अन्वेषण अध्याय 10 प्रश्न और क्रियाकलाप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
‘संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।’ आपके अनुसार ऐसा होना क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर

क्योंकि संविधान को पूरे भारत के लिए काम करना था, और किसी क्षेत्र का जीवन वही व्यक्ति बता सकता है जो उसे जानता हो। अध्याय बताता है कि सदस्य “भारत के विभिन्न क्षेत्रों, व्यवसायों और सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते थे” और 299 सदस्यों में 15 महिलाएँ थीं।

विविध सभा क्यों आवश्यक थी — चार कारण —

  • किसी क्षेत्र की आवश्यकता छूटती नहीं। पहाड़ी राज्य, तटीय जिला, मरुभूमि और घनी बस्ती वाला नगर — सबकी समस्याएँ एक जैसी नहीं होतीं। हर क्षेत्र के सदस्य नियम बनते समय ही अपनी बात रख सके।
  • कोई वर्ग अधिकारों से बाहर नहीं रहा। जब समानता और भेदभाव-निषेध के उपबंध लिखे जा रहे थे, तब महिलाएँ, किसान, श्रमिक, वकील, शिक्षक और लंबे समय से उपेक्षित समुदायों के लोग उसी कक्ष में उपस्थित थे।
  • प्रलेख स्वीकार्य बना। जिस नियम-पुस्तिका को बनाने में लोग सम्मिलित रहे हों, उसे वे मानते हैं। किसी सीमित समूह का लिखा संविधान ‘एक वर्ग का कानून’ कहलाता।
  • निर्णय बेहतर हुए। भिन्न दृष्टिकोण एक-दूसरे को परखते हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए “दूसरे के विचारों का सम्मान” तथा “लचीलेपन और समन्वय” की आवश्यकता है — इसके लिए भिन्न विचारों का उपस्थित होना पहली शर्त है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: उद्देशिका का आरंभ है — ‘हम, भारत के लोग’। यह वाक्य तभी सच है जब लिखने वाले लोग वास्तव में भारत के लोगों को दर्शाते हों। सभा की विविधता ने ही इस पहली पंक्ति को ईमानदार बनाया।
प्र2.
नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि इनमें भारतीय संविधान की कौन-कौन सी प्रमुख विशेषताएँ या मूल्य दिखाई देते हैं — (क) शीना, रजत और हर्ष एक पंक्ति में खड़े हैं। वे आम चुनावों में अपना पहला वोट डालने के लिए उत्साहित हैं। (ख) राधा, इमोन और हरप्रीत एक ही विद्यालय की एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। (ग) माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। (घ) गाँव के कुएँ का उपयोग सभी जाति, धर्म और लिंग के लोग कर सकते हैं।
उत्तर

प्रत्येक कथन को उसकी विशेषता से मिलाइए —

कथनसंविधान की विशेषता / मूल्ययह कहाँ से आता है
(क) शीना, रजत और हर्ष पहला वोट डालने को उत्साहितसार्वभौमिक वयस्क मताधिकार — और वह लोकतांत्रिक गणराज्य, जिसमें लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैंप्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार; निर्वाचन तंत्र ऐसा कि हर पात्र नागरिक मतदान कर सके
(ख) राधा, इमोन और हरप्रीत एक ही कक्षा मेंसमानता का अधिकार और राज्य का पंथनिरपेक्ष स्वरूप; साथ ही शिक्षा का अधिकारअनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता); अनुच्छेद 21-ए (शिक्षा का अधिकार)
(ग) माता-पिता बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करेंएक मौलिक कर्तव्यकर्तव्य (च) — “यदि माता-पिता या अभिभावक हैं, तो 6 से 14 वर्ष की आयु के अपने बच्चे या आश्रित को शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करना।”
(घ) गाँव के कुएँ का उपयोग सभी कर सकते हैंसमानता और न्याय, तथा बंधुत्व का मूल्यनागरिकों के साथ जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं; सामाजिक असमानताओं को समाप्त किया जाना चाहिए
सुझाव: एक कथन में एक से अधिक मूल्य दिख सकते हैं, और यह ठीक है — कथन (ख) में समानता, पंथनिरपेक्षता और शिक्षा का अधिकार, तीनों एक साथ हैं। प्रश्न यह चाहता है कि आप मूल्य का नाम लें और कारण बताएँ। केवल नाम नहीं, कारण भी अवश्य लिखिए।
प्र3.
यह कहा जाता है कि ‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान है।’ क्या आपको लगता है कि यह एक सच्चाई है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? तर्कों के साथ उत्तर दीजिए।
उत्तर

ईमानदार उत्तर के दो भाग हैं, और अच्छे उत्तर में दोनों आने चाहिए — कानून की दृष्टि से यह सच्चाई है; दैनिक व्यवहार में यह अभी लक्ष्य है।

‘हाँ, यह सच्चाई है’ के तर्क‘व्यवहार में अभी नहीं’ के तर्क
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता को मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित करता है — अध्याय के सूचना-चित्र में यही पहला अधिकार है।जो व्यक्ति अपने अधिकार नहीं जानता, या जिसके पास मुकदमे का समय और व्यय नहीं, वह उनका उपयोग नहीं कर पाता।
उद्देशिका देश को सभी नागरिकों के लिए प्रतिष्ठा और अवसर की समता सुनिश्चित करने से बाँधती है।पुरानी सामाजिक असमानताएँ समाप्त नहीं हुई हैं; उद्देशिका-पट स्वयं कहता है कि “सामाजिक असमानताओं को समाप्त किया जाना चाहिए”, अर्थात् कार्य अधूरा है।
अधिकार माँगे जाने योग्य हैं — “यदि आपके साथ केवल आपकी पहचान के कारण कोई अनुचित व्यवहार करता है, तो आप न्यायालय की सहायता ले सकते हैं।”जागरूकता असमान है — बहुत से लोग यह जानते ही नहीं कि न्यायालय उनके लिए भी खुला है।
कोई कानून से ऊपर नहीं: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और न्यायाधीश, सभी संविधान के पालन की शपथ या संकल्प लेते हैं।असमानता घटाने वाले कुछ नीति-निर्देशक तत्व — अच्छा जीवन-स्तर, पोषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य — लक्ष्य हैं, जिनकी माँग न्यायालय में नहीं की जा सकती।

अपना तर्क कैसे गढ़ें। पहले एक वाक्य में अपना पक्ष रखिए, फिर दो प्रमाण दीजिए, और अंत में अपने विरुद्ध सबसे मजबूत आपत्ति का उत्तर दीजिए। जैसे — “कानून के समक्ष समानता उस अर्थ में सच्चाई है जो सबसे महत्वपूर्ण है — कानून स्वयं नागरिकों में भेद नहीं करता और हर नागरिक न्यायालय जा सकता है। परंतु कागज पर लिखा अधिकार तभी वास्तविक बनता है जब लोग उसे जानें और न्यायालय तक सरलता से पहुँच सकें; इसलिए अब कार्य है वचन और अनुभव के बीच की दूरी को पाटना।”

दोनों भाग साथ क्यों: संविधान निर्माताओं ने इस दूरी को ध्यान में रखकर ही व्यवस्था बनाई थी। उन्होंने तुरंत माँगे जा सकने वाले मौलिक अधिकार दिए और अलग से दीर्घकालिक नीति-निर्देशक तत्व — “कुछ बड़े लक्ष्य ऐसे हों जिन्हें देश की प्रगति के साथ धीरे-धीरे प्राप्त किया जा सके।” यह कहना कि आदर्श अभी पूरी तरह प्राप्त नहीं हुआ, संविधान की आलोचना नहीं है; संविधान स्वयं अपने बारे में यही कहता है।
प्र4.
आपने पढ़ा कि ‘भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया।’ क्या आप बता सकते हैं कि भारत ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर

भारत ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि इससे कम कुछ भी उस स्वतंत्रता संग्राम के विरुद्ध जाता, जिसे वह अभी-अभी जीता था। अध्याय बताता है कि निर्माताओं का एक प्रश्न यही था — “हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार मिले?” — और फिर ऐसा निर्वाचन तंत्र बनाया गया जिससे हर पात्र नागरिक मतदान कर सके।

कारण, क्रम से —

  • स्वतंत्रता आंदोलन जन-आंदोलन था। किसान, श्रमिक, महिलाएँ और विद्यार्थी — सब सम्मिलित थे। स्वतंत्रता मिलने पर उन्हीं से यह कहना कि मत केवल धनी या शिक्षित लोगों को मिलेगा, अनुचित होता।
  • संविधान की नींव समानता है। यदि सभी कानून के समक्ष समान हैं, तो जाति, लिंग, धन या साक्षरता के आधार पर मताधिकार नहीं बाँटा जा सकता। सार्वभौमिक मताधिकार चुनावों पर लागू की गई समानता ही है।
  • औपनिवेशिक शासन ने भारतीयों की आवाज छीनी थी। बिना सहमति के शासित होने का सीधा विलोम यही है कि सबको आवाज मिले।
  • ‘हम, भारत के लोग’। उद्देशिका कहती है कि संविधान लोगों ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से बनाया और अपनाया। प्रतिनिधि लोगों के लिए तभी बोल सकते हैं जब उन्हें सब लोग चुनें।
  • साधारण भारतीय पर विश्वास। उस समय अनेक लोगों को लगता था कि निर्धन और बड़े पैमाने पर निरक्षर देश पूर्ण मताधिकार नहीं सँभाल सकेगा। संविधान निर्माताओं ने असहमति जताई — सहमति से शासित होने का अधिकार शिक्षा या आय पर निर्भर नहीं करता।
एक सावधान टिप्पणी: यह कथन इसी अध्याय का नहीं, आपके पूर्व अध्ययन का है, इसलिए इसे ठीक-ठीक कहना उचित है। 1950 से पहले कुछ देशों में भी पूर्ण वयस्क मताधिकार दिया जा चुका था, पर वे छोटे और कहीं अधिक एकरूप देश थे। भारत की विशेषता यह है कि उसने अपने पहले ही आम चुनाव से प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत दिया — इतने बड़े, निर्धन और विविध देश में, जो किसी तुलनीय राष्ट्र ने नहीं किया था और जहाँ तक पुराने लोकतंत्र भी धीरे-धीरे, चरणों में ही पहुँचे थे।
प्र5.
स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीय संविधान के निर्माण को कैसे प्रेरित किया? भारतीय सभ्यता की विरासत ने संविधान की किन प्रमुख विशेषताओं को किस प्रकार प्रेरित किया? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर

स्वतंत्रता संग्राम ने दो प्रकार से संविधान को आकार दिया — अपने आदर्शों से और अपनी व्यावहारिक शिक्षा से।

  • आदर्श। अध्याय इन्हें गिनाता है — सभी के लिए समानता और न्याय, स्वतंत्रता, बंधुत्व, भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण — तथा संविधान को इन आदर्शों की प्राप्ति का साधन मानना। यही शब्द उद्देशिका में लौटते हैं।
  • व्यक्ति। स्वतंत्रता संग्राम के अनेक प्रमुख नेता संविधान सभा के सदस्य थे, इसलिए उन्होंने “अपने अनुभव और विचार संविधान में सम्मिलित किए।” अध्याय के शब्दों में, स्वतंत्र भारत के लिए संविधान नींव का पत्थर था।
  • व्यावहारिक उत्तर। संग्राम के अनुभव ने ‘कैसे’ और ‘क्या’ वाले प्रश्नों के उत्तर दिए — प्रत्येक वयस्क को मताधिकार, कार्यपालिका-विधायिका-न्यायपालिका की शक्तियों का पृथक्करण, मौलिक अधिकारों की गारंटी, संशोधन की प्रक्रिया और केंद्र-राज्य संबंध।

भारतीय सभ्यता की विरासत ने इन विशेषताओं को प्रेरित किया —

विरासत सेसंविधान में क्या बना
मत वैभिन्य की स्वीकृति; वसुधैव कुटुम्बकम् (संपूर्ण विश्व एक परिवार है); सर्वे भवन्तु सुखिनः (सभी सुखी हों)विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राज्य का पंथनिरपेक्ष स्वरूप, तथा उद्देशिका में बंधुता का मूल्य
शासन में जनता की भूमिका और कर्तव्यों पर पुराना बल — जनपद, संघ, राजा और उनकी सभाएँ, कौटिल्य का सप्तांग, राजधर्ममौलिक कर्तव्य (भाग 4-ए), और यह भाव कि शासन विशेषाधिकार नहीं, उत्तरदायित्व है
प्रकृति को पवित्र मानना; ज्ञान और शिक्षा की निरंतर खोज; महिलाओं के प्रति सम्मानवन, झील, नदी और वन्य जीव की रक्षा तथा जीवमात्र के प्रति दया का कर्तव्य; अनुच्छेद 48-ए (पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण); शिक्षा का अधिकार; महिलाओं की समानता
विविधता के भीतर भारत के एक राष्ट्र होने का भाव — ‘एक में अनेक’राष्ट्र की एकता, जो उद्देशिका में और संघ की संरचना में लिखी है

निर्माताओं ने “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” की भावना से बाहर भी देखा — फ्रांस से ‘स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व’, आयरलैंड से नीति-निर्देशक सिद्धांत, और अमेरिका से स्वतंत्र न्यायपालिका।

ऐसा क्यों: संविधान कोरे कागज पर नहीं लिखा जाता। उसे वे लोग लिखते हैं जिनके पास स्मृति होती है — उस संघर्ष की, जिसे वे अभी-अभी जी चुके थे, और उस सभ्यता की, जिसमें वे पले-बढ़े थे। तैयार पाठ में दोनों स्मृतियाँ दिखाई देती हैं।
प्र6.
क्या आपको लगता है कि हम एक समाज के रूप में संविधान के सभी आदर्शों को प्राप्त कर चुके हैं? यदि नहीं, तो एक नागरिक के रूप में हम में से प्रत्येक क्या कर सकता है जिससे कि हमारा देश इन आदर्शों के और निकट पहुँच सके?
उत्तर

सभी आदर्श अभी नहीं — और संविधान ने कभी यह माना भी नहीं था कि सब तुरंत प्राप्त हो जाएँगे। उसकी अपनी बनावट यही कहती है : मौलिक अधिकार “वे प्रतिज्ञाएँ हैं, जिन्हें निभाना अनिवार्य है” और आज माँगी जा सकती हैं, जबकि नीति-निर्देशक तत्व वे “बड़े लक्ष्य” हैं “जिन्हें देश की प्रगति के साथ धीरे-धीरे प्राप्त किया जा सके।” इनमें से कई लक्ष्य — सबके लिए अच्छा जीवन-स्तर (अनुच्छेद 47), सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय (अनुच्छेद 38), पर्यावरण संरक्षण (अनुच्छेद 48-ए) — अभी साधे जा रहे हैं।

साथ ही बहुत कुछ प्राप्त भी हुआ है : हर वयस्क मतदान करता है, सरकारें चुनाव से शांतिपूर्वक बदलती हैं, न्यायालय संविधान के विरुद्ध कानूनों को रद्द करते हैं, शिक्षा अधिकार बन चुकी है, और छुआछूत तथा भेदभाव अवैध हैं।

एक नागरिक के रूप में हम क्या कर सकते हैं — छोटे, वास्तविक कार्य —

आदर्शविद्यार्थी वास्तव में क्या कर सकता है
समानताकक्षा, खेल के मैदान या पानी की टंकी पर किसी को जाति, धर्म, लिंग या आय के कारण अलग न होने दें — और ऐसा होने पर बोलें
न्यायअपने अधिकार जानें और दूसरों को बताएँ; अन्याय पर चुप रहने के बजाय शिक्षक या किसी बड़े को बताएँ
स्वतंत्रताजिस विचार से असहमत हों, उसे पहले पूरा सुनें, फिर उत्तर दें; किसी की आवाज न दबाएँ
बंधुत्वहर समुदाय के पड़ोसियों के सुख-दुख में सम्मिलित हों; किसी सहनागरिक को नीचा न दिखाएँ
मौलिक कर्तव्यसंविधान, राष्ट्र-ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें; पेड़, झील, नदी और जीव-जंतुओं की रक्षा करें; सार्वजनिक संपत्ति स्वच्छ रखें; अपने कार्य में उत्कृष्टता का प्रयत्न करें
लोकतंत्रविद्यालय या ग्राम सभा में भाग लें; अठारह वर्ष के होते ही नाम दर्ज कराकर मतदान करें — और घर के बड़ों को भी मतदान के लिए प्रेरित करें
यह क्यों काम करता है: उद्देशिका के पाठ में कहा गया है कि नागरिकों से भी अपेक्षा है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार इन मूल्यों का पालन करें। संविधान अधिकार की गारंटी दे सकता है; उसे आदत केवल नागरिक बना सकते हैं। ऊपर लिखा हर कार्य निःशुल्क है और कक्षा 7 के विद्यार्थी के लिए आज ही संभव है।
प्र7.
अगले पृष्ठ पर दी गई शब्द-पहेली को भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण अवधारणाओं का प्रयोग करते हुए हल कीजिए।
उत्तर

यह रही हल की हुई शब्द-पहेली। खाकों की संख्या गिनकर हर उत्तर जाँच लीजिए — प्रत्येक खाने में एक अक्षर आता है।

क्रमसंकेतउत्तरखाने
ऊपर से नीचे 1वह गैस जिसमें मूल संविधान की प्रति सुरक्षित रखी गई है।हीलियम4
ऊपर से नीचे 2वे अधिकार जो हर नागरिक को मिलते हैं, जैसे — स्वतंत्रता और समानता का अधिकार।मूल अधिकार6
ऊपर से नीचे 4लोगों का वह समूह जिसने भारतीय संविधान तैयार किया।संविधान सभा6
ऊपर से नीचे 7संविधान का आरंभिक कथन, जो वे मूल्य व आदर्श बताता है, जिनका वह संरक्षण करता है।उद्देशिका4
बाएँ से दाएँ 3संविधान का वह भाग जो नागरिकों के कर्तव्य को दर्शाता है।मूल कर्तव्य6
बाएँ से दाएँ 5सरकार का अंग, जो कानून बनाता है।विधायिका4
बाएँ से दाएँ 6वह प्रक्रिया जो संविधान में परिवर्तन के लिए प्रयोग की जाती है।संशोधन4
बाएँ से दाएँ 8सरकार का अंग, जो कानून को क्रियान्वित करता है।कार्यपालिका5

काटने वाले अक्षर, जिनसे उत्तर जाँचे जा सकते हैं —

  • विधायिका का पहला अक्षर ‘वि’ संविधान सभा के दूसरे अक्षर से मिलता है।
  • विधायिका का अंतिम अक्षर ‘का’ मूल अधिकार के पाँचवें अक्षर से मिलता है।
  • संशोधन का अंतिम अक्षर ‘न’ संविधान सभा के चौथे अक्षर से मिलता है।
  • कार्यपालिका का अंतिम अक्षर ‘का’ उद्देशिका के अंतिम अक्षर से मिलता है।
सुझाव: पहले वे उत्तर भरिए जिन पर पूरा विश्वास हो — हीलियम, विधायिका, संशोधन — और फिर काटने वाले अक्षरों की सहायता से लंबे उत्तर भरिए। पुस्तक में इन्हीं अवधारणाओं के लिए ‘मौलिक अधिकार’ और ‘मौलिक कर्तव्य’ शब्द भी प्रयुक्त हुए हैं (चित्र 10.14), पर पहेली के खानों की संख्या मूल अधिकार और मूल कर्तव्य से मेल खाती है — वही रूप पृष्ठ 221 और 223 पर भी आया है।
ये आठ ही क्यों: इन्हें एक साथ पढ़िए तो यही पूरा अध्याय है — संविधान किसने बनाया (संविधान सभा), वह कैसे आरंभ होता है (उद्देशिका), वह क्या देता है (मूल अधिकार), हमसे क्या माँगता है (मूल कर्तव्य), शासन कैसे चलता है (विधायिका, कार्यपालिका), वह कैसे बढ़ता है (संशोधन), और मूल प्रति कैसे सुरक्षित है (हीलियम)।
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