गणित प्रकाश अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या दो कोणों और उनकी अंतर्गत भुजाओं के प्रत्येक संयोजन के लिए त्रिभुज बन सकते हैं? पता लगाइए।
उत्तर

नहीं। यदि दोनों दिए हुए कोण बहुत बड़े हों तो दोनों भुजाएँ कभी मिलती ही नहीं।

दोनों कोणयोगभुजाएँ क्या करती हैंत्रिभुज?
45°, 80°125°एक-दूसरे की ओर झुकती हैंहाँ
90°, 90°180°दोनों सीधी ऊपर जाती हैं — समांतरनहीं
100°, 95°195°एक-दूसरे से दूर झुकती हैंनहीं
ऐसा क्यों होता है: दोनों भुजाएँ तभी मिलती हैं जब वे मिलकर भीतर की ओर मुड़ें। यदि दोनों कोण 90° या उससे अधिक हों तो प्रत्येक भुजा या तो ऊर्ध्वाधर है या बाहर की ओर झुकी है, अत: वे केवल दूर ही होती जाएँगी। जैसे तीन लंबाइयों को एक जाँच पास करनी पड़ती है, वैसे ही दो कोणों को भी।
प्र2.
ऐसे दो कोणों और उनकी अंतर्गत भुजाओं के मापन के उदाहरण ज्ञात कीजिए जहाँ एक त्रिभुज की रचना संभव नहीं है।
उत्तर

ऐसा कोई भी युग्म काम देगा जिसका योग 180° तक पहुँच जाए, अंतर्गत भुजा चाहे कितनी भी हो।

मापदोनों कोणों का योगत्रिभुज?
90°, 5 से.मी., 90°180°नहीं — दोनों भुजाएँ समांतर
110°, 4 से.मी., 95°205°नहीं
40°, 6 से.मी., 150°190°नहीं
120°, 7 से.मी., 60°180°नहीं
संकेत: यदि दोनों कोणों में से प्रत्येक समकोण (90°) से अधिक या उसके बराबर हो तो त्रिभुज स्पष्ट रूप से संभव नहीं है।
प्र3.
अब हम आधार कोणों में से एक को न्यून कोण 40° का कोण बनाते हैं। अन्य कोण के मान संभवतः क्या होने चाहिए ताकि ये रेखाएँ परस्पर न मिलें? (a) ऐसा घटित होने के लिए (ऊपर आकृति में अंकित) एक संभावित ∠B ज्ञात करने का प्रयास कीजिए। (b) इन रेखाओं के न मिलने के लिए ∠B का न्यूनतम मान क्या हो सकता है?
उत्तर

∠A = 40° होने पर B से जाने वाली रेखा को दाईं ओर पर्याप्त झुकना होगा।

(a) ∠B = 150° काम करता है — इसी प्रकार 145°, 160°, 170° भी। इनमें से किसी भी मान पर B से जाने वाली रेखा, A से खींची गई रेखा l से कभी नहीं मिलती।

(b) ऐसा न्यूनतम मान है ∠B = 140°

40° A B l m (∠B = 140°) l से मिलती है
B से होकर l के समांतर खींची गई रेखा m वह न्यूनतम ∠B बनाती है जिस पर रेखाएँ नहीं मिलतीं।
ऐसा क्यों होता है: B वाली भुजा जितनी दाईं ओर झुकती है, वह l को उतनी ही दूर जाकर काटती — और एक विशेष झुकाव पर वह समांतर हो जाती है तथा कभी काटती ही नहीं। यही समांतर स्थिति सबसे छोटा विफल ∠B देती है, और उससे बड़ा हर ∠B भी विफल ही रहता है।
प्र4.
क्या आप इस स्थिति में ∠B का वास्तविक मान बता सकते हैं? (संकेत— ध्यान दीजिए कि AB एक तिर्यक रेखा है।)
उत्तर

∠B = 140°।

B से होकर जाने वाली रेखा m, A से होकर जाने वाली रेखा l के समांतर है
AB तिर्यक रेखा है
∠A और ∠B तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंत:कोण हैं
अत: ∠A + ∠B = 180°
40° + ∠B = 180°
∠B = 140°
ऐसा क्यों होता है: यह समांतर रेखाओं का वही गुण है जो 'रेखाएँ एवं कोण' अध्याय में पढ़ा था। चूँकि सीमांत स्थिति ठीक समांतर वाली स्थिति है, इसलिए ∠B का सीमांत मान भी ठीक 180° में से दूसरे कोण को घटाकर मिलता है।
प्र5.
इसलिए ∠B के किन मानों के लिए एक त्रिभुज का अस्तित्व नहीं होगा? क्या लंबाई AB की इसमें कोई भूमिका है?
उत्तर

जब ∠B ≥ 140° हो तब त्रिभुज का अस्तित्व नहीं होगा, और लंबाई AB की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

∠A = 40°
त्रिभुज बनता है जब ∠A + ∠B < 180°, अर्थात ∠B < 140°
त्रिभुज नहीं बनता जब ∠B ≥ 140°

व्यापक रूप में, आधार कोणों ∠A तथा ∠B के लिए —

∠A + ∠B < 180° → त्रिभुज का अस्तित्व है
∠A + ∠B ≥ 180° → त्रिभुज का अस्तित्व नहीं है
ऐसा क्यों होता है: AB को लंबा या छोटा करने पर B वाली भुजा केवल इधर-उधर खिसकती है, उसकी दिशा नहीं बदलती। दो रेखाएँ केवल अपनी दिशाओं के कारण मिलती या नहीं मिलती हैं, इसलिए निर्णय केवल कोण करते हैं।
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