मल्हार अध्याय 5 अनुमान और कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता? (संकेत — उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है — आपको कहानी को आगे बढ़ाकर लिखना है। अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए: (1) सच बोलने का क्षण, (2) घर वालों की प्रतिक्रिया, (3) बच्चे के मन में आया बदलाव।

नमूना उत्तर:
शाम को जब नानाजी फिर पुड़िया लेकर आए, तो मुझसे रहा नहीं गया। मैंने रजाई हटाई और धीरे से कहा — “नानाजी, मुझे बुखार नहीं है। मैंने होमवर्क नहीं किया था, इसलिए झूठ बोल दिया।” नानाजी कुछ देर चुप रहे। फिर हँस पड़े — “मैं सुबह ही समझ गया था, इसीलिए तो पुड़िया में सिर्फ मिश्री थी!” नानीजी रसोई से खीर की कटोरी ले आईं और बोलीं — “भूखे तो तुम्हें सजा के लिए नहीं, सच बुलवाने के लिए रखा था।”
उस शाम मैंने खीर भी खाई, आँगन में खेला भी, और मुन्नू से कॉपी लेकर होमवर्क भी पूरा किया। सोते समय मुझे लगा कि सुबह का पूरा दिन बचाया जा सकता था — केवल एक सच बोलकर।
दिन कैसे बदल जाता: उसे दिनभर भूखा और अकेला नहीं रहना पड़ता, गृहकार्य समय पर पूरा हो जाता, मुन्नू के आम पर जलन नहीं होती, और सबसे बड़ी बात — मन पर झूठ का बोझ नहीं रहता। कहानी का अंत पछतावे से नहीं, राहत से होता।
ध्यान रखिए: कहानी बढ़ाते समय पात्रों का स्वभाव वही रखिए जो पाठ में है — नानाजी व्यावहारिक और थोड़े सख्त, नानीजी स्नेही और खिलाने-पिलाने वाली।
प्र2.
(ख) कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे? (संकेत — इस सवाल में आपको नानीजी की जगह लेकर सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जिससे बच्चा आपको स्वयं सारी बातें बता दे।)
उत्तर

यहाँ आपको डाँटने की नहीं, बुलवाने की योजना बनानी है। अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए कि आप बच्चे को शर्मिंदा किए बिना सच तक पहुँचा रहे हैं।

योजना के चरण:

  1. बीमारी को “गंभीरता” से लेना — बिलकुल शांत रहकर कहूँगी, “इतना तेज बुखार है तो डॉक्टर साहब को बुलाना पड़ेगा, वे सुई भी लगा सकते हैं।”
  2. बीमारी का “पूरा इलाज” शुरू करना — कड़वा काढ़ा, बिलकुल फीकी खिचड़ी, दिनभर पूरा आराम, और खेलना-कूदना, टीवी, मोबाइल सब बंद।
  3. लालच पास से गुजारना — रसोई से गरम पकौड़ों की खुशबू आने देना और कहना, “बीमार को तला हुआ नहीं दिया जाता।”
  4. अपनी कहानी सुनाना — पास बैठकर कहूँगी, “मैंने भी बचपन में एक बार पेटदर्द का बहाना बनाया था… फिर क्या हुआ, सुनोगे?” अपनी गलती बताने से बच्चे का डर टूटता है।
  5. रास्ता खुला रखना — अंत में कहूँगी, “अगर आज तबियत ठीक लगने लगे तो बता देना, फिर तुम्हें खीर भी मिलेगी और आँगन में खेलने भी जाना।”
यह योजना क्यों काम करेगी: बच्चा बीमारी इसलिए चुनता है क्योंकि उसे उसमें फायदा दिखता है। जैसे ही बीमारी में केवल कड़वाहट, ऊब और पाबंदी बचती है और सच बोलने में राहत दिखती है, वह स्वयं सच बोल देता है — और वह सीख डाँट से मिली सीख से कहीं ज्यादा टिकती है।
प्र3.
(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर

यह आपका अपना उत्तर होगा। अच्छे उत्तर में कुछ काम मन बहलाने के, कुछ सीखने के और कुछ घर के काम आने वाले होने चाहिए।

किस तरह का कामक्या-क्या कर सकते हैं
पढ़ने-लिखने केकहानी की किताब पढ़ना, अपनी डायरी लिखना, कोई नई कविता याद करना, अपनी एक छोटी कहानी लिखना।
रचनात्मकचित्र बनाना, रंग भरना, कागज से नाव-हवाई जहाज बनाना, पुरानी चीजों से कोई खिलौना बनाना।
घर के छोटे कामअपनी अलमारी और किताबें ठीक करना, पौधों में पानी देना, अपना बस्ता जमाना।
मनोरंजनगाने सुनना, पहेलियाँ बूझना, वर्ग-पहेली भरना, अकेले खेली जाने वाली खेल (जैसे लूडो-सुडोकू) खेलना।
बातचीतदादा-दादी या किसी मित्र को फोन करना, अगले दिन का काम याद करके सूची बनाना।
नमूना उत्तर: “मैं सबसे पहले अपनी अलमारी ठीक करता, क्योंकि वह हफ्तों से बिखरी है। फिर पंचतंत्र की कहानियाँ पढ़ता और उनमें से एक कहानी का चित्र बनाता। दोपहर में गमलों में पानी देता और शाम को अपनी दादी को फोन करके दिनभर की बातें बताता।”
ध्यान देने की बात: कहानी का बच्चा इसलिए ऊबा क्योंकि उसने कुछ किया ही नहीं — वह केवल दूसरों की आवाजों का अनुमान लगाता रहा। अकेलापन तब बोझ बनता है जब हाथ खाली हों।
प्र4.
(घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?
उत्तर

अगर वह उसी दिन स्कूल जाता: गृहकार्य न करने पर शायद उसे डाँट या छोटी-सी सजा मिलती — जैसे खड़े रहना या कक्षा के बाद काम पूरा कराना। पर उसके बाद दिन सामान्य रूप से चलता: दोस्तों के साथ हँसी-मजाक, नई पढ़ाई, खेल का पीरियड और रिसेस में ठेले पर “नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर”। वह खुद ही सोचता है — “सजा मिलती तो मिल जाती।” यानी सजा का डर, सजा से बड़ा था।

अगले दिन स्कूल जाकर उसने क्या-क्या किया होगा:

  • सबसे पहले किसी मित्र से कॉपी लेकर छूटा हुआ काम पूरा किया होगा — उसकी सबसे बड़ी चिंता यही थी: “किससे कॉपी माँगोगे?”
  • शिक्षक को “तबियत ठीक नहीं थी” बताया होगा और मन-ही-मन असहज हुआ होगा, क्योंकि वह जानता था कि यह सच नहीं है।
  • दोस्तों से पूछा होगा कि कल क्या-क्या पढ़ाया गया और क्या छूट गया।
  • रिसेस में ठेले पर जाकर अमरूद खाए होंगे — जिसकी कल दिनभर कल्पना करता रहा।
  • और सबसे जरूरी — उसने तय किया होगा कि आगे से काम समय पर करेगा, ताकि बहाना बनाने की नौबत ही न आए।
कहानी की सीख यही है: जिस दिन से वह भागा, वह दिन गया नहीं — वह अगले दिन दुगुने काम के साथ लौट आया।
प्र5.
(ङ) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
उत्तर

यह आपकी अपनी राय का प्रश्न है। उत्तर में यह दिखना चाहिए कि आप बच्चे की देखभाल भी कर रहे हैं और उसे सीख भी दे रहे हैं।

मैं क्या-क्या करता/करती —

  1. पहले ठीक से जाँच करता: माथा छूता, थर्मामीटर लगाता; न मिलने पर पड़ोस से माँग लेता या दिन में डॉक्टर को दिखा देता।
  2. बिलकुल भूखा न रखता: हल्का खाना जरूर देता — दूध, दाल का पानी, खिचड़ी या फल। भूख बीमारी का इलाज नहीं है।
  3. पास बैठकर बातें करता: अकेले पड़े रहने से मन और गिरता है। कोई कहानी सुनाता या साथ बैठकर किताब पढ़ता।
  4. सच बोलने का रास्ता खुला रखता: डाँटने के बजाय कहता — “अगर आज मन नहीं था तो बता देते, हम कोई हल निकाल लेते।” डर हटने पर बच्चे सच बोलते हैं।
  5. काम का हल निकालता: गृहकार्य में उसकी मदद कर देता, ताकि उसे भागना ही न पड़े।
  6. नियम भी बनाता: शाम को यह तय कर लेता कि रोज का काम रोज होगा — फिर बहाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
नमूना उत्तर: “अगर मैं नानीजी होती तो पहले उसका माथा छूकर देखती। बुखार न मिलने पर भी उसे डाँटती नहीं। उसे गरम दूध और एक कटोरी खिचड़ी देती और पास बैठकर पूछती कि स्कूल में कोई परेशानी तो नहीं। मुझे लगता है कि तब वह खुद ही होमवर्क वाली बात बता देता।”
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ