मल्हार अध्याय 5 खान-पान और आप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कहानी में सुधाकर काका को बीमार होने पर साबूदाने की खीर दी गई थी। आपके घर में किसी के बीमार होने पर उसे क्या-क्या खिलाया जाता है?
उत्तर

बीमारी में आमतौर पर हल्का, कम मसाले वाला और आसानी से पचने वाला भोजन दिया जाता है। भारत के अलग-अलग घरों में ये चीजें दी जाती हैं —

प्रकारक्या-क्या दिया जाता है
हल्का भोजनमूँग दाल की खिचड़ी, दलिया, दाल का पानी, सादी रोटी और दही, साबूदाने की खीर या खिचड़ी।
तरलनीबू-नमक-चीनी का घोल, नारियल पानी, छाछ, गरम दूध में हल्दी, सूप।
घरेलू औषधिअदरक-तुलसी का काढ़ा, अजवाइन का पानी, शहद-अदरक, जीरे का पानी।
फलकेला, सेब, अनार, मौसमी का रस, पपीता।
क्या नहीं दिया जातातला-भुना, ज्यादा मिर्च-मसाला, बहुत ठंडी चीजें, बाजार का खाना।
नमूना उत्तर: “हमारे घर में कोई बीमार हो तो सबसे पहले मूँग दाल की खिचड़ी बनती है, जिसमें बस थोड़ा-सा नमक और घी डाला जाता है। दादी अदरक-तुलसी का काढ़ा बनाती हैं और दिन में दो बार नीबू-नमक का पानी दिया जाता है। पेट खराब होने पर दही-चावल और खाँसी होने पर हल्दी वाला दूध जरूर मिलता है।”
साबूदाना ही क्यों: साबूदाना जल्दी पच जाता है, उसमें मसाला नहीं होता और उससे तुरंत ऊर्जा मिलती है। इसीलिए वह बीमारी और व्रत — दोनों में खाया जाता है।
प्र2.
(ख) कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजें खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?
उत्तर

यह आपकी अपनी पसंद है। उत्तर को रोचक बनाने के लिए केवल नाम मत गिनाइए — बताइए कि कब और क्यों मन करता है, जैसे कहानी का बच्चा करता है।

नमूना उत्तर: “बारिश शुरू होते ही मेरा मन गरम पकौड़ों और अदरक वाली चाय का हो जाता है। सर्दी की धूप में मूँगफली और गुड़ खाने में जो मजा है, वह किसी और चीज में नहीं। स्कूल की छुट्टी के बाद ठेले पर मिलने वाले भेलपूरी और गोलगप्पे मुझे सबसे ज्यादा पसंद हैं। और अगर घर में हलवा बन जाए, तो मैं दूसरी कटोरी माँगे बिना नहीं रहता।”
ध्यान दीजिए: कहानी में लेखक ने यही किया है — “गरमागरम खस्ता कचौड़ी… मावे की बर्फी… बेसन की चिक्की… गोलगप्पे।” उसने हर नाम के साथ एक विशेषण जोड़ा है, इसीलिए पढ़कर मुँह में पानी आ जाता है। आप भी अपने वर्णन में ऐसा ही एक-एक शब्द जोड़िए।
प्र3.
(ग) कहानी में बच्चा सोचता है कि साबूदाने की खीर सिर्फ बीमारी या उपवास में क्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है?
उत्तर

हर घर और हर प्रदेश में कुछ व्यंजन ऐसे होते हैं जो किसी खास दिन से बँधे हुए हैं —

अवसरजो उसी दिन बनता है
होलीगुझिया, दहीबड़े, ठंडाई, पापड़ी
दिवालीचकली, मठरी, लड्डू, शकरपारे, नमकपारे
जन्माष्टमी / पूर्णिमापंजीरी, माखन-मिश्री, खीर
मकर संक्रांति / लोहड़ीतिल के लड्डू, गजक, खिचड़ी, रेवड़ी
ईदसेवइयाँ (शीर खुरमा), बिरयानी
पोंगल / ओणमपोंगल, पायसम, ओणम सद्या
व्रत-उपवाससाबूदाने की खिचड़ी, कुट्टू की पूरी, फलाहार
जन्मदिन / मेहमान आने परहलवा, खीर, पूरी-सब्जी, केक

और बच्चे का सवाल कितना सही है? वह पूछता है — “क्या ये चीजें जब इच्छा हो तब नहीं बनाई जा सकतीं। कोई मना करता है?” बात में दम है। ऐसा कोई नियम तो नहीं है, पर तीन कारण हैं —

  • मौसम — तिल-गुड़ सर्दी में गरमी देते हैं, इसलिए वे संक्रांति से जुड़ गए।
  • मेहनत और खर्च — गुझिया या चकली बनाने में घंटों लगते हैं; रोज कौन बनाए?
  • इंतजार का स्वाद — साल में एक बार मिलने वाली चीज ज्यादा स्वादिष्ट लगती है। रोज मिलने लगे तो वही खास बात खत्म हो जाए।
नमूना उत्तर: “हमारे घर में गुझिया केवल होली पर और तिल के लड्डू केवल मकर संक्रांति पर बनते हैं। दादी कहती हैं कि इन्हें बनाने में पूरा दिन लगता है, इसलिए साल में एक ही बार बनते हैं — और शायद इसीलिए इनका स्वाद सबसे अच्छा लगता है।”
प्र4.
(घ) कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीते हैं? विद्यालय में आपका रुचिकर भोजन क्या है?
उत्तर

यह आपका अपना उत्तर होगा। इसमें तीन बातें आ सकती हैं — घर से लाया टिफिन, विद्यालय का मध्याह्न भोजन, और छुट्टी के समय ठेले या कैंटीन की चीजें।

कहाँ सेक्या-क्या
घर के टिफिन मेंपराठा-अचार, रोटी-सब्जी, पूरी-आलू, इडली, पोहा, उपमा, चपाती-गुड़, कभी-कभी हलवा।
मध्याह्न भोजन मेंदाल-चावल, रोटी-सब्जी, खिचड़ी, राजमा-चावल, कढ़ी, तहरी; कहीं-कहीं फल या दूध भी।
छुट्टी के समय ठेले परनमक-मिर्च लगे अमरूद, इमली-बेर, भेलपूरी, चना-चाट, कुल्फी, बर्फ का गोला।
पीने कोपानी की बोतल, विद्यालय की टंकी का पानी, छाछ, नीबू-पानी।
नमूना उत्तर: “मैं घर से आलू का पराठा और अचार लाता हूँ, पर मुझे सबसे ज्यादा मध्याह्न भोजन में मिलने वाली कढ़ी-चावल पसंद है — खासकर जब वह गरम हो। छुट्टी के बाद हम तीन दोस्त गेट के बाहर ठेले पर नमक-मिर्च लगे अमरूद जरूर खाते हैं। मुझे लगता है कि दोस्तों के साथ बाँटकर खाया गया खाना अकेले खाए गए किसी भी पकवान से ज्यादा स्वादिष्ट होता है।”
ध्यान दें: ठेले की चीजें खाते समय सफाई का ध्यान जरूर रखिए — कटा हुआ फल ढका हुआ हो, हाथ धोकर खाइए, और खुला पानी न पिएँ।
प्र5.
(ङ) इस कहानी में भोजन से जुड़ी बच्चे की कई रोचक बातें बताई गई हैं। आपके बचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?
उत्तर

यह आपकी अपनी स्मृति है। अच्छा उत्तर वह है जिसमें केवल व्यंजन का नाम न हो, बल्कि वह दृश्य, वे लोग और वह भाव भी हो जो उस याद से जुड़े हैं।

लिखने का ढाँचा: (1) कब और कहाँ की बात है → (2) कौन-सी चीज और किसने बनाई → (3) उस दिन क्या खास हुआ → (4) आज याद करके कैसा लगता है।

नमूना उत्तर: “मुझे आज भी वह गरमियों की छुट्टी याद है जब हम गाँव गए थे। नानी ने चूल्हे पर बाजरे की रोटी सेंकी और ऊपर से सफेद मक्खन का बड़ा-सा टुकड़ा रख दिया। मक्खन पिघलकर रोटी में समा गया और उसकी सोंधी खुशबू पूरे आँगन में फैल गई। हम सब जमीन पर बिछी दरी पर बैठकर खा रहे थे और नानी बीच-बीच में गरम रोटी सीधे थाली में डालती जा रही थीं। शहर लौटकर मैंने माँ से कई बार वैसी रोटी बनवाई, पर वह स्वाद कभी नहीं आया। अब समझ आता है कि उसमें आधा स्वाद चूल्हे का था और आधा नानी के हाथ का।”
भोजन और याद: स्वाद और गंध हमारी स्मृति से बहुत गहरे जुड़े होते हैं — इसीलिए कोई खुशबू आते ही पूरा बचपन याद आ जाता है। कहानी में भी बच्चा दाल के बघार की खुशबू से पूरा दृश्य बना लेता है।
प्र6.
(च) कहानी में बच्चा भोजन की सुंगध से रजाई फेंककर रसोई में झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुंगध से आप भी रसोई में जाकर तुरंत देखना चाहते हैं कि क्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुंगध सबसे अधिक पसंद है?
उत्तर

यह लगभग सबके साथ होता है — इसी को लेखक ने बहुत मजेदार ढंग से लिखा है: “जब रहा नहीं गया तो मैं रजाई फेंककर खड़ा हो गया। दबे पाँव दरवाजे तक गया और चुपके से झाँककर देखा।”

वे खुशबुएँ जो रसोई तक खींच ले जाती हैं:

  • हींग-जीरे या लहसुन का दाल में लगा बघार — कहानी में भी यही खुशबू आती है।
  • तवे पर सिंकती रोटी और उस पर लगा घी।
  • गरम तेल में तली जा रही पूरी, पकौड़े या समोसे
  • भुनते हुए मसाले, तली जा रही हरी मिर्च
  • धीमी आँच पर पकती खीर — दूध, इलायची और मेवे की मिली-जुली गंध।
  • बरसात में मिट्टी की सोंधी गंध के साथ चाय-पकौड़े।
  • भुनती हुई मूँगफली और भुट्टा।
नमूना उत्तर: “मुझे दाल में लगने वाले हींग-जीरे के बघार की खुशबू सबसे प्रिय है। जैसे ही ‘छन्न’ की आवाज आती है और खुशबू कमरे तक पहुँचती है, मैं किताब बंद करके रसोई में पहुँच जाता हूँ। इसके अलावा जलेबी की चाशनी और बरसात में बनने वाले प्याज के पकौड़ों की गंध मुझसे रुकी नहीं जाती।”
ऐसा क्यों होता है: स्वाद का बड़ा हिस्सा असल में गंध से आता है। इसीलिए नाक बंद हो तो खाना फीका लगता है, और खुशबू आते ही भूख अपने आप जाग जाती है।
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