ऐसा क्यों होता है: 45° + 80° = 125°, जो 180° से कम है, अत: दोनों भुजाएँ एक-दूसरे की ओर झुकती हैं। झुकी हुई रेखाओं का मिलना निश्चित है और जहाँ वे मिलती हैं वही एकमात्र संभव तीसरा शीर्ष है — इसलिए यहाँ भी ठीक एक ही त्रिभुज बनता है।
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