मल्हार अध्याय 5 आज की पहेली

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
1. रोटी जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भरा / घी-तेल साथी हैं इसके, दही-चटनी से हरा-भरा
उत्तर

उत्तर — आलू का पराठा

संकेत कैसे मिले:
  • “रोटी जैसा होता है ये” → आटे से बना और तवे पर सिंकने वाला।
  • “पर आलू से भरा-भरा” → भरावन (स्टफिंग) में आलू — यही पराठे की पहचान है।
  • “घी-तेल साथी हैं इसके” → रोटी सूखी सिंकती है, पराठा घी या तेल लगाकर।
  • “दही-चटनी से हरा-भरा” → पराठा दही, अचार और हरी चटनी के साथ खाया जाता है।
जानकारी: पराठा पूरे उत्तर भारत का लोकप्रिय नाश्ता है। पंजाब में इसे मक्खन और लस्सी के साथ खाया जाता है।
प्र2.
2. दाल-चावल का मेल है यह तो, भारत भर में तुम इसे पाओ, / दक्षिण में ये खूब है बनता, चटनी-सांभर संग-संग खाओ, / गोल-तिकोना इसका आकार, गरम-गरम तुम इसे बनाओ, / कौन-सा व्यंजन होता है यह, बोलो बोलो नाम बताओ।
उत्तर

उत्तर — डोसा

संकेत कैसे मिले:
  • “दाल-चावल का मेल” → डोसे का घोल चावल और उड़द दाल को भिगोकर, पीसकर और खमीर उठाकर बनता है।
  • “दक्षिण में ये खूब है बनता” → यह दक्षिण भारत का प्रसिद्ध व्यंजन है।
  • “चटनी-सांभर संग-संग खाओ” → डोसा नारियल की चटनी और सांभर के साथ परोसा जाता है।
  • “गोल-तिकोना इसका आकार” → तवे पर फैलाने से गोल बनता है और मोड़ने पर तिकोना।
  • “गरम-गरम तुम इसे बनाओ” → डोसा तवे से उतरते ही खाया जाता है।
ध्यान दें: इडली भी दाल-चावल से बनती है, पर वह भाप में पकती है और केवल गोल होती है — “गोल-तिकोना” और “गरम-गरम बनाओ” वाला संकेत डोसे की ओर ही ले जाता है।
प्र3.
3. नाश्ते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट्र में इसका वास, / मिर्च-मसाले से भरपूर, संग बटाटा भी मशहूर, / चटपटी चटनी लगी किसे? बूझो नाम तो खाएँ इसे!
उत्तर

उत्तर — वड़ा पाव (जिसका मुख्य भाग बटाटा वड़ा है)

संकेत कैसे मिले:
  • “महाराष्ट्र में इसका वास” → यह महाराष्ट्र, खासकर मुंबई का सबसे लोकप्रिय नाश्ता है।
  • “संग बटाटा भी मशहूर” → मराठी में बटाटा का अर्थ है आलू; उबले आलू के मसालेदार गोले को बेसन में लपेटकर तला जाता है।
  • “चटपटी चटनी लगी” → लहसुन की सूखी चटनी और हरी चटनी लगाकर पाव के बीच रखा जाता है।
  • “नाश्ते का यह बड़ा है खास” → यहाँ ‘बड़ा’ शब्द का दोहरा प्रयोग है — बड़ा (महत्वपूर्ण) और वड़ा (व्यंजन)। पहेलियों में ऐसा शब्द-खेल खूब होता है।
प्र4.
4. बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात में बड़ा है बोल। / खाने में नर्म, पानी भरे, धनिया मिर्ची संग सजे।
उत्तर

उत्तर — ढोकला

संकेत कैसे मिले:
  • “बेसन से बने” → ढोकला बेसन (या चावल-चने की दाल) के घोल से बनता है।
  • “चौकोर या गोल” → थाली में भाप देकर जमाया जाता है, फिर चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है।
  • “गुजरात में बड़ा है बोल” → यह गुजरात का प्रसिद्ध व्यंजन है।
  • “खाने में नर्म, पानी भरे” → भाप में पकने और ऊपर से मीठा-नमकीन पानी छिड़कने के कारण यह स्पंज जैसा नर्म और रसीला होता है।
  • “धनिया मिर्ची संग सजे” → ऊपर से राई का तड़का, हरा धनिया, नारियल का बुरादा और हरी मिर्च सजाई जाती है।
अच्छी बात: ढोकला तला नहीं जाता, भाप में पकता है — इसलिए यह हल्का और सेहतमंद नाश्ता माना जाता है।
प्र5.
5. गोल-गोल पानी से भरके, चटनी सोंठ संग इसे खाओ / उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम, गली-मुहल्लों में भी पाओ। / खट्टी-मीठी, तीखी हाय, खाना तो इसे हर कोई चाहे!
उत्तर

उत्तर — गोलगप्पे (पानी पूरी / पुचका / फुचका / गुपचुप — जगह-जगह अलग नाम)

संकेत कैसे मिले:
  • “गोल-गोल पानी से भरके” → कुरकुरी गोल पूरी में छेद करके मसालेदार पानी भरा जाता है।
  • “चटनी सोंठ संग” → इमली-गुड़ की मीठी सोंठ की चटनी इसमें डाली जाती है।
  • “उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम, गली-मुहल्लों में भी पाओ” → पूरे भारत में मिलता है, हर जगह ठेले पर।
  • “खट्टी-मीठी, तीखी” → पुदीने का तीखा पानी, इमली की खटास और सोंठ की मिठास — तीनों स्वाद एक साथ।
नाम अनेक: दिल्ली में गोलगप्पे, मुंबई में पानी पूरी, कोलकाता में पुचका, ओडिशा में गुपचुप, मध्य प्रदेश में फुल्की — व्यंजन एक, नाम अनेक। कहानी में भी बच्चा “गोलगप्पे” याद करता है।
प्र6.
6. हरे साग संग मुझको पाओ, / मक्खन के संग मुझको खाओ। / आटा मेरा हल्का पीला, / स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला।
उत्तर

उत्तर — मक्के की रोटी (सरसों के साग के साथ)

संकेत कैसे मिले:
  • “हरे साग संग मुझको पाओ” → ‘सरसों दा साग ते मक्की दी रोटी’ — यह जोड़ी पंजाब में सबसे प्रसिद्ध है।
  • “मक्खन के संग मुझको खाओ” → इस पर सफेद घर का मक्खन रखकर खाया जाता है।
  • “आटा मेरा हल्का पीला” → मक्के (भुट्टे) का आटा पीले रंग का होता है — यही सबसे पक्का संकेत है।
  • “स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला” → सोंधा और अलग-सा स्वाद।
मौसम से जोड़िए: यह सर्दियों का भोजन है, क्योंकि सरसों का साग जाड़े में ही मिलता है और मक्के की रोटी शरीर को गरमी देती है। कहानी भी सर्दी के मौसम की ही है।
प्र7.
7. आग में पकती हूँ, सोंधा-सा स्वाद, / साथ में खाओ चूरमा, बन जाए फिर बात, / गरम दाल से मुझको प्यार, राजस्थान का मैं उपहार।
उत्तर

उत्तर — बाटी (यानी प्रसिद्ध दाल-बाटी-चूरमा की बाटी)

संकेत कैसे मिले:
  • “आग में पकती हूँ” → बाटी तवे पर नहीं बनती; उसे उपले या कोयले की आँच में, या तंदूर में सेंका जाता है।
  • “सोंधा-सा स्वाद” → सीधे आँच में सिंकने से ही यह सोंधापन आता है।
  • “साथ में खाओ चूरमा” → बाटी को कूटकर, घी-गुड़ या शक्कर मिलाकर चूरमा बनाया जाता है।
  • “गरम दाल से मुझको प्यार” → पंचमेल दाल के साथ परोसी जाती है।
  • “राजस्थान का मैं उपहार” → यह राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध पकवान है।
क्यों बनी होगी ऐसी: रेगिस्तान में पानी और ईंधन दोनों कम थे। बाटी बिना ज्यादा पानी के बनती है, आँच में सिंक जाती है और कई दिन खराब नहीं होती — इसलिए यह वहाँ के लिए सबसे उपयुक्त भोजन बनी।
प्र8.
8. गोल-गोल और श्वेत रंग का / रस से भरा हुआ हूँ खूब / मीठी दुनिया का महाराजा / चाशनी मीठी डूब-डूब।
उत्तर

उत्तर — रसगुल्ला

संकेत कैसे मिले:
  • “गोल-गोल और श्वेत रंग का” → छेने के सफेद, गोल गोले।
  • “रस से भरा हुआ हूँ खूब” → नाम में ही ‘रस’ है — रस + गुल्ला = रस से भरा गोला।
  • “चाशनी मीठी डूब-डूब” → यह हमेशा चाशनी में डूबा हुआ ही परोसा जाता है।
  • “मीठी दुनिया का महाराजा” → मिठाइयों में इसका विशेष स्थान है।
जानकारी: रसगुल्ला दूध फाड़कर बने छेने से बनता है और पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा — दोनों की पहचान है। गुलाब जामुन भी गोल और चाशनी में डूबा होता है, पर वह भूरे रंग का होता है — इसलिए “श्वेत रंग का” संकेत रसगुल्ले की ओर ही जाता है।
पहेली बूझने की तरकीब: हर पहेली में तीन तरह के संकेत होते हैं — सामग्री (बेसन, मक्के का आटा, दाल-चावल), प्रदेश (गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान) और खाने का ढंग (चटनी के साथ, चाशनी में, दाल के साथ)। तीनों मिलाकर उत्तर अपने आप निकल आता है।
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