अन्वेषण अध्याय 10 इसे अनदेखा न करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जिस प्रकार आपकी पाठ्यपुस्तक में अनेक खंड और अध्याय होते हैं, उसी प्रकार भारत के संविधान में 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हैं। प्रत्येक भाग में कई खंड हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। जब यह लागू हुआ था, तब इसमें 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं। इन्हें आपको कंठस्थ करने की आवश्यकता नहीं है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि 1950 के बाद ये संख्याएँ क्यों बढ़ी होंगी?
उत्तर

क्योंकि संविधान एक जीवंत प्रलेख है। देश की आवश्यकताएँ बदलने पर संशोधनों के माध्यम से नए भाग और अनुसूचियाँ जोड़ी जाती रहीं।

1950 — 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ
आज — 25 भाग, 12 अनुसूचियाँ
अंतर — सत्तर से अधिक वर्षों में 3 भाग और 4 अनुसूचियाँ जुड़ीं

अध्याय स्वयं इसके दो कारण देता है —

  • नागरिकों के लिए नए दायित्व जोड़े गए। ‘भाग 4-ए : मूल कर्तव्य’ वर्ष 1976 में जोड़ा गया — एक पूरा नया भाग।
  • नई संस्थाएँ बनीं। पंचायती राज व्यवस्था संविधान का मूल भाग नहीं थी; इसे 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया, जिससे स्थानीय स्वशासन प्रलेख में सम्मिलित हुआ।

सामान्यतः संख्याएँ तब बढ़ती हैं जब —

  • कोई विषय इतना महत्वपूर्ण हो जाए कि उसके लिए अलग भाग चाहिए (स्थानीय शासन, नागरिकों के कर्तव्य);
  • सूचियाँ बढ़ानी पड़ें — अनुसूचियाँ अधिकतर सूचियाँ ही हैं (राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों की, भाषाओं की, केंद्र और राज्यों के विषयों की), और नए राज्य बनने तथा नई भाषाएँ जुड़ने पर ये बदलती हैं;
  • समाज स्वयं बदले — और संविधान निर्माताओं ने इसके लिए जानबूझकर स्थान छोड़ा था।
ऐसा क्यों: निर्माता जानते थे कि वे हर बात का पूर्वानुमान नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने प्रलेख को जड़ बनाने के बजाय परिवर्तन की सावधानीपूर्ण प्रक्रिया रखी — संसद में चर्चा, कभी-कभी राज्यों की विधान सभाओं में भी, और प्रायः जनता की राय। भागों और अनुसूचियों का बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि संविधान काम कर रहा है, न कि यह कि वह खराब लिखा गया था।
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