वे समानता के अधिकार — अनुच्छेद 14, ‘कानून के समक्ष समानता’ की बात कर रही थीं। अध्याय का सूचना-चित्र (चित्र 10.14) मौलिक अधिकारों में सबसे पहले इसी को गिनाता है।
उनके शब्दों को देखिए — “भारत की महिलाएँ जीवन के सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ पूर्ण समानता के अपने वैध अधिकार को लेकर प्रसन्न हैं” तथा “भारतीय गणराज्य में महिलाओं के अधिकारों का विधि के अनुसार पूर्ण सम्मान किया जाएगा।” दो शब्द निर्णायक हैं — समानता और विधि के अनुसार। यही अनुच्छेद 14 है।
सुझाव: यही विचार उद्देशिका में भी है, जहाँ संविधान सभी नागरिकों को “प्रतिष्ठा और अवसर की समता” देता है। चित्र 10.16 के उद्देशिका-पट में ‘समानता’ की व्याख्या इस प्रकार है — कानून के समक्ष सभी समान हैं, सामाजिक असमानताओं को समाप्त किया जाना चाहिए, और सभी को समान अवसर देना सरकार का कर्तव्य है।
एक निष्पक्ष बात: यहाँ एक से अधिक उत्तर दिए जा सकते हैं। जो विद्यार्थी व्यापक समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14–18) का नाम लेता है — जिसमें धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध भी सम्मिलित है — वह उनके वाक्य “जीवन के सभी क्षेत्रों में” को उतनी ही उचित रीति से पढ़ रहा है। महत्वपूर्ण यह है कि आप समानता की गारंटी की ओर संकेत करें और अपने चुनाव के समर्थन में उद्धरण की पंक्ति दें।