मल्हार अध्याय 5 शीर्षक

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर

हाँ, यह नाम पूरी तरह उपयुक्त है। कारण —

  1. कहानी का निचोड़ इसी में है — कहानी का अंतिम वाक्य ही है, “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।” यानी अंत में बच्चा तय करता है — अब बीमार नहीं होना।
  2. दो अर्थ एक साथ — ‘नहीं होना बीमार’ का एक अर्थ है बीमार होने का नाटक न करना, दूसरा अर्थ है बच्चा सचमुच बीमार था ही नहीं। दोनों अर्थ कहानी में सच हैं।
  3. उलटा शीर्षक जिज्ञासा जगाता है — कहानी की शुरुआत में तो बच्चा चाहता है कि वह बीमार पड़े — “मैं कब बीमार पड़ूँगा!” शीर्षक इसके ठीक उलटा है, इसलिए पाठक जानना चाहता है कि उसका मन कैसे बदला।
  4. शब्द-क्रम का प्रभाव — ‘बीमार नहीं होना’ की जगह ‘नहीं होना बीमार’ लिखने से पंक्ति बच्चे की अपनी बोली जैसी और जोरदार लगती है।
दूसरा पक्ष भी कह सकते हैं: कोई साथी कह सकता है कि कहानी असल में बहाने और उसके नतीजे की है, इसलिए शीर्षक में ‘बहाना’ शब्द होता तो और सीधा होता। यह भी एक ठीक तर्क है — बस कारण देना जरूरी है।
प्र2.
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
उत्तर

नाम ऐसा चुनिए जो कहानी की मुख्य बात या उसकी सबसे यादगार चीज पकड़ता हो। कुछ सुझाव और उनके कारण —

संभावित शीर्षकक्यों उपयुक्त है
साबूदाने की खीरयही वह चीज है जिसने बच्चे के मन में बीमार पड़ने की इच्छा जगाई और यही अंत तक उसे तरसाती रही। पूरी कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।
बहाने का नतीजाकहानी की सीख सीधे-सीधे इसी में आ जाती है।
क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!कहानी की सबसे मजेदार पंक्ति, जिससे पूरी घटना शुरू होती है। यह पढ़ते ही उत्सुकता जगती है।
सारे विकार निकल गएकहानी की अंतिम व्यंग्य-भरी पंक्ति; इसमें हास्य भी है और सीख भी।
एक दिन की छुट्टीबच्चे ने जो चाहा था वह मिला भी, पर बिलकुल उलटे रूप में — यह विरोधाभास शीर्षक को रोचक बनाता है।
भूखे पेट का दिनउस दिन की सबसे बड़ी तकलीफ यही थी, जिसने बच्चे की सोच बदल दी।
नमूना उत्तर: “मैं इस कहानी का नाम ‘साबूदाने की खीर’ रखूँगा/रखूँगी। कारण यह है कि पूरी कहानी उसी खीर से शुरू होती है — अस्पताल में काका को खीर मिलते देखकर ही बच्चे के मन में बीमार पड़ने का विचार आता है — और दिनभर वह उसी खीर को याद करता रहता है। जो चीज कहानी को शुरू से अंत तक जोड़े रखे, वही सबसे अच्छा शीर्षक बनती है।”
अच्छा शीर्षक कैसा होता है: छोटा हो, कहानी की मुख्य बात या मुख्य पात्र से जुड़ा हो, पूरी कहानी बता न दे पर पढ़ने की उत्सुकता जगा दे।
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