अन्वेषण अध्याय 12 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपके विचार में ऑनलाइन और प्रत्यक्ष क्रय के क्या लाभ और हानि हैं? इसका उत्तर विक्रेता और क्रेता दोनों के दृष्टिकोण से पता कीजिए।
उत्तर

चार दृष्टिकोण हैं, इसलिए उत्तर को चार खानों की तालिका में रखिए।

लाभहानि
ऑनलाइन — क्रेताघर बैठे, किसी भी समय, “हजारों किलोमीटर दूर” से भी क्रय; बहुत बड़ी विविधता; कीमतों की सरल तुलना; अन्य उपभोक्ताओं की ऑनलाइन समीक्षा; घर तक सामान; ऑनलाइन भुगतान; ऑनलाइन कक्षाओं जैसी सेवाएँ बिना बाहर निकलेवस्तु को छूकर, सूँघकर या पहनकर नहीं देख सकते; प्रतीक्षा करनी पड़ती है; गलत या टूटा सामान आने का जोखिम; वापसी झंझट भरी; मोल-तोल नहीं; फोन, इंटरनेट और थोड़ी डिजिटल समझ आवश्यक
ऑनलाइन — विक्रेतादुकान के बिना पूरे देश और विदेश तक पहुँच; दुकान का महँगा किराया नहीं; चौबीसों घंटे खुला; पैकिंग और वितरण संग्राहक सँभाल लेता है; विनिर्माता अपने आगत भी ऑनलाइन खरीद सकते हैंएक ही स्क्रीन पर हजारों विक्रेताओं से होड़, प्रायः केवल कीमत पर; संग्राहक को कमीशन देना पड़ता है; बुरी समीक्षा तेजी से फैलती है; वापसी और शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं की पैकिंग का खर्च
प्रत्यक्ष — क्रेताभुगतान से पहले देखना, छूना और परखना; सामान तुरंत घर; मोल-तोल; वर्षों से भरोसे वाले दुकानदार से व्यवहार; बदलना आसान; वितरण शुल्क नहींसमय और आने-जाने का खर्च; केवल पास की दुकानों का माल; दुकान के समय की बाध्यता; अनेक दुकानों की कीमतें तुलना करना कठिन
प्रत्यक्ष — विक्रेताआमने-सामने ग्राहक को समझा सकता है; लंबा संबंध बनता है, “कई पीढ़ियों तक” भी; भुगतान तुरंत; पैकिंग और कूरियर का खर्च नहींकिराया, बिजली और कर्मचारियों का खर्च; केवल आस-पास के ग्राहक; दिन भर दुकान पर रहना; दुकान के आकार जितना ही माल
सुझाव: दोनों एक-दूसरे के शत्रु नहीं हैं। आज अनेक परिवार वस्तु देखते प्रत्यक्ष दुकान में हैं और खरीदते ऑनलाइन हैं, या ऑनलाइन मँगाकर दुकान से ले आते हैं। अच्छा उत्तर यह भी लिखता है।
प्र2.
कुछ सेवाओं के लिए व्यक्तिगत संपर्क की आवश्यकता होती है, जैसे कि कपड़ों की सिलाई, जिसकी सेवा ऑनलाइन प्रदान नहीं की जा सकती है। क्या आप ऐसी अन्य सेवाओं का सुझाव दे सकते हैं, जिनके लिए प्रत्यक्ष बाजार की आवश्यकता होती है?
उत्तर

हर वह सेवा जिसमें व्यक्ति, शरीर या वस्तु का वहाँ उपस्थित होना अनिवार्य है। अध्याय के अपने चित्र दो उदाहरण पहले ही दे देते हैं — सैलून (चित्र 12.19) और वस्त्रों की दुकान (चित्र 12.18)।

सेवाऑनलाइन क्यों नहीं हो सकती
बाल काटना, सैलून, मालिशनाई के हाथ आपके बालों तक पहुँचने ही चाहिए
दंत-चिकित्सा, शल्य-चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, टीकाकरणशरीर की जाँच और उपचार प्रत्यक्ष रूप से करना पड़ता है
साइकिल, कार, मोबाइल या वॉशिंग मशीन की मरम्मतमिस्त्री को मशीन खोलनी पड़ती है
नल-मरम्मत, बिजली का काम, बढ़ईगीरी, घर की पुताईकाम उस भवन पर होता है जिसे कहीं भेजा नहीं जा सकता
रेस्तराँ का भोजन, ठेले की चाय, चाट-पकौड़ीपका भोजन वहीं, गर्म और ताजा खाया जाता है
सिनेमा हॉल, खेल का मैदान, नाटक, मेलाआधा आनंद भीड़ में उपस्थित होने का ही है
आभूषण, चश्मा, जूते या गद्दा खरीदनानाप, भार और अनुभव पहले परखना पड़ता है
विवाह के वस्त्रों की सिलाईनाप और फिटिंग के लिए कई बार प्रत्यक्ष बैठकें आवश्यक
ऐसा क्यों होता है: कोई सेवा ऑनलाइन तभी जा सकती है जब उसका पूरा रूप सूचना बनकर यात्रा कर सके — शब्द, चित्र, ध्वनि और धन। ऑनलाइन कक्षा चलती है क्योंकि पढ़ाना सूचना है। बाल काटना सूचना नहीं है, इसलिए वह प्रत्यक्ष बाजार में ही रहता है।
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