प्र1.
“बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।” कहानी में बच्चे के घर पर थर्मामीटर (तापमापी) खोजने पर वह मिल नहीं पाता। आमतौर पर हमारे घरों में कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है जिसे खोजने पर भी वह नहीं मिलती, जिसे कोई माँगकर ले जाता है या हम जिसे किसी से माँगकर ले आते हैं। अपने घर को ध्यान में रखते हुए ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए — जो खोजने पर भी नहीं मिलती हैं / जो कोई माँगकर ले जाते हैं / जो आप किसी से माँगकर लाते हैं
उत्तर
पुस्तक की तीन-खानों वाली तालिका इस तरह भरी जा सकती है। यह सूची आपके अपने घर की होनी चाहिए — नीचे नमूना दिया गया है।
| जो खोजने पर भी नहीं मिलती हैं | जो कोई माँगकर ले जाते हैं | जो आप किसी से माँगकर लाते हैं |
|---|---|---|
| नाखून काटने वाला (नेल कटर) | कुर्सियाँ और दरी (शादी-समारोह के लिए) | सिलाई मशीन या इस्तरी |
| सुई-धागा और कैंची | सीढ़ी | बड़े बर्तन — भगोना, कड़ाही, थालियाँ |
| छाता | पेचकस, हथौड़ी, प्लास | पेचकस या टॉर्च |
| पेन और रबड़ | कहानी की किताबें | कोई सब्जी या मसाला जो चूक गया हो |
| चाबी का गुच्छा और चश्मा | थर्मामीटर | छाता या रेनकोट |
| मोबाइल का चार्जर | साइकिल का पंप | कुर्सियाँ या गद्दे (मेहमान आने पर) |
ऐसा क्यों होता है: जो चीजें कभी-कभार काम आती हैं, उनकी कोई तय जगह नहीं बन पाती — इसलिए जरूरत के समय वे नहीं मिलतीं। और जो चीजें महँगी हैं पर साल में दो-चार बार ही चाहिए (सीढ़ी, बड़े बर्तन, औजार), उन्हें हर घर खरीदता नहीं — पड़ोस से माँग लेना ही समझदारी है।
करके देखिए: घर की ऐसी तीन-चार चीजों की एक तय जगह बना दीजिए और वहाँ छोटी-सी पर्ची चिपका दीजिए। साथ में एक कागज पर लिख लीजिए कि किसने क्या माँगकर लिया — फिर कभी नानाजी की तरह ढूँढ़ते नहीं रह जाएँगे!