प्र1.
प्रस्तावना में उल्लिखित विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। इन्हें दिए गए चित्र में ध्यान से पढ़िए और अपने आस-पास के दैनिक जीवन में इन मूल्यों के पालन के उदाहरण लिखिए। दो उदाहरण दिए गए हैं, जिससे आपको अभ्यास पूर्ण करने में सहायता मिलेगी।
उत्तर
पहले उद्देशिका का पट (चित्र 10.16) ध्यान से पढ़िए, फिर अपने आस-पास वह मूल्य घटित होते हुए ढूँढ़िए। भरी हुई दो पंक्तियाँ बता देती हैं कि उत्तर किस स्तर का चाहिए — एक रोजमर्रा की स्थिति, एक वाक्य में।
चित्र 10.16 में उद्देशिका उसी हस्तलिखित पृष्ठ के रूप में छपी है, जो मूल संविधान का भाग है। जैसा वहाँ मुद्रित है, ठीक वैसा पाठ —
WE, THE PEOPLE OF INDIA, having solemnly resolved to constitute India into a SOVEREIGN DEMOCRATIC REPUBLIC and to secure to all its citizens:
JUSTICE, social, economic and political;
LIBERTY of thought, expression, belief, faith and worship;
EQUALITY of status and of opportunity;
and to promote among them all
FRATERNITY assuring the dignity of the individual and the unity of the Nation;
IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this twenty-sixth day of November, 1949, do HEREBY ADOPT, ENACT AND GIVE TO OURSELVES THIS CONSTITUTION.
JUSTICE, social, economic and political;
LIBERTY of thought, expression, belief, faith and worship;
EQUALITY of status and of opportunity;
and to promote among them all
FRATERNITY assuring the dignity of the individual and the unity of the Nation;
IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this twenty-sixth day of November, 1949, do HEREBY ADOPT, ENACT AND GIVE TO OURSELVES THIS CONSTITUTION.
पुस्तक का नोट: “‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्दों को 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा संविधान की उद्देशिका में जोड़ा गया है।” चित्र 10.16 1949 के मूल पृष्ठ का छायाचित्र है, इसलिए वे तीन शब्द उस हस्तलिपि में नहीं दिखते। आज की उद्देशिका में आरंभ है — “संप्रभु समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य”, और अंतिम उपबंध में “राष्ट्र की एकता और अखंडता”। इसीलिए नीचे के अभ्यास में पंथनिरपेक्ष भी एक विशेषता के रूप में दिया गया है।
| प्रस्तावना की विशेषताएँ | हम इन्हें अपने दैनिक जीवन में कैसे देखते हैं |
|---|---|
| संप्रभु | भारत के भीतर के सभी निर्णय हमारी अपनी निर्वाचित सरकार करती है — कोई बाहरी शक्ति हमारे कानून, हमारा पाठ्यक्रम या हमारे कर तय नहीं कर सकती। किसी दूसरे देश से समझौता भी भारत बराबरी के आधार पर, अपने निर्णय से करता है। |
| पंथनिरपेक्ष | पुस्तक में दिया गया: किसी व्यक्ति को यदि अपने धर्म के रीति-रिवाजों का पालन करना है और वह दूसरे के जीवन में बाधा नहीं डालता, तो उसे इसके लिए राज्य से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। |
| गणतंत्र | हमारे राष्ट्र के अध्यक्ष, राष्ट्रपति, निर्वाचित होते हैं और नियत अवधि तक पद पर रहते हैं — यह पद किसी के पुत्र या पुत्री को विरासत में नहीं मिलता। इसी प्रकार सरपंच, विधायक और सांसद भी इसलिए पद पर हैं क्योंकि लोगों ने उन्हें चुना। |
| न्याय | पुस्तक में दिया गया: राज्य नौकरियों और अवसरों में सभी नागरिकों को जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव किए बिना समान अवसर प्रदान करता है। |
| स्वतंत्रता | हम जो सोचते हैं वह कह सकते हैं, अपनी पसंद का धर्म मान सकते हैं, अपनी रुचि की पुस्तकें पढ़ सकते हैं और संगठन बना सकते हैं — बशर्ते किसी और को हानि न पहुँचे। नागरिक सरकार को न्यायालय में भी ले जा सकता है, जैसा 2004 के ध्वज-प्रकरण में हुआ। |
| समानता | कक्षा का हर बच्चा एक ही कमरे में बैठता है, एक ही पुस्तकालय का उपयोग करता है और एक ही मध्याह्न भोजन खाता है — चाहे उसके परिवार की जाति, धर्म या आय कुछ भी हो। राशन की दुकान या रेलवे टिकट खिड़की की पंक्ति में भी यही नियम है — धनी या प्रभावशाली होने के कारण किसी को पहले नहीं निपटाया जाता। |
| बंधुत्व | अलग-अलग समुदायों के पड़ोसी एक-दूसरे के त्योहारों में सम्मिलित होते हैं, और बाढ़, बीमारी या मृत्यु के समय पूरा मोहल्ला साथ खड़ा होता है। किसी को उसकी पहचान के कारण कम नागरिक नहीं माना जाता। |
सुझाव: आपके अपने उदाहरण इनसे बेहतर होंगे, यदि वे आपकी गली, आपके विद्यालय या आपकी पंचायत से आएँ। हर पंक्ति के लिए पूछिए — “मैंने यह होते हुए कहाँ देखा है?”, न कि “इस शब्द का अर्थ क्या है?”