एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए जिसमें BC = 5 से.मी., AB = 6 से.मी. और CA = 5 से.मी. है। A से भुजा BC पर शीर्षलम्ब की रचना कीजिए।
उत्तर
पहले त्रिभुज असमिका जाँचिए, फिर रचना कीजिए और लम्ब डालिए।
सबसे बड़ी भुजा = 6 से.मी. 6 < 5 + 5 = 10 ✓ → त्रिभुज का अस्तित्व है
BC = 5 से.मी. खींचिए।
केंद्र B लेकर 6 से.मी. त्रिज्या का चाप खींचिए (यह AB है)।
केंद्र C लेकर 5 से.मी. त्रिज्या का चाप खींचिए (यह CA है), जो पहले चाप को A पर काटे।
AB तथा AC मिलाइए।
मापक को BC के अनुदिश रखिए, उस पर समकोणक तब तक सरकाइए जब तक उसका ऊर्ध्वाधर किनारा A को न छू ले, और AD ⟂ BC खींचिए।
BC = 5 से.मी., AB = 6 से.मी., CA = 5 से.मी. वाला ΔABC तथा BC पर खींचा गया शीर्षलम्ब AD।
स्वयं जाँचिए: CA = CB = 5 से.मी. है, अत: यह त्रिभुज C शीर्ष वाला समद्विबाहु त्रिभुज है। AD मापने पर लगभग 4.8 से.मी. मिलता है और D, BC के भीतर पड़ता है।
प्र2.
एक त्रिभुज TRY की रचना कीजिए जिसमें RY = 4 से.मी., TR = 7 से.मी. और ∠R = 140° है। T से भुजा RY पर शीर्षलम्ब की रचना कीजिए।
उत्तर
∠R, भुजाओं RY तथा TR के बीच का अंतर्गत कोण है, अत: कोण R पर बनाइए।
RY = 4 से.मी. खींचिए।
R पर RY के एक ओर 140° बनाती हुई एक भुजा खींचिए।
उस भुजा पर T इस प्रकार अंकित कीजिए कि TR = 7 से.मी. हो।
TY मिलाइए। ΔTRY वाँछित त्रिभुज है।
शीर्षलम्ब के लिए YR को R से आगे बढ़ाइए, फिर T से उस बढ़ी हुई रेखा पर लम्ब डालिए; उसका पाद D कहिए। TD ही शीर्षलम्ब है।
∠R = 140° अधिक कोण है, अत: T से खींचे गए शीर्षलम्ब का पाद D रेखाखंड RY के बाहर पड़ता है।
ऐसा क्यों होता है: ∠R = 140° अधिक कोण है, इसलिए T, R से आगे की ओर झुका हुआ है। अत: T से डाला गया लम्ब YR की बढ़ी हुई रेखा पर गिरता है, स्वयं रेखाखंड RY पर नहीं — ठीक वही स्थिति जो पृष्ठ 168 पर पढ़ी थी।
प्र3.
एक समकोण त्रिभुज ABC की रचना कीजिए जिसमें ∠B = 90° और AC = 5 से.मी. है। इन मापनों के कितने भिन्न-भिन्न त्रिभुज हो सकते हैं? (संकेत— ध्यान दीजिए कि अन्य मापन कोई भी मान ग्रहण कर सकते हैं। AC को आधार लीजिए। ∠A और ∠C के क्या-क्या मान ले सकते हैं ताकि अन्य कोण 90° का हो?)
उत्तर
इन दोनों शर्तों पर असंख्य भिन्न-भिन्न त्रिभुज खरे उतरते हैं।
∠A + ∠B + ∠C = 180° ∠A + 90° + ∠C = 180° ∠A + ∠C = 90° अत: ऐसा कोई भी युग्म चलेगा जिसमें ∠A + ∠C = 90° हो
∠A
∠C
∠B
मान्य?
30°
60°
90°
हाँ
45°
45°
90°
हाँ (समद्विबाहु)
10°
80°
90°
हाँ
72.5°
17.5°
90°
हाँ
एक त्रिभुज की रचना: AC = 5 से.मी. खींचिए, 0° और 90° के बीच कोई भी ∠A चुनिए, ∠C = 90° – ∠A बनाइए, और दोनों भुजाओं को B पर मिलने दीजिए।
AC को व्यास मानकर खींचे गए वृत्त पर B की हर स्थिति B पर समकोण देती है।
ऐसा क्यों होता है: AC तथा ∠B = 90° निश्चित करने पर भी आकृति स्वतंत्र रह जाती है। समकोण वाला शीर्ष B, AC को व्यास मानकर खींचे गए वृत्त पर कहीं भी बैठ सकता है और हर स्थिति एक सचमुच भिन्न त्रिभुज देती है — अत: ऐसे असंख्य त्रिभुज हैं, जिनमें 5 से.मी. वाली भुजा उभयनिष्ठ है।
प्र4.
रचना के माध्यम से पता लगाइए कि क्या एक ऐसे समबाहु त्रिभुज की रचना संभव है जिसमें (i) एक समकोण हो और (ii) एक अधिक कोण हो। साथ ही ऐसे समद्विबाहु त्रिभुज की भी रचना कीजिए जिसमें (i) एक समकोण हो और (ii) एक अधिक कोण हो।
उत्तर
समबाहु: दोनों ही असंभव हैं। समद्विबाहु: दोनों ही संभव हैं।
(i) समबाहु तथा समकोण — असंभव
तीनों कोण बराबर → प्रत्येक = 180° ÷ 3 = 60° 60° ≠ 90° → कोई समकोण बन ही नहीं सकता
(ii) समबाहु तथा अधिक कोण — असंभव
प्रत्येक कोण 60° का है और 60° < 90° अत: समबाहु त्रिभुज सदैव न्यून कोण त्रिभुज ही होता है
समद्विबाहु तथा समकोण — संभव
∠B = 90° लीजिए तथा बराबर भुजाएँ AB = BC तब ∠A = ∠C = (180° – 90°) ÷ 2 = 45° कोण: 90°, 45°, 45°
रचना: ∠B = 90° बनाइए, दोनों भुजाओं पर AB = BC = 4 से.मी. अंकित कीजिए और AC मिलाइए।
समद्विबाहु तथा अधिक कोण — संभव
शीर्ष कोण 120° लीजिए तब दोनों आधार कोण = (180° – 120°) ÷ 2 = प्रत्येक 30° कोण: 120°, 30°, 30°
रचना: ∠B = 120° बनाइए, दोनों भुजाओं पर BA = BC = 4 से.मी. लीजिए और AC मिलाइए।
ऐसा क्यों होता है: समबाहु त्रिभुज के तीनों कोण 60° पर बँधे रहते हैं, कोई छूट नहीं बचती। समद्विबाहु त्रिभुज केवल दो आधार कोणों को आपस में बराबर रखता है; शीर्ष कोण 90°, 120° या 180° से कम कुछ भी हो सकता है, इसलिए दोनों प्रकार बन जाते हैं।
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