एक बक्से के एक कोने में एक मकड़ी बैठी है। वह सबसे अधिक दूरी वाले सम्मुख कोने (आकृति में चिह्नित) पर पहुँचना चाहती है। क्योंकि वह उड़ नहीं सकती है, इसलिए वह उस सम्मुख कोने तक उस बक्से की सतहों पर चलकर ही पहुँच सकती है। वह कौन-से सबसे छोटे मार्ग से होकर जा सकती है? एक गत्ते (कार्डबोर्ड) का बक्सा लीजिए तथा उस पर वह मार्ग चिह्नित कीजिए जो आपके अनुसार एक कोने से सम्मुख कोने तक पहुँचने में सबसे छोटा होगा। इस मार्ग की लंबाई की तुलना अपने मित्रों द्वारा चिह्नित मार्गों की लंबाइयों से कीजिए।
उत्तर
बक्से को खोलकर सपाट कीजिए। दो सटी हुई सतहों को एक ही तल में फैलाइए — तब उस सपाट चादर पर दोनों कोनों को मिलाने वाली सरल रेखा ही सबसे छोटा मार्ग है।
दो सतहों को खोलकर एक सपाट चादर बनाइए; लाल सरल रेखा कोरों वाले मार्ग से छोटी है।
मान लीजिए बक्सा घनाकार है जिसकी कोर a है। दो सतहें खोलने पर a ऊँचा तथा 2a चौड़ा आयत बनता है, अत: सीधा मार्ग उस आयत का विकर्ण है —
कोरों के अनुदिश मार्ग = a + a + a = 3a खुली चादर पर सीधा मार्ग = a × 2a आयत का विकर्ण = √(a² + (2a)²) = √(5a²) = a√5 ≈ 2.24a 2.24a < 3a → खोलकर पाया गया सीधा मार्ग छोटा है
यदि बक्से की लंबाई l, चौड़ाई b तथा ऊँचाई h हो तो खोलने के तीन तरीके होते हैं और उनमें से सबसे छोटा ही उत्तर है —
किस ओर से खोलें
आयत
मार्ग की लंबाई
चौड़ाई की ओर से
l × (b + h)
√(l² + (b + h)²)
ऊँचाई की ओर से
b × (l + h)
√(b² + (l + h)²)
लंबाई की ओर से
h × (l + b)
√(h² + (l + b)²)
ऐसा क्यों होता है: मकड़ी सतह पर ही चल सकती है, परंतु सतह को बिना खींचे सपाट किया जा सकता है — गत्ते पर बनी दूरियाँ खोलने से बदलती नहीं। सतहें सपाट होते ही वही पुराना नियम फिर लागू हो जाता है: दो बिंदुओं के बीच सरल रेखा सबसे छोटा मार्ग होती है। यह वही विचार है जिससे इस अध्याय के आरंभ में त्रिभुज असमिका मिली थी।
प्रयास करें: असली गत्ते के बक्से पर दोनों कोनों के बीच एक धागा सतह पर ही टिकाकर तानिए। फिर बक्से को एक कोर से काटकर सपाट कीजिए — धागा बिल्कुल सीधा पड़ा मिलेगा।
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