प्र1.
“मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ” — आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं। उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाइए।
उत्तर
यह चित्र बनाने का काम है। चित्र आपको अपनी कॉपी में बनाना है, पर उसमें कहानी की बातें जरूर आनी चाहिए — तभी वह “इसी गली” का चित्र कहलाएगा।
कहानी गली के बारे में क्या-क्या बताती है:
| कहानी की पंक्ति | चित्र में क्या बनाइए |
|---|---|
| “चंदूभाई ड्राइक्लीनर क्या कर रहे हैं?” | एक ड्राइक्लीनर की दुकान — बाहर टँगे कोट-साड़ियाँ, इस्तरी की मेज। |
| “तेजराम की दुकान पर कितने ग्राहक बैठे हैं?” | एक छोटी दुकान जिसके बाहर बेंच पर बैठे कुछ ग्राहक। |
| “महेश घी सेंटर ने मलाई का भगोना आँच पर चढ़ाया या नहीं” | घी-दूध की दुकान, चूल्हे पर चढ़ा बड़ा भगोना, उठती हुई भाप। |
| “टेलीफोन के तारों पर कितनी चिड़िया बैठी हैं?” | खंभों के बीच झूलते तार और उन पर कतार में बैठी चिड़ियाँ। |
| “न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी…” (अस्पताल के बारे में — यानी गली में इसका उलटा) | आते-जाते रिक्शा, साइकिल और स्कूटर; उड़ती धूल; भीड़-भाड़। |
| “अब छोटे मामा ने साइकिल उठाई।” / “कुसुम मौसी… कॉलेज बस पकड़ने भागीं।” | साइकिल पर जाता एक व्यक्ति, बस-स्टॉप की ओर भागती एक लड़की। |
| “सारे बच्चे हल्ला मचाते हुए आँगन में खेल रहे होंगे” | गली के किनारे खेलते-शोर मचाते बच्चे। |
| “ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते” | अमरूद वाला ठेला और उसके पास खड़े ग्राहक। |
| “मैं रजाई से निकला ही नहीं” (सर्दी का मौसम) | धूप सेंकते लोग, स्वेटर-शॉल पहने राहगीर, हल्की धूप। |
चित्र बनाने का तरीका:
- बीच में गली की सड़क बनाइए और दोनों ओर दुकानें व घर।
- तीनों दुकानों के नाम-पट्ट लिखिए — चंदूभाई ड्राइक्लीनर, तेजराम की दुकान, महेश घी सेंटर।
- ऊपर तार और चिड़ियाँ, नीचे लोग-वाहन-ठेला जोड़िए।
- एक घर की खिड़की में रजाई ओढ़े झाँकता बच्चा भी बना दीजिए — यही कहानी का नायक है!
ध्यान रखिए: चित्र सुंदर हो, यह जरूरी नहीं; उसमें कहानी के संकेत हों, यह जरूरी है। हर चीज पर छोटा-सा नाम लिख देने से मूल्यांकन आसान हो जाता है।