होता है। (b) सम संख्या में विषम संख्याओं का योग _____ होता है। (c) सम संख्या में सम संख्याओं का योग _____ होता है। (d) विषम संख्या में विषम संख्याओं का योग _____ होता है।
उत्तर
योगउत्तरउदाहरण
(a)विषम संख्या में सम संख्याओं का योगसम2 + 4 + 6 = 12
(b)सम संख्या में विषम संख्याओं का योगसम1 + 3 + 5 + 7 = 16
(c)सम संख्या में सम संख्याओं का योगसम2 + 4 = 6
(d)विषम संख्या में विषम संख्याओं का योगविषम1 + 3 + 5 = 9
ऐसा क्यों होता है: सम संख्याएँ कभी कोई बिंदु शेष नहीं छोड़तीं, अत: चाहे कितनी भी जोड़िए, योग सम ही रहता है — इससे (a) और (c) तय हो जाते हैं। प्रत्येक विषम संख्या एक शेष बिंदु छोड़ती है; ये शेष बिंदु दो-दो करके कट जाते हैं, अत: सम गिनती पर योग सम (b) और विषम गिनती पर एक बिंदु बच जाने से योग विषम (d) होता है।
प्र6.
1 से 100 तक की संख्याओं के योग की समानता क्या है?
उत्तर

योग सम है।

1 से 100 तक 50 विषम संख्याएँ (1, 3, 5, …, 99) तथा 50 सम संख्याएँ हैं।
50 सम संख्याओं का योग सम होगा।
50 विषम संख्याएँ = विषम संख्याओं की सम गिनती → योग सम।
सम + सम = सम

वास्तविक मान से जाँच —

1 + 2 + 3 + … + 100 = (1 + 100) × 100 ÷ 2 = 101 × 50 = 5050 — सम ✓
संकेत: समानता 5050 की गणना किए बिना ही ज्ञात हो गई — केवल यह गिनकर कि विषम संख्याएँ कितनी हैं।
प्र7.
विरहांक अनुक्रम में दो क्रमागत संख्याएँ 987 और 1597 हैं। इस अनुक्रम की अगली दो संख्याएँ तथा पिछली दो संख्याएँ क्या हैं?
उत्तर

अगली दो: 2584 और 4181। पिछली दो: 610 और 377।

आगे बढ़ने के लिए (पिछली दो को जोड़िए) —
987 + 1597 = 2584
1597 + 2584 = 4181

पीछे जाने के लिए (घटाइए) —
1597 – 987 = 610
987 – 610 = 377

अत: अनुक्रम का यह भाग है —

…, 377, 610, 987, 1597, 2584, 4181, …
ऐसा क्यों होता है: नियम a + b = c को उल्टा पढ़ने पर cb = a मिलता है, अत: वही नियम दोनों दिशाओं में चलता है
स्वयं जाँचिए: 377 + 610 = 987 ✓ तथा 610 + 987 = 1597 ✓।
प्र8.
अंगद एक 8 पगों वाली सीढ़ी पर चढ़ना चाहता है। उसके खेल का एक नियम है कि एक समय पर वह 1 पग या 2 पग ही ले सकता है। उदाहरणार्थ, उसके पथों में से एक पथ 1, 2, 2, 1, 2 है। तो बताइए कि वह शीर्ष पर कितनी भिन्न विधियों से पहुँच सकता है?
उत्तर

अंगद शीर्ष पर 34 भिन्न विधियों से पहुँच सकता है।

n पगों वाली सीढ़ी12345678
विधियों की संख्या12358132134
विधियाँ(3) = विधियाँ(2) + विधियाँ(1) = 2 + 1 = 3
विधियाँ(4) = 3 + 2 = 5
विधियाँ(5) = 5 + 3 = 8
विधियाँ(6) = 8 + 5 = 13
विधियाँ(7) = 13 + 8 = 21
विधियाँ(8) = 21 + 13 = 34
ऐसा क्यों होता है: अंगद का अंतिम पग या तो 1 का होगा (तब वह 7वें पग पर था) या 2 का (तब वह 6ठे पग पर था)। ये दोनों स्थितियाँ कभी नहीं मिलतीं, अत: गिनतियाँ जुड़ जाती हैं — यही विरहांक नियम है। यह ठीक वही प्रश्न है जो 8 को 1 और 2 के योग के रूप में लिखने का था।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण 8 तालों की लय भी 34 ही होती हैं — कविता और सीढ़ी वस्तुत: एक ही पहेली के दो रूप हैं।
प्र9.
विरहांक अनुक्रम के 20वें पद की समानता क्या है?
उत्तर

20वाँ पद सम है।

समानता का प्रतिरूप: वि, स, वि, वि, स, वि, वि, स, वि, वि, स, …
पहले पद के बाद विषम, विषम, सम का खंड दोहराता है।
सम पद 2, 5, 8, 11, 14, 17, 20, … स्थानों पर आते हैं।
प्रत्येक अगला स्थान पिछले से 3 अधिक है, तथा 20 = 2 + 3 × 6 → 20वाँ पद सम है।

वास्तविक अनुक्रम से पुष्टि —

1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, 144, 233, 377, 610, 987, 1597, 2584, 4181, 6765, 10946
20वाँ पद 10946 है, जो सम है ✓
ऐसा क्यों होता है: समानता केवल पिछले दो पदों की समानताओं पर निर्भर करती है, अत: वह एक दोहराने वाले चक्र में बँध जाती है। यहाँ चक्र की लंबाई 3 है, अत: केवल यह देखना पर्याप्त है कि स्थान संख्या को 3 से भाग देने पर शेषफल क्या है
प्र10.
सत्य कथनों की पहचान कीजिए — (a) व्यंजक 4m – 1 से सदैव विषम संख्याएँ प्राप्त होती हैं। (b) सभी सम संख्याओं को 6j – 4 के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। (c) दोनों व्यंजक 2p + 1 और 2q – 1 सभी विषम संख्याओं का वर्णन करते हैं। (d) व्यंजक 2f + 3 सम और विषम दोनों संख्याओं को व्यक्त करता है।
उत्तर

केवल कथन (a) सत्य है।

कथनसत्य / असत्यकारण
(a)4m – 1 से सदैव विषम संख्याएँ प्राप्त होती हैंसत्य4m सदैव सम है और सम – 1 = विषम। मान: 3, 7, 11, 15, …
(b)सभी सम संख्याओं को 6j – 4 के रूप में लिखा जा सकता हैअसत्य6j – 4 से 2, 8, 14, 20, … मिलते हैं। 4, 6, 10, 12, 16, … छूट जाते हैं।
(c)2p + 1 और 2q – 1 दोनों सभी विषम संख्याओं का वर्णन करते हैंअसत्यअक्षर-संख्या 1, 2, 3, … लेने पर 2q – 1 से 1, 3, 5, … मिलते हैं, परंतु 2p + 1 से 3, 5, 7, … मिलते हैं और 1 छूट जाता है।
(d)2f + 3 सम और विषम दोनों संख्याएँ देता हैअसत्य2f सम है और 3 विषम, अत: 2f + 3 सदैव विषम है: 5, 7, 9, 11, …
ऐसा क्यों होता है: (b) में 6j – 4 = 2(3j – 2) है, अत: इससे केवल वही सम संख्याएँ मिलती हैं जिनका आधा 3j – 2 के रूप का हो — यह 6 के पगों में बढ़ता है और अधिकांश सम संख्याएँ छोड़ देता है। (d) में समानता बँधी हुई है — सम भाग और विषम भाग का योग सदैव विषम होता है।
संकेत: (c) में यदि अक्षर-संख्या को 0 भी लेने की छूट हो तो p = 0, 1, 2, … के लिए 2p + 1 से भी 1, 3, 5, … मिल जाते और कथन सत्य हो जाता। यहाँ हम पुस्तक का अनुसरण कर रहे हैं, जहाँ अक्षर-संख्या गणन संख्या 1, 2, 3, … को व्यक्त करती है।
प्र11.
निम्नलिखित क्रिप्टारिथम को हल कीजिए — UT + TA = TAT
उत्तर

U = 9, T = 1, A = 0, अर्थात 91 + 10 = 101।

स्थानीय मान की सहायता से लिखिए —
UT = 10U + T  •  TA = 10T + A  •  TAT = 100T + 10A + T = 101T + 10A

(10U + T) + (10T + A) = 101T + 10A
10U + 11T + A = 101T + 10A
10U = 90T + 9A
10U = 9 × (10T + A)

दाईं ओर 9 का गुणज है, अत: 10U भी 9 का गुणज होना चाहिए → U = 0 अथवा U = 9
U = 0 असंभव है (तब UT 2-अंकीय संख्या नहीं रहेगी), अत: U = 9।
90 = 9 × (10T + A) → 10T + A = 10 → T = 1, A = 0

जोड़ की जाँच —

  9 1
+ 1 0
——
1 0 1  
ऐसा क्यों होता है: दो 2-अंकीय संख्याओं को जोड़ने पर TAT 3-अंकीय उत्तर है, अत: उसका पहला अंक T केवल 1 का हासिल हो सकता है। T = 1 होते ही इकाई के स्तंभ से T + A का अंत T पर होना चाहिए, अर्थात 1 + A का अंत 1 पर हो, अत: A = 0 — और फिर U तुरंत मिल जाता है।
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