अन्वेषण अध्याय 12 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप किसी ऐसे बाजार के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ मोल-तोल कम प्रचलित है और क्यों?
उत्तर

हाँ, अनेक हैं। सबसे स्पष्ट उदाहरण है ऑनलाइन बाजार, और उसके बाद हर वह बाजार जहाँ कीमत छपी हुई, नियंत्रित या मशीन द्वारा तय होती है।

बाजारवहाँ मोल-तोल क्यों नहीं होता
ऑनलाइन ऐप और वेबसाइटक्रेता और विक्रेता कभी मिलते ही नहीं। संग्राहक का सॉफ्टवेयर एक ही कीमत लाखों क्रेताओं को एक साथ दिखाता है; दूसरी ओर बहस करने के लिए कोई व्यक्ति है ही नहीं।
मॉल, सुपरमार्केट और ब्रांडेड स्टोरवस्तु पर अधिकतम खुदरा मूल्य छपा होता है और बिल काउंटर पर बनता है। विक्रयकर्ता को कीमत बदलने का अधिकार नहीं होता, और वही कीमत हर ग्राहक पर लागू होनी चाहिए।
औषधियाँ और अन्य मूल्य-नियंत्रित वस्तुएँसरकार जीवन-रक्षक दवाओं की ऊपरी सीमा तय कर देती है। दवा विक्रेता उससे अधिक ले नहीं सकता और कम लेने की गुंजाइश भी कम होती है।
पेट्रोल पंप, रेल-बस टिकट, सिनेमा टिकटकीमत केंद्रीय रूप से तय होती है और सबके लिए एक-सी होती है; विक्रेता स्वयं कीमत तय नहीं करता।
न्यूनतम मूल्य पर गेहूँ, धान या मक्का की बिक्रीन्यूनतम मूल्य का उद्देश्य ही यह है कि उसे नीचे न लाया जा सके — यही किसान की रक्षा करता है।

मोल-तोल इसके ठीक विपरीत स्थितियों में जीवित रहता है — हाट, सब्जी का ठेला, मछली बाजार, कपड़े या आभूषण का बाजार — जहाँ हर विक्रेता अपनी कीमत स्वयं तय करता है, कोई दो वस्तुएँ बिलकुल एक जैसी नहीं होतीं, और क्रेता-विक्रेता आमने-सामने खड़े होते हैं।

ऐसा क्यों होता है: मोल-तोल तभी संभव है जब एक विक्रेता दो क्रेताओं से अलग-अलग कीमत ले सके। जिस क्षण कीमत सबके लिए एक होनी अनिवार्य हो जाती है — चाहे वह छपी हो, नियंत्रित हो या स्क्रीन पर दिख रही हो — मोल-तोल के लिए कुछ बचता ही नहीं।
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