गणित प्रकाश अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक त्रिभुज ABC पर विचार कीजिए। शीर्ष A की सम्मुख भुजा BC से कितनी ऊँचाई है तथा इसे किस प्रकार मापा जा सकता है?
उत्तर

A से BC पर लम्ब डालिए और उसे मापिए। वही लम्ब ऊँचाई है।

मान लीजिए AD ⟂ BC है, जहाँ D भुजा BC पर है
AD की लंबाई = BC से शीर्ष A की ऊँचाई
रेखाखंड AD इस त्रिभुज का एक शीर्षलम्ब कहलाता है

शेष दो शीर्षलम्ब BE तथा CF हैं — B और C से उनकी अपनी सम्मुख भुजाओं पर खींचे गए लम्ब।

ऐसा क्यों होता है: 'ऊँचाई' का अर्थ सदैव सबसे छोटी दूरी होता है, और किसी बिंदु से किसी रेखा तक की सबसे छोटी दूरी लम्ब के अनुदिश ही नापी जाती है। A से BC तक कोई भी तिरछा रेखाखंड AD से लंबा होगा, अत: वह A की वास्तविक ऊँचाई नहीं बताएगा।
संकेत: जब भी त्रिभुज की ऊँचाई शब्द आता है तो उसका अर्थ उसी भुजा पर खींचे गए शीर्षलम्ब से होता है जिसे आधार माना गया है।
प्र2.
इस त्रिभुज में A से भुजा BC तक शीर्षलम्ब क्या होगा? (उस त्रिभुज में जिसमें B पर बना कोण अधिक कोण है)
उत्तर

लम्ब का पाद त्रिभुज के बाहर पड़ता है, अत: पहले BC को बढ़ाना पड़ता है।

A B C D शीर्षलम्ब
BC को B से आगे बढ़ाया गया है और A से डाला गया लम्ब उसी बढ़ी हुई रेखा पर D पर मिलता है।
BC को B से आगे बढ़ाइए
A से इस बढ़ी हुई रेखा पर लम्ब डालिए
लम्ब का पाद = D
AD ही A से BC पर शीर्षलम्ब है
ऐसा क्यों होता है: B पर कोण अधिक कोण है, अत: A आधार के सिरे से बाहर की ओर झुका हुआ है। BC वाली रेखा तो अब भी A के नीचे से गुज़रती है, केवल रेखाखंड BC नहीं गुज़रता। शीर्षलम्ब आधार की रेखा तक नापा जाता है, इसीलिए रेखा को बढ़ाकर लम्ब लिया जाता है।
प्र3.
कागज का एक त्रिभुजाकार टुकड़ा काटिए। तीनों भुजाओं में से किसी एक भुजा को आधार के रूप में निश्चित कीजिए। इसे इस प्रकार मोड़िए कि परिणामी मोड़ का चिह्न ऊपरी शीर्ष से आधार पर शीर्षलम्ब हो। इसका औचित्य दीजिए कि मोड़ के चिह्न को आधार पर लंब क्यों होना चाहिए?
उत्तर

इस प्रकार मोड़िए कि आधार के दोनों भाग ठीक एक-दूसरे पर आ जाएँ और मोड़ का चिह्न ऊपरी शीर्ष से होकर जाए।

  1. ΔABC काटिए और BC को आधार मानिए।
  2. कागज़ को ऐसे मोड़िए कि मोड़ A से होकर जाए तथा BC का एक भाग ठीक शेष भाग पर बैठ जाए।
  3. खोलिए। A से BC तक बना मोड़ का चिह्न ही शीर्षलम्ब है।

मोड़ का चिह्न लंब क्यों होता है:

मोड़ने पर आधार की रेखा स्वयं अपने ऊपर बैठ जाती है
चिह्न द्वारा BC के साथ बने दोनों कोण ठीक एक-दूसरे पर आ जाते हैं
अत: दोनों कोण बराबर हैं
वे एक सरल रेखा पर भी हैं, अत: मिलकर 180° बनाते हैं
प्रत्येक कोण = 180° ÷ 2 = 90°
ऐसा क्यों होता है: मोड़ एक दर्पण की तरह काम करता है। यदि किसी रेखा का एक भाग उसी के दूसरे भाग पर परावर्तित हो जाए तो मोड़ का चिह्न उसकी दर्पण-रेखा है, और दर्पण-रेखा जिसे परावर्तित करती है उससे सदैव समकोण पर मिलती है।
प्र4.
एक त्रिभुज की रचना कीजिए। BC को आधार लेते हुए शीर्षों को A, B और C से नामांकित कीजिए। A से भुजा BC पर शीर्षलम्ब खींचिए। क्या आप देख सकते हैं कि ऐसा कैसे किया जाता है?
उत्तर

मापक पर समकोणक सरकाकर — केवल मापक से 90° सटीक नहीं बनता।

  1. चरण 1: मापक को आधार BC के अनुदिश रखिए। समकोणक को मापक पर इस प्रकार रखिए कि समकोण के किनारों में से एक किनारा मापक को स्पर्श करे।
  2. चरण 2: समकोणक को मापक के अनुदिश तब तक सरकाइए जब तक कि उसका ऊर्ध्वाधर किनारा शीर्ष A को छू न ले।
  3. चरण 3: समकोणक के ऊर्ध्वाधर किनारे का उपयोग करते हुए A से होकर BC पर शीर्षलम्ब खींचिए।
ऐसा क्यों होता है: मापक BC की दिशा को स्थिर रखता है। समकोणक में समकोण पहले से बना होता है, अत: सरकते समय उसका ऊर्ध्वाधर किनारा BC पर सदैव लंब बना रहता है। सरकाने से किनारा केवल इधर-उधर खिसकता है, उसकी दिशा कभी नहीं बदलती
संकेत: यदि लम्ब का पाद रेखाखंड BC के बाहर पड़े तो पहले मापक से BC को बढ़ा लीजिए और फिर समकोणक सरकाइए।
प्र5.
क्या ऐसे किसी त्रिभुज का अस्तित्व है जिसमें एक भुजा भी एक शीर्षलम्ब हो? ऐसे त्रिभुज की कल्पना कीजिए तथा एक रफ आरेख खींचिए।
उत्तर

हाँ — समकोण त्रिभुज में। यदि ∠B = 90° हो तो AB स्वयं ही A से BC पर शीर्षलम्ब है।

A B C शीर्षलम्ब = भुजा AB
∠B = 90° होने पर भुजा AB पहले से ही BC पर लंब है, अत: वही A से शीर्षलम्ब है।
∠B = 90° → AB ⟂ BC
अत: A से BC पर शीर्षलम्ब स्वयं AB है
इसी प्रकार CB, C से AB पर शीर्षलम्ब है

एक समकोण वाले त्रिभुज समकोणीय त्रिभुज या केवल समकोण त्रिभुज कहलाते हैं।

ऐसा क्यों होता है: शीर्षलम्ब तो केवल शीर्ष से सम्मुख भुजा पर डाला गया लम्ब है। समकोण त्रिभुज में समकोण की दोनों भुजाएँ पहले से ही एक-दूसरे पर लंब हैं, अत: तीन में से दो शीर्षलम्ब त्रिभुज की भुजाएँ ही होती हैं। केवल तीसरा शीर्षलम्ब — समकोण वाले शीर्ष से सबसे बड़ी भुजा पर — खींचना पड़ता है।
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