यह कल्पना का प्रश्न है — आपको कहानी को आगे बढ़ाकर लिखना है। अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए: (1) सच बोलने का क्षण, (2) घर वालों की प्रतिक्रिया, (3) बच्चे के मन में आया बदलाव।
शाम को जब नानाजी फिर पुड़िया लेकर आए, तो मुझसे रहा नहीं गया। मैंने रजाई हटाई और धीरे से कहा — “नानाजी, मुझे बुखार नहीं है। मैंने होमवर्क नहीं किया था, इसलिए झूठ बोल दिया।” नानाजी कुछ देर चुप रहे। फिर हँस पड़े — “मैं सुबह ही समझ गया था, इसीलिए तो पुड़िया में सिर्फ मिश्री थी!” नानीजी रसोई से खीर की कटोरी ले आईं और बोलीं — “भूखे तो तुम्हें सजा के लिए नहीं, सच बुलवाने के लिए रखा था।”
उस शाम मैंने खीर भी खाई, आँगन में खेला भी, और मुन्नू से कॉपी लेकर होमवर्क भी पूरा किया। सोते समय मुझे लगा कि सुबह का पूरा दिन बचाया जा सकता था — केवल एक सच बोलकर।