गणित प्रकाश अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या तब त्रिभुजों का अस्तित्व सदैव ही होता है जब तीन लंबाइयों का एक समूह त्रिभुज असमिका को संतुष्ट करता है? हम इसके लिए किस प्रकार सुनिश्चित हो सकते हैं?
उत्तर

हाँ — और दोनों वृत्तों की संभावित स्थितियाँ देखकर हम इसके लिए सुनिश्चित हो सकते हैं।

आधार AB = सबसे बड़ी लंबाई लीजिए तथा A और B पर छोटी दोनों लंबाइयों की त्रिज्या वाले वृत्त खींचिए। केवल तीन बातें हो सकती हैं —

स्थितिचित्रसंबंधत्रिभुज?
स्थिति 1वृत्त एक बिंदु पर स्पर्श करते हैंदोनों त्रिज्याओं का योग = ABनहीं (सरल रेखा)
स्थिति 2वृत्त प्रतिच्छेद नहीं करतेदोनों त्रिज्याओं का योग < ABनहीं
स्थिति 3वृत्त परस्पर काटते हैंदोनों त्रिज्याओं का योग > ABहाँ
स्थिति 1: स्पर्श स्थिति 2: अलग स्थिति 3: प्रतिच्छेद
केवल स्थिति 3 — जहाँ वृत्त परस्पर कटते हैं — तीसरा शीर्ष देती है।
ऐसा क्यों होता है: त्रिभुज असमिका कहती है कि दोनों छोटी लंबाइयों का योग सबसे बड़ी लंबाई से अधिक है। चूँकि दोनों त्रिज्याएँ छोटी लंबाइयाँ हैं और AB सबसे बड़ी, यह ठीक स्थिति 3 की शर्त है। अत: असमिका का संतुष्ट होना वृत्तों को कटने पर विवश कर देता है और त्रिभुज बनना निश्चित हो जाता है।
प्र2.
स्थिति 2 — वृत्त आंतरिक रूप से प्रतिच्छेद नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति के घटित होने के लिए त्रिज्याओं और AB के बीच क्या संबंध होना चाहिए?
उत्तर

दोनों त्रिज्याएँ मिलकर AB से कम पड़नी चाहिए।

दोनों त्रिज्याओं का योग < AB
अर्थात दोनों छोटी लंबाइयों का योग < सबसे बड़ी लंबाई

चित्र में X वह बिंदु है जहाँ वृत्त A, AB को काटता है। XB की रिक्ति खाली रह जाती है क्योंकि दूसरा वृत्त इतना बड़ा नहीं कि X तक पहुँच सके।

ऐसा क्यों होता है: वृत्त A, AB के अनुदिश केवल अपनी त्रिज्या तक पहुँचता है; वृत्त B भी पीछे केवल अपनी त्रिज्या तक आता है। यदि ये दोनों पहुँचें एक-दूसरे को ढकें नहीं तो बीच में एक खाली पट्टी बची रह जाती है और कोई भी बिंदु दोनों वृत्तों पर नहीं होता।
प्र3.
क्या हम इस विश्लेषण का उपयोग यह बताने में कर सकते हैं कि एक त्रिभुज का अस्तित्व तब होता है जब इसकी लंबाइयाँ त्रिभुज असमिका को संतुष्ट करती हैं?
उत्तर

हाँ — यह विश्लेषण तर्क को पूरा कर देता है।

त्रिभुज असमिका संतुष्ट है
→ दोनों छोटी लंबाइयों का योग > सबसे बड़ी लंबाई
→ दोनों त्रिज्याओं का योग > AB
→ हम स्थिति 3 में हैं, वृत्त परस्पर कटते हैं
→ तीसरा शीर्ष प्राप्त होता है
त्रिभुज का अस्तित्व है

निष्कर्ष: यदि तीन लंबाइयों का दिया हुआ समूह त्रिभुज असमिका को संतुष्ट करता है तो उन भुजाओं वाले त्रिभुज का अस्तित्व होता है। यदि नहीं करता तो अस्तित्व नहीं होता।

ऐसा क्यों होता है: पहले हम केवल इतना जानते थे कि असमिका के विफल होने पर त्रिभुज नहीं बनता। तीन स्थितियों के अध्ययन ने बचा हुआ आधा भाग दे दिया — असमिका के संतुष्ट होने पर त्रिभुज बनता ही है। दोनों मिलकर एक संपूर्ण जाँच बन जाते हैं।
प्र4.
लंबाइयों के उस समूह के लिए दोनों वृत्त किस प्रकार के बनेंगे जो त्रिभुज असमिका को संतुष्ट नहीं करते हैं? ऐसी लंबाइयों के समूहों के तीन-तीन उदाहरण ज्ञात कीजिए जिनके लिए वृत्त — (a) परस्पर एक बिंदु पर स्पर्श करते हैं (b) परस्पर प्रतिच्छेद नहीं करते हैं।
उत्तर

वे स्थिति 1 या स्थिति 2 में आ जाते हैं।

(a) वृत्त एक बिंदु पर स्पर्श करते हैं — दोनों छोटी लंबाइयों का योग = सबसे बड़ी लंबाई —

समूहजाँच
3, 5, 83 + 5 = 8
2, 4, 62 + 4 = 6
5, 5, 105 + 5 = 10

(b) वृत्त प्रतिच्छेद नहीं करते — दोनों छोटी लंबाइयों का योग < सबसे बड़ी लंबाई —

समूहजाँच
2, 3, 82 + 3 = 5 < 8
1, 2, 101 + 2 = 3 < 10
4, 5, 124 + 5 = 9 < 12
ऐसा क्यों होता है: स्पर्श की स्थिति में मिलन बिंदु स्वयं AB पर ही पड़ता है, अत: A, B तथा वह बिंदु संरेख हो जाते हैं — बिना ऊँचाई वाला चपटा त्रिभुज। न कटने की स्थिति में तो कोई उभयनिष्ठ बिंदु ही नहीं होता।
प्र5.
एक संपूर्ण प्रक्रिया बनाइए जिसका उपयोग एक त्रिभुज के अस्तित्व की जाँच करने में किया जा सके।
उत्तर

तीन चरणों की ऐसी विधि जो कभी विफल नहीं होती।

  1. चरण 1: सुनिश्चित कीजिए कि तीनों लंबाइयाँ एक ही इकाई में हैं।
  2. चरण 2: सबसे बड़ी लंबाई छाँटिए। शेष दो को जोड़िए।
  3. चरण 3: तुलना कीजिए —
    • सबसे बड़ी < शेष दो का योग → त्रिभुज का अस्तित्व है
    • सबसे बड़ी = शेष दो का योग → तीनों बिंदु संरेख, त्रिभुज नहीं
    • सबसे बड़ी > शेष दो का योग → त्रिभुज नहीं
उदाहरण: 7, 9, 15
सबसे बड़ी = 15, शेष का योग = 7 + 9 = 16
15 < 16 → त्रिभुज का अस्तित्व है
संकेत: न परकार, न मापक, न कोई रचना — एक जोड़ और एक तुलना से उत्तर मिल जाता है।
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