मल्हार अध्याय 5 कहानी की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे। न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी...। सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन। बाकी एकदम शांति।” इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में ऐसा लग रहा है मानो हमारी आँखों के सामने अस्पताल का चित्र-सा बन गया हो। लेखन में इसे ‘चित्रात्मक भाषा’ कहते हैं। … (क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

इस कहानी में लेखक ने कई तरीके अपनाए हैं जिनसे यह सरस और रोचक बन गई है। आपकी समूह-सूची में ये विशेषताएँ आ सकती हैं —

  1. प्रथम पुरुष में कहन — कहानी बच्चा स्वयं “मैं” कहकर सुनाता है, इसलिए हम उसके मन के भीतर तक पहुँच जाते हैं।
  2. चित्रात्मक भाषा — अस्पताल, दाल के बघार और गली के दृश्य आँखों के सामने बन जाते हैं।
  3. हास्य और व्यंग्य — “चलो बीमार पड़ जाते हैं”, “कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता”, “सारे विकार निकल गए”।
  4. बच्चे की कल्पना — वह लेटे-लेटे घर और गली की गतिविधियों का अनुमान लगाता रहता है।
  5. स्वयं से बातचीत (आत्म-संवाद) — “अक्लमन्द! और बनो बीमार।”
  6. छोटे-छोटे सजीव संवाद — “क्या हो गया?” … “मैं आज बीमार हूँ।”
  7. ध्वनि और गंध का वर्णन — बर्तनों की खटर-पटर, चबाने की आवाजें, हींग-जीरे के बघार की खुशबू।
  8. अनुकरणात्मक और युग्म शब्द — कटर-कटर, खटर-पटर, धीरे-धीरे, हरे-हरे, बड़ी-बड़ी, चहल-पहल, गुड़प।
  9. रोजमर्रा की बोलचाल की भाषा — ठाठ, झख मारना, भुक्कड़, दबे पाँव, गुड़प हो जाना।
  10. भारतीय घर का सजीव चित्र — नानाजी-नानीजी, मामा, मौसी, मुन्नू, पड़ोस के सुधाकर काका, गली की दुकानें।
  11. सोच का बदलना — कहानी शुरू होती है “काश! मैं बीमार पड़ूँ” से और खत्म होती है “बहाना कभी नहीं बनाया” पर।
  12. बिना उपदेश दिए सीख — लेखक कहीं भी “झूठ मत बोलो” नहीं कहता; सीख घटनाओं से अपने आप निकलती है।
समूह में कैसे काम करें: पाठ को चार हिस्सों में बाँट लीजिए — अस्पताल, बहाने की सुबह, दोपहर की भूख, और अंत। हर जोड़ी एक हिस्सा पढ़कर उसकी दो-तीन विशेषताएँ पंक्ति सहित लिखे। अंत में सब सूचियाँ मिलाकर एक बड़ी सूची बना लीजिए।
प्र2.
(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए— विशेष बिंदु: बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना / हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना / बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आना / कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होना / बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना
उत्तर

पाठ्यपुस्तक की तालिका इस प्रकार भरी जाएगी —

विशेष बिंदुकहानी में से उदाहरण
बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना“क्या ठाठ हैं बीमारों के भी। मैंने सोचा… ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो!” — बहाने वाले दिन वह अस्पताल का पूरा दृश्य याद करता है। इसी तरह वह याद करता है कि रिसेस में ठेले पर अमरूद खाने में कितना मजा आता है।
हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना“कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता।” तथा अंत की पंक्ति — “उस पूरे दिन मुझे भूखे पेट ही रहना पड़ा। सारे विकार निकल गए।” मुन्नू के लिए कहा गया “भुक्कड़ कहीं का” भी हँसा देता है।
बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आनाशुरू में — “काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता! मैं कब बीमार पड़ूँगा!” और अंत में — “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।”
कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होनानानाजी-नानीजी अंत तक नहीं जान पाते कि बच्चा बीमार है ही नहीं। नानाजी माथा-पेट-नब्ज देखकर कहते हैं — “बुखार तो नहीं है”, फिर भी उसे सचमुच का रोगी मानकर पुड़िया खिलाते रहते हैं।
बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना“क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है?” और “अक्लमन्द! और बनो बीमार।”
तालिका भरने की तरकीब: हर बिंदु के लिए कहानी में से पूरा वाक्य उद्धरण चिह्नों में लिखिए और साथ में एक पंक्ति में बताइए कि वह उस बिंदु से कैसे मेल खाता है। केवल पृष्ठ संख्या लिखना उत्तर नहीं माना जाएगा।
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