गणित प्रकाश अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आइए, दो कोणों को लें। मान लीजिए कि हम 60° और 70° के कोण लेते हैं जिनका योग 180° से कम है। मान लीजिए कि इसकी अंतर्गत भुजा 5 से.मी. है। तीसरे कोण का माप क्या हो सकता है? यदि आधार की लंबाई को बदलकर कोई अन्य मान कर दिया जाए, जैसे 7 से.मी. तो क्या इस माप में कोई परिवर्तन होगा? रचना कीजिए तथा पता लगाइए?
उत्तर

तीसरा कोण 50° है, और आधार बदलने पर भी वही रहता है।

तीसरा कोण = 180° – (60° + 70°)
= 180° – 130°
= 50°
आधार (अंतर्गत भुजा)सिरों पर कोणमापने पर तीसरा कोण
5 से.मी.60°, 70°50°
7 से.मी.60°, 70°50°
10 से.मी.60°, 70°50°
ऐसा क्यों होता है: आधार बदलने से त्रिभुज केवल बड़ा या छोटा होता है; भुजाओं की दिशाएँ वही रहती हैं, अत: उनसे बना कोना उतना ही खुला रहता है। आकार बदलता है, आकृति नहीं।
प्र2.
व्यापक रूप में देखें तो दो कोणों के निश्चित हो जाने पर क्या तीसरा कोण अंतर्गत भुजा की लंबाई पर निर्भर करता है? कोणों के भिन्न-भिन्न युग्म तथा भुजा की लंबाइयाँ लेकर प्रयास कीजिए।
उत्तर

नहीं। तीसरा कोण केवल दिए हुए दो कोणों पर निर्भर करता है।

दोनों कोणअंतर्गत भुजातीसरा कोण
45°, 80°3 से.मी.55°
45°, 80°8 से.मी.55°
30°, 30°4 से.मी.120°
30°, 30°9 से.मी.120°
हर पंक्ति में: तीसरा कोण = 180° – (दोनों दिए हुए कोणों का योग)
संकेत: यदि आपका माप एक-दो डिग्री अलग आए तो वह रचना की त्रुटि है, गणित की नहीं। पेंसिल नुकीली कीजिए और चाँदा ठीक ऊपर से पढ़िए।
प्र3.
विभिन्न त्रिभुजों के साथ यह देखने के लिए प्रयोग करने का प्रयास कीजिए कि क्या किन्हीं दो कोणों तथा तीसरे कोण के बीच कोई संबंध है। इस संबंध को ज्ञात करने के लिए आप कौन-से आँकड़ों का संग्रह करेंगे तथा इन संग्रहित आँकड़ों को किस प्रकार संगठित करेंगे?
उत्तर

तीनों कोणों की तीन-स्तंभी तालिका बनाइए और उसमें उनके योग का एक चौथा स्तंभ जोड़ दीजिए।

∠A∠B∠C∠A + ∠B + ∠C
60°70°50°180°
45°80°55°180°
90°30°60°180°
120°30°30°180°
60°60°60°180°

संबंध:

तीसरा कोण = 180° – (शेष दो का योग)
अर्थात ∠A + ∠B + ∠C = 180°
ऐसा क्यों होता है: केवल दो-दो कोण लिखने से पैटर्न छिपा रहता है; योग भी लिख देने पर वह तुरंत सामने आ जाता है, क्योंकि अंतिम स्तंभ में हर बार वही संख्या आती है। क्या-क्या तालिकाबद्ध करना है, यह चुनना ही आधी खोज है।
स्वयं जाँचिए: पाँच अलग-अलग तरह के त्रिभुज बनाइए — पतले, चौड़े, समकोण, अधिक कोण — और तालिका भरिए। अंतिम स्तंभ 180° ही रहेगा।
प्र4.
एक त्रिभुज ABC पर विचार कीजिए जिसमें ∠B = 50° और ∠C = 70° हैं। मान लीजिए कि हम शीर्ष A से होकर एक रेखा XY को आधार BC के समांतर खींचते हैं। हम देख सकते हैं कि यहाँ नए कोण बन गए हैं। ये कोण ∠XAB और ∠YAC हैं। इनके मान क्या हैं? क्या हम इससे ∠BAC ज्ञात कर सकते हैं?
उत्तर

∠XAB = 50°, ∠YAC = 70°, अत: ∠BAC = 60°।

X Y B C A 50° 70° 50° 70° 60°
XY, BC के समांतर है, अत: A पर बने बाहरी दोनों कोण ∠B तथा ∠C की नकल हैं।
XY ∥ BC तथा तिर्यक रेखा AB → ∠XAB = ∠B = 50° (एकांतर कोण)
XY ∥ BC तथा तिर्यक रेखा AC → ∠YAC = ∠C = 70° (एकांतर कोण)

∠XAB + ∠BAC + ∠YAC = 180° (ये A पर ऋजु कोण बनाते हैं)
50° + ∠BAC + 70° = 180°
120° + ∠BAC = 180°
इस प्रकार ∠BAC = 60°
ऐसा क्यों होता है: समांतर रेखा दोनों आधार कोणों को उठाकर शीर्ष A तक ले आती है, जहाँ वे ∠BAC के साथ एक ही सरल रेखा पर बैठ जाते हैं। ऋजु कोण 180° का होता है, अत: तीनों का योग 180° होना ही है — और यही कोण योग गुण है।
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