प्र1.
निम्नलिखित लंबाइयों की भुजाओं वाले त्रिभुजों की रचना कीजिए (सभी इकाइयाँ से.मी. में हैं) — (a) 4, 4, 6 (b) 3, 4, 5 (c) 1, 5, 5 (d) 4, 6, 8 (e) 3.5, 3.5, 3.5
उत्तर
प्रत्येक स्थिति में सबसे लंबी भुजा को आधार खींचिए, फिर शेष दो लंबाइयों के चाप काटिए।
| समूह | आधार | दोनों सिरों से चाप | त्रिभुज का प्रकार |
|---|---|---|---|
| (a) 4, 4, 6 | 6 से.मी. | 4 से.मी. एवं 4 से.मी. | समद्विबाहु |
| (b) 3, 4, 5 | 5 से.मी. | 3 से.मी. एवं 4 से.मी. | विषमबाहु (समकोण) |
| (c) 1, 5, 5 | 5 से.मी. | 1 से.मी. एवं 5 से.मी. | समद्विबाहु (बहुत पतला) |
| (d) 4, 6, 8 | 8 से.मी. | 4 से.मी. एवं 6 से.मी. | विषमबाहु |
| (e) 3.5, 3.5, 3.5 | 3.5 से.मी. | 3.5 से.मी. एवं 3.5 से.मी. | समबाहु |
प्रत्येक समूह बनता है, क्योंकि हर बार सबसे बड़ी लंबाई अन्य दो के योग से कम है —
(a) 6 < 4 + 4 = 8 ✓
(b) 5 < 3 + 4 = 7 ✓
(c) 5 < 1 + 5 = 6 ✓
(d) 8 < 4 + 6 = 10 ✓
(e) 3.5 < 3.5 + 3.5 = 7 ✓
(b) 5 < 3 + 4 = 7 ✓
(c) 5 < 1 + 5 = 6 ✓
(d) 8 < 4 + 6 = 10 ✓
(e) 3.5 < 3.5 + 3.5 = 7 ✓
ऐसा क्यों होता है: दोनों चाप तभी मिलते हैं जब वे मिलकर आधार को 'पार' कर सकें। (c) में पहुँच 1 + 5 = 6 है जबकि आधार 5 है — केवल एक सेंटीमीटर की छूट, इसीलिए वह त्रिभुज लंबा-पतला बनता है और 1 से.मी. भुजा के सम्मुख कोण बहुत छोटा रहता है।
स्वयं जाँचिए: (b) के कोण मापिए। 37°, 53° तथा 90° मिलेंगे — एक समकोण त्रिभुज।