संविधान वह प्रलेख है, जो किसी देश के मूल सिद्धांतों और कानूनों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है। अध्याय इसे देश के लिए नियम-पुस्तिका कहता है।
अध्याय के अनुसार संविधान निम्नलिखित बातें निर्धारित करता है —
- सरकार के तीन अंगों — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — की संरचना, भूमिकाएँ और उत्तरदायित्व;
- इन तीनों अंगों के मध्य संतुलन और नियंत्रण की व्यवस्था, जिससे निष्पक्षता, उत्तरदायित्व और जवाबदेही सुनिश्चित हो;
- नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का उल्लेख;
- राष्ट्र के दीर्घकालिक लक्ष्यों और आकांक्षाओं की रूपरेखा।
भारतीय संविधान सहित विश्व के अनेक संविधान उन आदर्शों और मूल्यों को भी दर्शाते हैं जिनके प्रति देश प्रतिबद्ध है — सभी के लिए समानता और न्याय, बंधुत्व, विविधता में एकता और स्वतंत्रता। वास्तव में यही मूल्य संविधान के कानूनों की नींव बनते हैं।
आवश्यकता क्यों — अध्याय के कबड्डी मैच को याद कीजिए। विवाद केवल इसलिए शांति से सुलझा क्योंकि रेफरी के पास एक नियम-पुस्तिका थी, जिसे दोनों कप्तान पहले से स्वीकार कर चुके थे। देश तो कबड्डी के मैदान से कहीं बड़ा और कहीं अधिक विविध है —
| संविधान के बिना | संविधान के साथ |
|---|---|
| जो सबसे शक्तिशाली हो, वही निर्णय करे | शक्ति उन लिखित नियमों से सीमित, जिन्हें सबने स्वीकारा है |
| कानून बनाने या बदलने की कोई तय प्रक्रिया नहीं | कानून बनाने, लागू करने और परखने की स्पष्ट प्रक्रिया |
| अधिकार शासकों की इच्छा पर निर्भर | अधिकारों की गारंटी, जिनके लिए न्यायालय जाया जा सकता है |
| हर विवाद झगड़े में बदल जाए | विवादों का निपटारा स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा |