मल्हार अध्याय 5 समस्या और समाधान

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कहानी को एक बार पुन: पढ़कर पता लगाइए— (क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर

समस्या: उस दिन बच्चे का स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने गृहकार्य भी नहीं किया था। स्कूल जाता तो सजा मिलना तय था — “स्कूल जाता तो जरूर सजा मिलती।”

उसका निकाला हुआ समाधान: उसने बीमार पड़ने का बहाना बनाया —

  • रजाई से निकला ही नहीं और कहा, “मैं आज बीमार हूँ।”
  • तीन शिकायतें एक साथ गिना दीं — “मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।”
  • खुद को सच्चा साबित करने के लिए चाल भी चली — “थर्मामीटर लगाकर देखिए” (उसे पता था कि घर में कोई देखने वाला नहीं है)।
  • नानाजी के आने पर कराहकर बोला — “बुखार आ गया।”

क्या यह समाधान चला? बिलकुल नहीं। इसका नतीजा हुआ — कड़वी पुड़िया, काढ़े जैसी चाय, दिनभर की ऊब, अकेलापन और भूख। और गृहकार्य फिर भी बचा रहा, बल्कि बढ़ गया।

असली समाधान क्या होता: सच बोलकर मदद माँगना — “काम नहीं हुआ है, थोड़ी मदद कीजिए।” समस्या का हल समस्या से भागने में नहीं, उसका सामना करने में है। कहानी के अंत में बच्चा खुद यही समझता है।
प्र2.
(ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर

समस्या: घर का बच्चा कह रहा था कि उसे सिरदर्द, पेटदर्द और बुखार है। उन्हें तय करना था कि वह सचमुच बीमार है या नहीं, और यदि है तो क्या किया जाए। मुश्किल यह थी कि जाँचने का साधन ही नहीं मिला — “बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।”

उनका निकाला हुआ समाधान:

  1. पहले खुद जाँचा — नानाजी ने “रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ। पेट देखा और नब्ज देखने लगे।” और साफ कहा, “बुखार तो नहीं है।”
  2. घरेलू दवा दी — “ले, पुड़िया खा ले।” साथ में काढ़े जैसी चाय पिलाई।
  3. खाना बंद कर दिया — “आज इसे कुछ खाने को मत देना।” उनका मानना था — “तबियत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे।”
  4. आराम और निगरानी — “आराम करने दो। शाम को देखेंगे।”
  5. दिन में नानाजी दोबारा आकर हाल पूछते हैं — “अब कैसा है सिरदर्द?” और एक पुड़िया और खिला जाते हैं।
नतीजा: उनका इलाज सचमुच की बीमारी पर तो असर करता या नहीं, यह कहानी नहीं बताती — पर झूठी बीमारी का इलाज उसने पूरा कर दिया। बच्चा दिनभर में इतना ऊब और भूख झेलता है कि दोबारा कभी बहाना नहीं बनाता। मजाकिया ढंग से लेखक लिखता है — “सारे विकार निकल गए।”
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ