प्र1.
आपके विचार में ऑनलाइन और प्रत्यक्ष क्रय के क्या लाभ और हानि हैं? इसका उत्तर विक्रेता और क्रेता दोनों के दृष्टिकोण से पता कीजिए।
उत्तर
चार दृष्टिकोण हैं, इसलिए उत्तर को चार खानों की तालिका में रखिए।
| लाभ | हानि | |
|---|---|---|
| ऑनलाइन — क्रेता | घर बैठे, किसी भी समय, “हजारों किलोमीटर दूर” से भी क्रय; बहुत बड़ी विविधता; कीमतों की सरल तुलना; अन्य उपभोक्ताओं की ऑनलाइन समीक्षा; घर तक सामान; ऑनलाइन भुगतान; ऑनलाइन कक्षाओं जैसी सेवाएँ बिना बाहर निकले | वस्तु को छूकर, सूँघकर या पहनकर नहीं देख सकते; प्रतीक्षा करनी पड़ती है; गलत या टूटा सामान आने का जोखिम; वापसी झंझट भरी; मोल-तोल नहीं; फोन, इंटरनेट और थोड़ी डिजिटल समझ आवश्यक |
| ऑनलाइन — विक्रेता | दुकान के बिना पूरे देश और विदेश तक पहुँच; दुकान का महँगा किराया नहीं; चौबीसों घंटे खुला; पैकिंग और वितरण संग्राहक सँभाल लेता है; विनिर्माता अपने आगत भी ऑनलाइन खरीद सकते हैं | एक ही स्क्रीन पर हजारों विक्रेताओं से होड़, प्रायः केवल कीमत पर; संग्राहक को कमीशन देना पड़ता है; बुरी समीक्षा तेजी से फैलती है; वापसी और शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं की पैकिंग का खर्च |
| प्रत्यक्ष — क्रेता | भुगतान से पहले देखना, छूना और परखना; सामान तुरंत घर; मोल-तोल; वर्षों से भरोसे वाले दुकानदार से व्यवहार; बदलना आसान; वितरण शुल्क नहीं | समय और आने-जाने का खर्च; केवल पास की दुकानों का माल; दुकान के समय की बाध्यता; अनेक दुकानों की कीमतें तुलना करना कठिन |
| प्रत्यक्ष — विक्रेता | आमने-सामने ग्राहक को समझा सकता है; लंबा संबंध बनता है, “कई पीढ़ियों तक” भी; भुगतान तुरंत; पैकिंग और कूरियर का खर्च नहीं | किराया, बिजली और कर्मचारियों का खर्च; केवल आस-पास के ग्राहक; दिन भर दुकान पर रहना; दुकान के आकार जितना ही माल |
सुझाव: दोनों एक-दूसरे के शत्रु नहीं हैं। आज अनेक परिवार वस्तु देखते प्रत्यक्ष दुकान में हैं और खरीदते ऑनलाइन हैं, या ऑनलाइन मँगाकर दुकान से ले आते हैं। अच्छा उत्तर यह भी लिखता है।