जब तीनों शीर्ष एक सरल रेखा पर स्थित होते हैं तब क्या होता है?
उत्तर
तब कोई त्रिभुज बनता ही नहीं। आकृति सिमटकर एक रेखाखंड बन जाती है।
जब A, B तथा C एक ही रेखा पर हों तो AB + BC = AC होता है और त्रिभुज का कोई अंदरूनी भाग नहीं बचता।
ऐसा क्यों होता है: त्रिभुज को कुछ क्षेत्र घेरना ही चाहिए। यदि B, रेखाखंड AC पर स्थित है तो 'भुजाएँ' AB एवं BC ठीक AC के ऊपर ही पड़ी रहती हैं, अत: AB + BC = AC। कुछ भी घिरता नहीं और B पर बना कोण 180° अर्थात एक ऋजु कोण हो जाता है, कोना नहीं। ऐसे तीन बिंदु संरेख कहलाते हैं।
प्र2.
एक ऐसे त्रिभुज की रचना कीजिए जिसकी सभी भुजाओं की लंबाई 4 से.मी. हो।
उत्तर
परकार का उपयोग कीजिए — केवल मापक से अनेक बार प्रयास करने पड़ेंगे।
मापक से AB = 4 से.मी. खींचिए।
केंद्र A तथा त्रिज्या 4 से.मी. लेकर AB के ऊपर एक लंबा चाप खींचिए।
केंद्र B तथा उसी त्रिज्या 4 से.मी. से दूसरा चाप खींचिए जो पहले चाप को C पर काटे।
AC और BC को मिलाइए। ΔABC वाँछित समबाहु त्रिभुज है।
4 से.मी. त्रिज्या के दोनों चाप ठीक C पर मिलते हैं, अत: AC = BC = AB = 4 से.मी.।
स्वयं जाँचिए: चाँदे से तीनों कोण मापिए। प्रत्येक कोण 60° का मिलेगा।
प्र3.
आपने इस त्रिभुज की रचना किस प्रकार की तथा आपने कौन-कौन से साधन उपयोग किए हैं? क्या यह रचना केवल एक मापक और एक पेंसिल के उपयोग से की जा सकती है?
उत्तर
हाँ, केवल मापक और पेंसिल से भी की जा सकती है — परंतु अनेक बार प्रयास करने पड़ते हैं।
AB = 4 से.मी. खींचिए ऐसा बिंदु C अंकित कीजिए कि AC = 4 से.मी. अब BC मापिए → प्राय: वह 4 से.मी. नहीं होती C को खिसकाइए और फिर मापिए … और फिर
ऐसा क्यों होता है: मापक एक बार में एक ही दूरी निश्चित करता है। AC = 4 से.मी. वाले बिंदु C असंख्य हैं और उनमें से केवल दो ऐसे हैं जिनके लिए BC भी 4 से.मी. है। उन्हें आँख से ढूँढ़ना धीमा काम है। परकार एक ही झटके में A से 4 से.मी. दूरी वाले सभी बिंदु दे देता है, इसीलिए रचना सटीक हो जाती है।
संकेत: प्रयुक्त साधन — आधार के लिए मापक, दोनों चापों के लिए परकार तथा मिलाने के लिए पेंसिल। चाँदे की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है।
प्र4.
हम इस रचना को किस प्रकार अधिक सक्षम बना सकते हैं?
उत्तर
अनुमान लगाने के स्थान पर परकार के दो चाप खींचिए।
A से 4 से.मी. त्रिज्या का चाप → इसका प्रत्येक बिंदु A से 4 से.मी. दूर है B से 4 से.मी. त्रिज्या का चाप → इसका प्रत्येक बिंदु B से 4 से.मी. दूर है इनका प्रतिच्छेद बिंदु C दोनों से 4 से.मी. दूर है
ऐसा क्यों होता है: यही युक्ति पिछली कक्षा में 'रचनाओं से खेलना' अध्याय में 'घर' के शीर्ष बिंदु को अंकित करने में प्रयुक्त हुई थी। एक चाप सही बिंदुओं का पूरा कुल दे देता है; दूसरा चाप उनमें से वही एक बिंदु छाँट लेता है जो दूसरी शर्त भी पूरी करता है। कोई प्रयास शेष नहीं रहता।
प्र5.
मान लीजिए कि C इन दोनों चापों का प्रतिच्छेद बिंदु है। यह रचना सुनिश्चित करती है कि AC और BC दोनों की ही लंबाई 4 से.मी. है। क्या आप बता सकते हैं कि ऐसा क्यों है?
उत्तर
क्योंकि C एक साथ दोनों चापों पर स्थित है।
C, केंद्र A तथा त्रिज्या 4 से.मी. वाले चाप पर है → AC = 4 से.मी. C, केंद्र B तथा त्रिज्या 4 से.मी. वाले चाप पर है → BC = 4 से.मी. और AB = 4 से.मी. पहले ही खींचा गया था अत: AB = BC = CA = 4 से.मी.
ऐसा क्यों होता है: वृत्त (या चाप) का प्रत्येक बिंदु अपने केंद्र से समान दूरी अर्थात त्रिज्या पर होता है। इसलिए चाप पर होना अपने आप में एक दूरी का कथन है। दो चापों पर होने का अर्थ है दो दूरी-शर्तों का एक साथ पूरा होना।
प्र6.
हम उन त्रिभुजों की रचना किस प्रकार करते हैं जो समबाहु नहीं हैं?
उत्तर
वही दो-चाप वाली विधि चलती है — केवल दोनों त्रिज्याएँ अब भिन्न होती हैं।
तीनों लंबाइयों में से किसी एक को आधार मानकर खींचिए।
एक सिरे से दूसरी लंबाई की त्रिज्या का चाप खींचिए।
दूसरे सिरे से तीसरी लंबाई की त्रिज्या का चाप खींचिए।
प्रतिच्छेद बिंदु को दोनों सिरों से मिलाइए।
संकेत:सबसे लंबी भुजा को आधार चुनने पर दोनों चाप अच्छे कोण पर कटते हैं, जिससे तीसरा शीर्ष स्पष्ट रूप से अंकित होता है।
प्र7.
एक ऐसे त्रिभुज की रचना कीजिए जिसकी भुजाओं की लंबाई 4 से.मी., 5 से.मी. और 6 से.मी. हो।
उत्तर
AB = 4 से.मी. को आधार लीजिए, AC = 5 से.मी. तथा BC = 6 से.मी.।
चरण 1: AB = 4 से.मी. खींचिए।
चरण 2: केंद्र A लेकर 5 से.मी. त्रिज्या का पर्याप्त लंबा चाप खींचिए।
चरण 3: केंद्र B लेकर 6 से.मी. त्रिज्या का चाप इस प्रकार खींचिए कि वह पहले चाप को काटे।
चरण 4: प्रतिच्छेद बिंदु को C कहिए। AC और BC मिलाकर ΔABC प्राप्त कीजिए।
आधार 4 से.मी.; A से 5 से.मी. का चाप तथा B से 6 से.मी. का चाप C पर मिलते हैं।
स्वयं जाँचिए: 4 < 5 + 6, 5 < 4 + 6 तथा 6 < 4 + 5, अत: दोनों चापों का मिलना निश्चित है। यही त्रिभुज असमिका है जो कुछ पृष्ठ आगे मिलेगी।
प्र8.
हम इस त्रिभुज की रचना अधिक सक्षमता से किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर
पूरे वृत्त मत खींचिए — दो छोटे चाप पर्याप्त हैं।
A से 5 से.मी. दूर के बिंदु → केंद्र A, त्रिज्या 5 से.मी. वाला वृत्त B से 6 से.मी. दूर के बिंदु → केंद्र B, त्रिज्या 6 से.मी. वाला वृत्त C = दोनों में उभयनिष्ठ बिंदु → केवल प्रतिच्छेद के पास के चाप ही चाहिए
ऐसा क्यों होता है: पूरा वृत्त आवश्यकता से कहीं अधिक जानकारी देता है। शीर्ष C वहीं है जहाँ दोनों वृत्त कटते हैं, अत: हमें केवल उसी क्षेत्र के छोटे टुकड़े खींचने होते हैं। कम रेखाएँ अर्थात स्वच्छ एवं अधिक सटीक आकृति।
क्या आप जानते हैं? दोनों वृत्त वास्तव में दो बिंदुओं पर कटते हैं — एक AB के ऊपर और एक नीचे। दोनों ही सही त्रिभुज देते हैं; वे रेखा AB में एक-दूसरे के प्रतिबिंब हैं।
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